इस बुजुर्ग का पॉवर देख आप भी चौंक जाएंगे:सागर के रिटायर्ड फॉरेस्टकर्मी ने 58 की उम्र में जॉइन की जिम, नेशनल में जीते गोल्ड

सागर6 महीने पहलेलेखक: जितेंद्र तिवारी

सागर के गोपालगंज के रहने वाले भगवानदास कश्यप। उम्र 66 साल। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से रिटायर। लेकिन जुनून ऐसा कि इन्हें देखकर नौजवान भी शरमा जाएं। उनके लिए उम्र बस नंबर्स से ज्यादा कुछ नहीं। नाती-पोते खिलाने की उम्र में वे वेट लिफ्टिंग कर रहे हैं। इसी जिद और जज्बे की बदौलत पॉवर लिफ्टिंग की नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल किया है। सबसे खास बात ये है कि उन्होंने पॉवर लिफ्टिंग की शुरुआत सिर्फ 8 साल पहले की थी। रिटायरमेंट के बाद शौकिया तौर पर इसे शुरू किया, लेकिन इतना पसंद आ गया कि नेशनल चैम्पियन बनकर माने। अब वे एशिया चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे हैं।

रिटायरमेंट के बाद 58 की उम्र में शुरू की पॉवरलिफ्टिंग
पॉवर लिफ्टर भगवानदास कश्यप फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में वनपाल के पद से सितंबर 2016 में रिटायर हुए। भगवानदास को बचपन से ही खेलों का शौक था। नौकरी के दौरान विभाग की ओर से हॉकी खेला करते थे। बढ़ती उम्र के साथ हॉकी खेल पाना मुश्किल होने लगा। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पॉवर लिफ्टिंग का निर्णय लिया। 58 साल की उम्र में शौकिया तौर पर पॉवरलिफ्टिंग शुरू की। वे रोजाना खेल परिसर स्थित जिम में पहुंचकर तैयारी करने लगे। यहां ट्रेनर नीलू पहलवान ने उन्हें पॉवर लिफ्टर बनने के लिए टिप्स दिए। भगवानदास रोजाना करीब 2 घंटे से ज्यादा समय जिम में बिताते हैं।

केरल में हुई चैम्पियनशिप में कामयाबी के झंडे गाड़े
भगवानदान ने अप्रैल माह के आखिरी हफ्ते में केरल में हुई नेशनल चैम्पियनशिप में कामयाबी के झंडे गाड़े। 66 साल की उम्र में उन्होंने वहां 59 और 110 किलो कैटेगरी में गोल्ड मेडल, डेडलिफ्ट में 150 किलो में सिल्वर मेडल, बेंचप्रेस में 62.5 किलो में कांस्य पदक जीता। वहीं, ओवरऑल में कुल 322.5 किलो में गोल्ड मेडल के साथ भगवानदास ने प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया है।

नेशनल चैंपियनशिप में मेडल हासिल करते भगवानदास।
नेशनल चैंपियनशिप में मेडल हासिल करते भगवानदास।

हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं भगवानदास
भगवानदास का जन्म 14 सितंबर 1956 में हुआ था। उनके दो बेटे और तीन नाती-पोते हैं, लेकिन इस उम्र में वे नाती-पोतों को खिलाने की बजाय शौक पूरा करने के लिए पॉवरलिफ्टिंग कर रहे हैं। शौक पूरा कराने में परिवार के लोग भी सहयोग कर रहे हैं। भगवानदास बचपन से हॉकी खेलने का शौक रखते थे। उन्होंने हॉकी खेलते हुए सिविल सर्विस स्पोर्ट्स प्रतियोगिता में कई बार हॉकी में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। बढ़ती उम्र के कारण उन्होंने हॉकी खेलना कम कर दिया।

जिम में तैयारी करते हुए भगवानदास कश्यप।
जिम में तैयारी करते हुए भगवानदास कश्यप।

गुड़-चना खाते हैं, जिम में दो घंटे पसीना बहाते हैं
भगवानदास बताते हैं कि खुद को फिट रखने के लिए शुरू से ही मैदान से जुड़ा रहा हूं। उम्र के साथ मैदान छूटने लगा, तो पॉवर लिफ्टिंग को शौक के तौर पर शुरू किया था। खुद को फिट रखने के लिए रोजाना सुबह से 2 घंटे जिम में बिताता हूं। सुबह से गुड़-चना खाता हूं। बाकी शाकाहारी भोजन करता हूं। खुद को प्रतियोगिता के लिए तैयार कर रहा हूं। उनका कहना है कि एशिया में होने वाली ओपन चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर गोल्ड मेडल जीतकर ही लौटूंगा।