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हरे भरे बगीचे:किसान ने दाे एकड़ के खेत काे 12 साल में 1 हजार पेड़ के हरे भरे बगीचे में बदला, अब गांव वाले कर रहे उपयाेग

सागर10 दिन पहले
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मई 2009 में पौधे लगाने की शुरुआत की थी और आज इस जगह पर करीब 1 हजार से अधिक पेड़ पौधे हैं - Dainik Bhaskar
मई 2009 में पौधे लगाने की शुरुआत की थी और आज इस जगह पर करीब 1 हजार से अधिक पेड़ पौधे हैं
  • मैंने सरपंच निधी से दो हौज बनवाए और निजी खर्च से खेत से हौज तक पानी की पाइप लाइन बिछवा दी

करीब 35 किलोमीटर दूर बंडा ब्लाक के चंदौख गांव के किसान और पूर्व सरपंच राजीव पाण्डेय ने अपने दो एकड़ के खेत को हरे-भरे घने बगीचे में अपनी मेहनत से तब्दील कर दिया है। इस बगीचे में सभी तरह के करीब 1 हजार से अधिक पेड़ पौधे हैं। जाे इस इलाके के पर्यावरण को न केवल शुध्द बना रहे हैं बल्कि यह गांव वालों के लिए सार्वजनिक उपयोग में काम में आ रहा है। इस हरे भरे बगीचे में आम, अमरूद, आंवला, नीम, बरगद, तुलसी, पीपल, सागौन, कनेर, कदम, खजूर आदि 50 से अधिक प्रजातियों के पेड़ और पौधों से यह बगीचा लहलहा रहा है।

पैतृक संपत्ति को बचाने आए थे, बन गए पर्यावरण प्रेमी राजीव बताते हैं कि शिक्षा पूरी होने के बाद पहले शहर में ही व्यवसाय करते थे पर गांव में पुरखों की जमीन की देखरेख में परिवार में किसी की रुचि नहीं थी तो मैंने गांव में खेती करने का फैसला किया। आरंभ में थोड़ी कठिनाई हुई फिर आदत पड़ गई। गांव वालों के लिए काम करना शुरू किया तो लोगों ने 2009 में यहां का सरपंच चुन लिया। तब गांव में पानी की बहुत परेशानी होती थी। एक सरकारी ट्यूबवेल खुदवाया तो वह गर्मी के दिनों में जरूरत योग्य पानी नहीं दे पाता था। मेरे खेत में ट्यूबवेल खुदवाया तो वहां पर्याप्त पानी निकल आया। उन्होंने बताया कि उन दिनों गांव के लोगों के साथ जानवरों के लिए गर्मियों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। मैंने सरपंच निधी से दो हौज बनवाए और निजी खर्च से खेत से हौज तक पानी की पाइप लाइन बिछवा दी।

ट्यूबवेल में 5 हार्सपावर का पंप लगाया तो पानी न केवल गांव वालों के लिए मिलने लगा बल्कि जानवरों के लिए भी हौज भरे जाने लगे। उन्होंने बताया कि पानी की समस्या हल होने के बाद मई 2009 में पौधे लगाने की शुरुआत की थी और आज इस जगह पर करीब 1 हजार से अधिक पेड़ पौधे हैं। चूंकि जमीन मेरी है इसलिए पौधे लाने, लगाने और मेंनटेन सब निजी खर्च से ही किया है। वर्तमान सरपंच इमरती देवी बताती हैं इस हरे भरे बगीचे का अब गांव वाले सार्वजनिक उपयोग करते हैं। यहां से किसी को फल या फूल लेने की मनाही नहीं है। गर्मियों में शादी ब्याह भी यहां से हो रहे हैं।

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