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64 दिन बाद राहत:संक्रमण से कोई मौत नहीं, और न ही कोरोना प्रोटोकाॅल से अंतिम संस्कार

सागर8 दिन पहले
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  • मार्च, अप्रैल पर भारी मई, 30 दिन में कोरोना प्रोटोकाल से 480 लोगों का दाह संस्कार

कोरोना संक्रमण के कम होने के साथ ही अब मौतों को सिलसिला भी कम होता जा रहा है। 3 अप्रैल 2021 के बाद से नरयावली नाका मुक्तिधाम में कोई भी ऐसा दिन नहीं रहा, जब कोरोना प्रोटोकाल के तहत शव का अंतिम संस्कार न किया हो।

एक साथ कई शवों के अंतिम संस्कार करने वाली टीम ने रविवार को राहत की सांस ली। कोरोना प्रोटोकाल के तहत एक भी शव मुक्तिधाम नहीं लाया गया। ऐसा 64 दिन बाद हो रहा है। उधर, सबसे ज्यादा संक्रमण भले ही मार्च और अप्रैल के बीच रहा हो, लेकिन मई में इन दोनों महीनों के मुकाबले ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। मार्च में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद अप्रैल महीने में कोरोना कर्फ्यू लगा दिया था। इस दौरान कोरोना से कई लोगों ने अपनों को खो दिया। निगम के मुक्तिधाम के आंकड़ों ने इस भयावह स्थिति को बयां कर रहे हैं। कोविड और नॉन कोविड से हुई मौतों को संख्या ही इन तीन महीनों में पिछले साल की तुलना में सबसे ज्यादा रही।

इसमें सबसे ज्यादा मौतें मई महीने की हैं। जिसमें कोरोना कर्फ्यू की सख्ती के बाद भी 480 शवों का प्रोटोकाल से अंतिम संस्कार किया गया है। हालांकि इन शवों में सागर के साथ दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना समेत अन्य जिलों और राज्यों के भी है।

यह वे मरीज थे, जो सागर के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे थे। जिनके परिजनों का शव नहीं दिया गया। अच्छी बात यह है कि रविवार को एक भी शव कोरोना प्रोटोकाल के तहत नहीं लाया गया।

30 से 50 उम्र के 234 लोगों की हुई मौतें
कोरोना के दूसरी लहर में बुजुर्गों के साथ युवाओं पर भी असर रहा। कई ऐसे लोग भी रहे जो कम उम्र में कोरोना त्रासदी का शिकार हो गए। इस महामारी में 234 लोगों ऐसे थे, जिनकी उम्र 30 से 50 के बीच थीं। इसमें भी 8 तो 20 की उम्र के नीचे हैं। जबकि 50 से 80 या उससे अधिक उम्र वाले बुजुर्ग ज्यादा रहे।

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