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लापरवाही की भेंट:शहर में लगे 78 मोबाइल टॉवर का रिनुवल नहीं, नतीजा-डीपी खुली, फेंसिंग गायब; 1100 वोल्ट करंट के नीचे से निकल रहे लोग

सागर19 दिन पहलेलेखक: संदीप तिवारी
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बड़ा बाजार में रोड पर लगा टावर। - Dainik Bhaskar
बड़ा बाजार में रोड पर लगा टावर।
  • पहले निगम करता था नवीनीकरण, 2020 से कलेक्ट्रेट से हो रहा काम, वहां पुराने टॉवर का रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं

शहर में लगे मोबाइल टॉवर में से कितने वैध हैं, कितने अवैध इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इसकी वजह है मोबाइल टॉवर काे लेकर 2020 में आई नीति। दरअसल, इसके पहले मोबाइल टॉवर लगाने की अनुमति देने और रिनुवल करने की जिम्मेदारी संबंधित निकाय की हाेती थी। उसके बाद से कलेक्ट्रेट से ऑनलाइन व्यवस्था शुरू हुई। जिसके माध्यम से टॉवर कंपनियां ऑनलाइन आवेदन करती हैं। यदि दस्तावेज में काेइ कमी हाे ताे कलेक्ट्रेट से उसे मांगा जाता है। कमी हाेने पर आवेदन निरस्त भी कर दिया जाता है।

जबकि ऑनलाइन अनुमति सीधे टेलीकॉम विभाग से ही जारी हाे जाती है। ऐसे में यहां सिर्फ 2020 के बाद आए ऑनलाइन आवेदनों के आधार पर स्वीकृत हुए मोबाइल टॉवर का ही रिकाॅर्ड उपलब्ध है। अन्य का नहीं। 2019 तक की स्थिति नगर निगम में जाे जानकारी उपलब्ध थी, उसके अनुसार शहर में 102 माेबाइल टाॅवर लगे थे। इनमें से सिर्फ 17 ने ही वर्ष -2018 और 2019 में अपना रिनुवल कराया था। जाे कि 2022 और 2023 तक वैध रहता। इसके अलावा 85 माेबाइल टाॅवर ऐसे हैं, जिनका कंपनियों ने रिनुवल कराया ही नहीं। इनमें से करीब दर्जन भर ऐसे भी हैं, जिनका नवीनीकरण 2010 और 2011 में लगने के बाद से ही नहीं हुआ है। जबकि 2020 की नीति आने के पहले तक निगम द्वारा हर 5 साल में सभी टाॅवर का नवीनीकरण कराने का नियम था। परंतु निगम के जिम्मेदारों द्वारा इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया।

निगम के एई- चौधरी का कहना है कि कितने टॉवर वैध हैं या अवैध यह कलेक्ट्रेट से ही पता चल सकता है। हमारे पास 3 साल पुराना ही रिकाॅर्ड है। तब से कोई रिनुवल अब तक नहीं हुआ है। इस तरह की स्थिति का फायदा माेबाइल कंपनियां उठा रही हैं। उन्हाेंने सुरक्षा के लिए जरूरी मापदंड अपनाना छाेड़ दिया है। इसी का नतीजा है कि माेबाइल टाॅवर के पास लगे ट्रांसफार्मर यानी डीपी खुली पड़ी हैं। माेबाइल टाॅवर के चाराें तरफ की फेंसिंग गायब है। जिसके चलते लाेग जाने-अनजाने में 1100 वॉल्ट का करंट हाेने के बाद भी टाॅवर के नीचे से आ-जा रहे हैं। बच्चे भी आसपास खेलते रहते हैं। इससे कभी भी बड़े हादसे का अंदेशा बना रहता है। इसके साथ ही रेडिएशन के मानक नहीं मापे जाने से भी खतरा बना ही हुआ हैै।

नियमाें के हिसाब से घराें से 20 से 55 मीटर की दूरी जरूरी, अधिकांश में 5 मीटर तक नहीं बची

एंटीना नियम दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि मोबाइल टाॅवर में 1 एंटीना है, तो इसे घर से कम से कम 20 मीटर की दूरी पर स्थापित किया जाना चाहिए। 2 एंटीना के मामले में न्यूनतम दूरी 35 मीटर होनी चाहिए, 4 एंटीना के लिए यह 45 मीटर होनी चाहिए। जबकि 6 एंटीना के लिए न्यूनतम दूरी 55 मीटर होनी चाहिए। इसके साथ ही मोबाइल टाॅवर जिस जगह पर लगाया जा रहा है, वहां आने-जाने के लिए रोड की चौड़ाई 5 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए। जबकि शहर में 3 मीटर तक चाैड़ी सड़क वाले क्षेत्र में माेबाइल टाॅवर लगे हुए हैं।

टाॅवरों को लगाने में यदि तय मानकों का पालन हो तो खतरा और बढ़ जाता है

माेबाइल टाॅवर पर जितने ज्यादा एंटीना लगे होंगे, उतना ही ज्यादा रेडियो फ्रिकवेंसी वाला मेडिकल फील्ड रेडिएशन होगा। जो मैग्नेटिक होगा रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा। यह रेडिएशन शरीर के प्रत्येक स्तर पर यानी की कोशिका के स्तर पर असर करेगा जिससे कि रेडिएशन से थकान, अनिद्रा, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, सिरदर्द, दिल की धड़कन बढ़ना, पाचन क्रिया पर असर, कैंसर का खतरा बढ़ जाना, ब्रेन ट्यूमर आदि रोग होने की आशंका ज्यादा बनी रहती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन टाॅवरों को लगाने में यदि तय मानकों जैसे ऊंचाई, आबादी से दूरी, स्थान आदि का पालन न हुआ हो तो यह खतरा और बढ़ जाता है।
- डाॅ. अभिषेक जैन, सीनियर मेडिकल ऑफिसर, सागर विवि अस्पताल

ऑफलाइन लगे टॉवर का रिकॉर्ड नहीं, पहले वह मंगाएंगे

पहले नगर निगम में ऑफलाइन प्रक्रिया से रिन्यूवल होता था। तो वहां से सारे टॉवर का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। इससे यह पता नहीं चल रहा है कि किन टॉवर का किन शर्तों पर कब तक के लिए रिन्यूअल हुआ है। अब एक पोर्टल तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम से रिन्युअल की प्रक्रिया होगी। एक-दो दिन में सभी मोबाइल कंपनियों को पत्र जारी कर उनके टॉवर से जुड़ी जानकारियां मंगाई जाएंगी। उसके आधार पर ही आगे की कार्यवाही करेंगे।
- राहुल शर्मा, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर

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