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  • The Corporation Has Piled Up 1.70 Lakh Tonnes Of Garbage, Fungi flies Are Spreading, 1100 People Of Amavani Are Itchy wounds, Disease stricken

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जहन्नुम सी जिंदगी:निगम ने 1.70 लाख टन कचरे का ढेर लगा दिया, फंगस-मक्खियां फैल रहीं, अमावनी के 1100 लोग खुजली-घाव, बीमारी से त्रस्त

सागरएक महीने पहले
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(डॉ. शरद तिवारी, डर्मोलाजिस्ट) कचरे से उठती बदबू...और कीचड़ से भरी सड़क... यह नजारा है सागर से सटे (5 किमी दूर) अमावनी गांव का। किसी के पैर में इंफेक्शन है तो किसी के हाथ में फंगस। लोग इतने सक्षम भी नहीं है कि वे अपना ठीक से इलाज करा सके। हालांकि फंगस और स्कीन इंफेक्शन की बीमारियां ऐसी है कि दवाइयों के साथ साफ-सफाई पर भी ध्यान देना पड़ता है लेकिन अमावनी में ऐसा तभी संभव हो सकता है जब यहां शहरभर का कचरा नगर निगम फेंकना बंद कर दें और चार साल में जो कचरे का पहाड़ा खड़ा कर दिया है, उसकी जल्द से जल्द खाद बना ली जाएं।

1 लाख 70 हजार टन कचरे के पास रहने को मजबूत गांव के 1100 ग्रामीणों की तरह यहां आम लोग रहने की कल्पना तक नहीं कर सकते। गंदगी के कारण दिन में मक्खियां और रात में मच्छर बढ़ जाते हैं। गांव में बीमारियां तेजी से बढ़ने लगी है। शहर का यह कचरा बारिश की वजह से अमावनी की ओर जाने वाले सड़क पर भी आ गया है। पक्की सड़क न होने से मुख्य सड़क कचरे और कीचड़ से भर गई है। यहां के रहवासियों को इसी कीचड़ से होकर निकलते हैं, क्योंकि गांव को जोड़ने वाली यहीं एक मात्र सड़क है, जो मुख्य सड़क से जुड़ती है।

उधर, गांव में अब धीरे-धीरे फंगस और स्कीन इंफेक्शन डिसीज बढ़ने लगी हैं। शहर का कचरा निष्पादन के लिए पहले प्रशासन ने नगर निगम को प्लांट लगाने के लिए हफसिली में जगह दी थी। ग्रामीणों के विरोध के बाद जगह बदली लेकिन कचरा अमावनी में फेंकना शुरू कर दिया। आश्चर्य की बात है कि इसे लगातार चार साल से यहां फेंका जा रहा है लेकिन अब तक इसके निष्पादन का काम शुरू नहीं किया। (डॉ. तिवारी ने भास्कर के लिए ग्राउंड रिपोर्ट की )

अमित के चेहरे की कहानी
यह है अमित वासुदेव, जो ठीक से बोल नहीं पाता। चार साल से अजीब-सी बीमारी हैं। हाथ-पैरे में खुलजी की वजह से त्वचा पर घाव बन गए। चेहरे पर पहले थोड़े मस्से थे, जो धीरे-धीरे पूरे चेहरे पर फैल गए। कचरे की वजह से मक्खियां शरीर पर आकर बैठती है। अमित मानसिक तौर पर दिव्यांग हैं, जो ठीक से चल नहीं पाता। परिवार में मां-भाई के अलावा कुछ बुजुर्ग, जो उसकी मदद करते हैं। परिजन का कहना है- चार पहले तक अमित ठीक था, गांव के पास कचरे का पहाड़ खड़ा हुआ और मक्खियां बढ़ी तो उनकी बीमारी भी बढ़ती चली गई, क्योंकि वह अपने शरीर पर बैठी मक्खियों को उड़ा भी नहीं पाता। अपनी समस्या भी नहीं बता पाता।

