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डॉक्टर्स-डे:किसी ने 21 दिन में शुरू की वायरोलॉजी लैब, तो कोई पॉजिटिव होने के बाद वापस काम पर लौटा

सागर4 महीने पहले
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आज वर्ल्ड डॉक्टर्स डे है। जिस पर हम ऐसे डॉक्टरों और उनके सफल कार्यों को लेकर आए हैं, जिन्होंने इस कोरोना काल में दिन-रात अपने कार्य स्थलों पर सेवाएं देकर जांच और इलाज की प्रक्रियाओं का आसान बनाया है। जिसके कारण आज सागर में 258 मरीज स्वस्थ्य होकर अपने घर पहुंच सके। वहीं एक डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो कोरोना पॉजिटिव हुए हैं और ठीक होते ही वापस अपने काम पर लौटे। 

21 दिन में शुरू की वायरोलॉजी लैब, आज एम्स के बराबर हो रहीं सागर में जांचें
इस सूची में सबसे पहला नाम वायरोलॉजी लैब के इंचार्ज डॉ. सुमित रावत का है। डॉक्टर रावत ने 21 दिन के भीतर वायरोलॉजी लैब शुरू करने का काम किया है, इतनी तेजी से अब तक कहीं में लैब विकसित नहीं हुई। इतना नहीं जहां सागर की लैब से शुरूआत में एक पीसीआर मशीन के साथ अधिकतम 100 सैंपलों की जांच हो सकती थी, उन्होंने 245 जांचें एक दिन में करके दिखाई हैं। वहीं अब दो पीसीआर मशीन आने के बाद सागर में एक दिन के भीतर 550 से भी अधिक जांचें हुई जो कि भोपाल एम्स के बराबर हैं।

कम संसाधनों में भी रिकॉर्ड सैंपलिंंग कराई, हर मरीज की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री खुद ही लेते हैं
वहीं दूसरी डॉक्टर टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. तल्हा साद हैं। जिन्होंने कोरोना काल के दौरान सागर में आए जमातियों, प्रवासी मजदूरों की स्क्रीनिंग से लेकर हर पॉजिटिव मरीज की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री निकालकर देने में अहम भूमिका निभाई है। डॉ. तल्हा साद ने कोरोना केयर सेंटरों पर सैंपलिंग की व्यवस्था और संदिग्धों की पहचान के दौरान आईसीएमआर की गाइड लाइंस का भी ख्याल रखा। इनके कार्यकाल में एक दिन के भीतर 200 से अधिक संदिग्धों की सैंपलिंग एक ही सेंटर से की गई।पॉजिटिव मरीजों से खुद बात कर उनकी कॉन्टेक्ट हिस्ट्री भी तैयार करते हैं। 

बचपन में पोलियो का शिकार होने से एक पैर से लाचार, 3 माह से लगातार दे रहे सेवाएं
तीसरे बीएमसी के जूनियर डॉक्टर डॉ. पुष्पेंद्र कुमार हैं। बंडा निवासी डॉ. पुष्पेंद्र बचपन में पोलियो का शिकार हुए थे। लेकिन इसके उन्होंने बीएमसी दाखिला लेकर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और अब कोरोना काल में बीड़ी अस्पताल में जूनियर डॉक्टर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। डॉ. पुष्पेंद्र ने बताया कि ड्यूटी के दौरान कई मामले ऐसे भी आए जिसमें घर का मुखिया पॉजिटिव हुआ और परिवार में खाने के लाले पड़ गए। ऐसे में उन्होंने कई परिवारों की आर्थिक रूप से भी सहायता की। एक पैर दिव्यांग होने के बाद भी वे पिछले तीन माह से 8 से 9 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। 

सैंपलिंग के दौरान कोरोना पॉजिटिव हुए थे डॉक्टर, अब ड्यूटी पर लौटे 
बीएमसी में आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्णदीप साहू पिछले दो माह से टीबी अस्पताल में ड्यूटी कर रहे थे, इसी दौरान  संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग करते समय वे भी संक्रमित हुए। सर्दी-बुखार की शिकायत होने पर 2 जून को उनकी सैंपलिंग हुई और रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। जिसके बाद डॉ. साहू ने 10 दिन के भी कोरोना को हराया और बीएमसी डिस्चार्ज होने के बाद अपना होम क्वारेंटाइन पीरियड भी पूरा किया। पूरी तरह स्वस्थ्य होने के बाद डॉ. साहू अब फिर बीड़ी अस्पताल में कोरोना संदिग्धों की जांच का जिम्मा संभाल रहे हैं।

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