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मावे के काले कारोबार तक पहुंचा भास्कर:मावे में आलू, आटा और सूजी की मिलावट, व्यापारी बाेला- 10 हजार रुपए दो तो सैंपल फेल नहीं होता

सागर10 महीने पहलेलेखक: अतुल तिवारी
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केसली के 15 गांव में तैयार हो रहा मावा, फिर पठाखुर्द में लगती है मंडी - Dainik Bhaskar
केसली के 15 गांव में तैयार हो रहा मावा, फिर पठाखुर्द में लगती है मंडी

केसली का पठाखुर्द गांव मावे की मंडी बन गया है। यहां आसपास के 15 गांव से पशुपालक शुद्ध मावा लाकर व्यापारियों को बेचते हैं। फिर ये व्यापारी इनमें आलू, आटा, सूजी, मीठा सोड़ा, मैदा की 50 फीसदी तक मिलावट करते और इस मावे को सागर सप्लाई कर दिया जाता है। सागर के व्यापारी इस मावे को 165 से 180 रुपए किलो तक खरीदकर 300 रुपए किलो बेच रहे हैं। इसी मावे की मिठाइयां बनाई जा रही है, जिन्हें लोग दुकानों से महंगे दाम पर खरीद रहे हैं। अकेले इस गांव से 3 क्विंटल मावा रोज सागर पहुंच रहा है।

इस पूरे मामले में खाद्य एवं औषधि विभाग की मिलीभगत सामने आ रही है, क्योंकि व्यापारियों का साफ कहना है कि जब भी अफसर सैंपल लेते हैं तो उन्हें 10 हजार रुपए दे देते हैं। इसके बाद हमारे मावे का सैंपल फेल नहीं होता। इधर, खाद्य एवं औषधि विभाग ने पठाखुर्द गांव से मावे के जो सैंपल लिए थे, पांच महीने बाद भी उनकी रिपोर्ट नहीं आई है। इससे साफ होता है कि मावे की मिलावट को अफसर शह दे रहे हैं।

मिलीभगत का खेल देखिए

खाद्य एवं औषधि विभाग ने पठाखुर्द गांव से मावे के जो सैंपल लिए थे, पांच महीने बाद भी उनकी रिपोर्ट नहीं आई, इसी की आड़ चल रहा मिलावटी मावे का कारोबार

मावे में मिलावट की कैमेस्ट्री

165 रुपए में एक किलो मावा बेच रहे हैं पठा के व्यापारी, क्योंकि इसमें 50% तक की जा रही है मिलावट

5 माह में 5 सैंपल लिए, रिपोर्ट अटका दी

खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने पिछले वर्ष 15 अक्टूबर को केसली के पठाखुर्द गांव में सतेन्द्र जैन मावा भंडार से सैंपल लिए। उसी दिन पठा गांव में ही जिनेन्द्र कुमार जैन के यहां से भी मावा का सैंपल लिया लेकिन जांच रिपोर्ट नहीं आई है। 4 जनवरी को खुरई में रेलवे स्टेशन के पास चौरसिया होटल, 16 को राहतगढ़ बस स्टैंड स्थित शर्मा स्वीट्स और 5 मार्च को सदर की अंबिका स्वीट्स एंड नमकीन से भी मावा के सैंपल लिए गए, लेकिन इनकी भी जांच रिपोर्ट लंबित है।
इन गांवों में बन रहा मावा : पठाखुर्द, तूमरी, नारायणपुर, ऊंटकटा, झिरियाखेड़ा, बेरखेरी, तुलसीपाट, बसा, खैरी, रामगढ़ा, खैरी जोलनपुर, सोनपुर और अर्जनी। इनके अलावा राहतगढ़ के शिकारपुर, मसानियां, जामुनढाना, मानकचौक, बरवटू में भी मावे की भट्टियां चल रही हैं।

ऐसे समझें मिलावट का गणित

  • 1 लीटर दूध से बनने वाले मावे की मात्रा : 250 ग्राम
  • 1 किलो मावा तैयार करने में दूध की मात्रा : 4 लीटर
  • 1 लीटर दूध की कीमत : 50 रुपए
  • 4 लीटर दूध की कीमत : 200 रुपए
  • पठा गांव में 1 किग्रा मावा की कीमत: 165 से 180 रु.
  • सागर में मावे के दाम : 280 से 300 रुपए किलो

भास्कर स्टिंग; पैसे न दो तो अच्छे माल को बता देते हैं खराब

रिपोर्टर : मुझे बाहर सप्लाई करने रोज मावा चाहिए, क्या मिल जाएगा? व्यापारी : मिल जाएगा, जितना चाहिए उतना। रिपोर्टर : पठा से सागर भेजने में सैंपलिंग या माल पकड़े जाने का डर तो नहीं रहेगा? व्यापारी : लाइसेंस बनवाना पड़ेगा, पैसे भी देने पड़ेंगे, सैंपल पास करवाने के पैसे लगते हैं। रिपोर्टर : कितने रुपए लगेंगे, सैंपल पास होने की क्या गारंटी रहेगी? व्यापारी : महीने-डेढ़ महीने पहले सागर से टीम आई थी, मावा के सैंपल लिए तो उन्हें पैसे देने पड़े और फिर केसली में भी पैसे देने पड़े। रिपोर्टर : कितने रुपए देना पड़े आपको? व्यापारी : हम पांच लोग मावा का व्यापार करते हैं तो 50 हजार रुपए देने पड़े। रिपोर्टर : फिर सैंपल तो पास हो जाता है? व्यापारी : अरे पैईसा में सब कुछ हो जाता है, पैसे नहीं दे रहे तो अच्छा माल है, उसे भी खराब बता देंगे। पैसे देंगे तो सैंपल तो पास करेंगे ही। (भास्कर के पास व्यापारी से बातचीत का पूरा वीडियाे भी है)

लैब में स्टाफ कम होने से रिपोर्ट लंबित
^जांच के लिए लैब की क्षमता से ज्यादा सैंपल भोपाल भेजे हैं। कुछ प्राइवेट लैब से भी जांच कराई है। भोपाल लैब में भी स्टाफ कम है। इसलिए कुछ पुराने सैंपल की रिपोर्ट लंबित है। खाद्य विभाग की टीम सघन जांच कर रही है। यदि कही से भी मिलावटी मावे की सूचना मिलती है तो सैंपल लेकर कार्रवाई करेंगे।
- पंकज श्रीवास्तव, फूड एंड ड्रग इंस्पेक्टर

तहसीलदार से कराएंगे सैंपलिंग
^मावा में मिलावट की बात सामने आई है तो मैं मौके पर तहसीलदार को भेजकर सैंपलिंग कराता हूं। मेरे निर्देश पर सैंपल की जांच रिपोर्ट भी प्रयोगशाला से जल्द आ जाएगी। भोपाल प्रयोगशाला में सैंपल का लोड बढ़ने से कुछ सैंपल की रिपोर्ट लंबित रह गई होगी।
- दीपक सिंह, कलेक्टर

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