शरीर पर ऐसे घाव हो गए कि कपड़े पहनना भी मुश्किल

मैं 4 साल से इस बीमारी पीड़ित हूं। हाथ और जांधों पर घाव बन गए हैं। जिनसे काफी दर्द होता है। कपड़े पहनाना तक मुश्किल हो जाता है। पहले कुछ समय तक इलाज कराया है लेकिन ठीक नहीं हुआ। परिवार की जिम्मेदारी मुझ पर है और इतने पैसे नहीं है कि इसका सही ढंग से इलाज करा सकूं। ऊपर से भाई (अमित) की भी चिंता होती है। उसकी बीमारी बढ़ रही है।
धर्मेंद्र वासुदेव, (अमित का बड़ा भाई)

डॉक्टर को दिखाया तो दवा फेंक कर दी, कहा- लोगों से दूर रहना
मेरे चहरे पर छोटे-छोटे दाने निकल आए, जो खुजली के साथ धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं। डॉक्टर के पास गया तो उन्होंने भी दूर से फेंककर दवा दी। बोले- इसे खाना, ये फंगस है, इसलिए लोगों से दूर रहना। मेडिकल स्टोर से लाया क्रीम लगाने से 6 महीने में ठीक हो पाया लेकिन चेहरे पर काला निशान अब भी बने हुए हैं। ये खत्म नहीं हो रहे हैं, ऐसे में समस्या बढ़ रही है।
मुन्ना वासुदेव

कचरे और मक्खियों की वजह से शरीर पर फोड़े, घाव हो गए हैं

तीन साल से शरीर के किसी भी भाग में अचानक फोड़े हो जाते हैं, जो घाव बनकर खुद ही मिट जाते हैं। सरकारी अस्पताल में दिखाने था लेकिन कोई राहत नहीं मिली। जब तक दवाई खाओ ठीक रहता हूं, दवाई छोड़ दूं तो तो फिर फोड़े और घाव होने लगते हैं। कचने की वजह से यहां रहना ही मुश्किल हो गया है। हम गरीब है, ये जगह छोड़कर कहां जाएं?
- अखिलेश वासुदेव

पैरों पर पहले फोड़े फिर खुजली और अब चमड़ी निकलने लगी है
मैं ज्यादातर चप्पल पहनता हूं। कुछ साल से पैरों के पंजों और घुटनों के बीच फोड़े होने लगे। कभी-कभी तो पैरों से चमड़ी भी निकलने लगती थी। अब इतना पैसा नहीं कि बार-बार डॉक्टर के पास जाकर इलाज करा लें। सरकारी अस्पताल में कोई सुनता नहीं है। इसलिए घरेलू इलाज कर रहा हूं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। लगता है ऐसे ही जिंदगी चलानी पड़ेगी।
अंकित वासुदेव

ये चाहे तो बदल लें तस्वीर लेकिन बोले...

सागर में प्लांट शुरू हो गया है। अमावनी में पड़े कचरे के निष्पादन को लेकर जल्द काम शुरू किया जाना है। इसको लेकर रैमकी कंपनी से चर्चा भी हो चुकी है। अगले तीन महीने में इस कचरे का निष्पादन हो जाएगा। इसके बाद लोगों की यह समस्या भी हल हो जाएगी।
भूपेंद्रसिंह, नगरीय प्रशासन मंत्री

अमावनी के कचरे के निष्पादन के लिए पिछले दिनों नगरीय प्रशासन मंत्री ने घोषणा की है। इस कचरे को मसवासी ग्रंट के प्लांट में ही निष्पादन किया जाना है।
राजबहादुर सिंह, सासंद


अमावनी के कचरे को उसी क्षेत्र में फैलाकर उसके ऊपर मुरम डालकर पौधे लगा देना चाहिए। इससे निगम का खर्च भी कम होगा। वहां कुछ साल यह कचरा खुद-ब-खुद डी-कंपोस्ट हो जाएगा।
अभय दरे, पूर्व महापौर


अमावनी के कचरे के निष्पादन के लिए रैमकी से बात की जा रही है। इसको लेकर इंजीनियरों से प्लान तैयार कराया जा रहा है कि कैसे कम लागत में इसका निष्पादन किया जाए। हालांकि हमारा प्रयास यह है कि मसवासी ग्रंट में इसका निष्पादन हो।
आरपी अहिरवार, निगमायुक्त

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