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गांव में कोरोना ग्राउंड रिपोर्ट:संक्रमण से नहीं, वैक्सीन के बाद बुखार का डर, खाना कौन बनाएगा इसलिए महिलाएं नहीं लगवा रहीं टीका

सागरएक महीने पहलेलेखक: विक्रांत गुप्ता/श्रीकांत त्रिपाठी
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छिरारी में एएनएम पॉजिटिव हुई तो वैक्सीनेशन सेंटर ही बंद कर दिया। - Dainik Bhaskar
छिरारी में एएनएम पॉजिटिव हुई तो वैक्सीनेशन सेंटर ही बंद कर दिया।
  • सागर जिले के छिरारी स्वास्थ्य केंद्र से लगे 16 गांव में 535 लोगों ने कराया टीकाकरण, इनमें सिर्फ 95 महिलाएं, युवा एक भी शामिल नहीं, सेंटर ही बंद करना पड़ा

सागर जिले के गांवों से 18 वर्ष से अधिक उम्र के युवा वैक्सीन के लिए स्लॉट मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सागर से 50 किमी दूर रहली तहसील का एक गांव ऐसा भी है, जहां अफवाह से पैदा हुए डर के कारण महिलाएं और युवा भी टीका नहीं लगवा रहे हैं। यह गांव है छिरारी। गांव के डब्बू नाहर ने कहा- हमारे यहां कोई महिला टीका नहीं लगवा रही।

एक महीने पहले यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ था। इस दौरान 452 बुजुर्गों ने पहला डोज भी लगवाया, लेकिन इसके बाद गांव में तीन वृद्ध महिलाओं की मौत हो गई। अफवाह ऐसी फैली कि उन्हें टीका लगवाने के बाद तेज बुखार आया था, जिससे उन्होंने दम तोड़ दिया।

इस घटना को 15 दिन बीत जाने के बाद भी लोगों भ्रम दूर नहीं हुआ है। बाद में टीकाकरण करने वाली एएनएम ही संक्रमित निकली और वैक्सीन की कमी के चलते गांव का टीकाकरण केंद्र भी बंद करना पड़ा। अब गांव में यदि किसी को टीका लगवाना है तो उसे 10 किमी दूर रहली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ेगा।

गांव के शोभाराम पटेल ने कहा- टीके के बाद आने वाले बुखार से महिलाएं डर रही हैं। उन्हें खाना बनाने से लेकर घर के कामकाज की भी चिंता है, इसलिए टीका नहीं लगवा रही। स्थिति यह है कि छिरारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े 16 गांवों में रहने वाले 22 हज़ार लोगों में से अब तक 535 ने ही टीका लगवाया।

इसी क्षेत्र के अन्य गांवों को मिलाकर अब तक कुल 26 हजार 400 लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इनमें छिरारी का एक भी युवा शामिल नहीं है। यहां केवल एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है ताला लटका है। यहां जागरूक.. 90 फीसदी बुजुर्गों का टीकाकरण, इसलिए एक भी मौत नहीं : दूसरी तरफ गौरझामर का गुगवारा गांव है। जहां सरपंच और रोजगार सहायक ने मिलकर बुजुर्गों को गाड़ी की सुविधा दी और 60 वर्ष से अधिक 311 लोगों में से 295 यानी 90 फीसदी का टीकाकरण कराया।

यहां 45 वर्ष से अधिक उम्र के भी 80 फीसदी लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं। वहीं जनता कर्फ्यू के कारण 3400 की आबादी वाले गुगवारा में अभी तक एक भी पॉजिटिव नहीं मिला और न ही कोई मौत हुई।

रहली का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज नहीं।
रहली का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज नहीं।

रहली में सरकारी डॉक्टर अपने निजी क्लिनिक पर कर रहे हैं मरीजों का इलाज

छिरारी समेत करीब 160 गांवों के वैक्सीनेशन, कोरोना की जांच और इलाज का जिम्मा रहली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर है। यहां अन्य सभी प्राथमिक और उपस्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं। रहली के बस स्टैंड स्थित एक क्लीनिक पर मरीजों की लाइन लगी हुई थी। यहां सरकारी अस्पताल और कोविड इंचार्ज डॉ. बसंत नेमा मरीजों का इलाज करते मिले।

सरकारी डॉक्टर के निजी क्लिनिक पर लगी मरीजों की भीड़
सरकारी डॉक्टर के निजी क्लिनिक पर लगी मरीजों की भीड़

यहां से हम उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो वहां डॉ. राजपूत ने डॉ. बसंत नेमा को फोन कर तुरंत अस्पताल बुलाया। डॉ. नेमा यहां पहुंचे तो पूछने पर बोले- मेरी ड्यूटी सिर्फ ऑन कॉल होती है। दरअसल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की फ्लू ओपीडी का काउंटर खाली पड़ा था, क्योंकि अस्पताल के डॉक्टर अपने क्लीनिक पर थे। इसलिए भीड़ भी वहीं थी।

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