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सुखी माता दरबार में अखंड पाठ:सपना बोली- जपुजी साहिब के उपदेशों को मानते हुए प्रदूषित हो रही हवा, पानी और धरती की शुद्धता के प्रयास करें

सागरएक महीने पहले
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  • संत कंवरराम वार्ड स्थित सुखी माता दरबार में चल रहा है 43 दिन का अखंड पाठ

गुरुनानक देवजी ने समूची मानवता की भलाई के लिए क्रांतिकारी विचारों से आम लोगों की गुलाम मानसिकता को सामाजिक व अध्यात्मिक आजादी के रास्ते पर डाला। पहले पातशाह समूचे विश्व के उच्चतम क्रांतिकारी दार्शनिक रहबर थे, जो समाज की उन्नति के लिए अपनी विचारधारा से मुकम्मल तबदीली लेकर आए। उन्होंने समाज से गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी को मार्गदर्शक बनाते हुए हवा, पानी व धरती को प्रदूषण से बचाने का आह्वान किया।

यह बात संत कंवरराम वार्ड मनवानी गली सुखी माता दरबार में 43 दिन के अखंड श्रीजपुजी साहिब व श्री सुखमनी साहिब पाठ में कही। उन्होंने कहा गुरुनानक देवजी के असीम गुणों को शब्दों में बता पाना कठिन है। गुरु साहिब उस समय धरती पर प्रकट हुए जब भारत देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और हर ओर अंधेरा छाया था। उस समय गुरुजी ने जालिम हाकिमों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए अपराध सहन को मानसिक कमजोरी और आत्म सम्मान-गैरत का विरोध बताते हुए गुलामी कबूल कर चुकी देश की मानसिकता को आजाद होने के लिए प्रेरित किया।

उन्होने सामाजिक इंकलाब लाकर समाज की एकता कायम की। गुरुनानक देवजी ने सैद्धांतिक तौर पर खालसा पंथ की नींव रख दी थी, जिसको दशम पातशाह ने 1699 ई. में प्रत्यक्ष रूप में प्रकट किया। उन्होंने कहा कि पहले पातशाह ने सदियों पहले मानवीय अधिकारों की बात कर दी, स्त्री जाति को अपनी पवित्र वाणी में समानता और सम्मान दिया और कर्मकांड, जात-पात के बंधन व वहम-भ्रम को तोड़ कर परमात्मा एक है, का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की ओर से क्षमा करे संगत-पंगत, नाम सिमरन के सिद्धांत सिख धर्म की विलक्षणता के स्तंभ हैं।

जपुजी साहिब की वाणी के उपदेशों को मानते हुए प्रदूषित हो रही हवा, पानी और धरती की शुद्धता के लिए प्रयत्न करना गुरु साहिब प्रति सच्ची श्रद्धा है। दसवें पातशाहजी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को गुरगद्दी सौंप कर देहधारी गुरु प्रथा को खत्म करके हमें शबद गुरु के साथ जुड़ने का संदेश दिया। सुखी माता मंदिर सेवादार जीविका दरयानी, अंकिता फब्वानी, सोनम नागवानी, कंचन जेसवानी, डोली आहूजा, तृप्ति मनवानी आदि भी पाठ कर रही हैं।

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