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  • The Route Is Reduced To Six Km, Yet It Is Decorated With Enthusiasm And Rangoli All The Way

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116वां वर्ष:छह किमी छोटा हुआ रुट फिर भी ऐसा उत्साह की पूरे रास्ते सजाई रंगोली और बरसाए फूल

सागरएक महीने पहले
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कांधे पर निकली चल माई

सोमवार शाम 7:45 बजे चल माई काली माई के उद्घोष के साथ पुरव्याऊ की देवी की प्रतिमा विसर्जन के लिए रवाना हुई। यहां रानीपुरा से लेकर चकराघाट तक श्रद्धालुओं में इतना उत्साह और आस्था थी कि उन्होंने माता के रूट पर हर घर के बाहर अगवानी के लिए सड़क पर रंग-बिरंगी रंगोली सजा दी। जैसे ही माता की पालकी यहां से गुजरी हर घर से श्रद्धालुओं ने उन पर पुष्प वर्षा कर अंतिम दर्शन किए और आशीर्वाद लिया।

काली तिराहा पुरव्याऊ : दोपहर करीब 3 बजे माता की प्रतिमा मंच से जैसे ही नीचे उतरी तिराहा कुछ समय के लिए शक्ति पीठ में बदल गया। यहां करीब 4 घंटे के दौरान 3 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने माता के अंतिम दर्शन और पूजा-अर्चना की।

रानीपुरा : माता की पालकी पहुंचने से पहले ही श्रद्धालुओं ने रंगोली और पेंटिंग उनके स्वागत में सड़क पर उकेर दिए थे। माता के रानीपुरा पहुंचते ही देवी भक्तों का सैलाब दर्शनों के लिए उमड़ पड़ा। आस्था में डूबे श्रद्धालुओं ने छतों से पालकी पर पुष्प वर्षा की।

बरियाघाट : पहली बार यहां से माता की पालकी इस साल गुजरने वाली थी। उत्साहित श्रद्धालुओं ने यहां माता की राह में पग-पग पर फूलों से रंगोलियां सजाई और पालकी गुजरते ही पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।

कहार बोल: 116 साल में कभी नहीं बदली परंपरा और रूट
कहार चूरामन रैकवार बताते हैं कि बीते 116 साल में ऐसा कभी नहीं हुआ कि माता की पालकी के रूट या परंपरा में बदलाव किया गया हो।

माता रानी की ऐसी ही इच्छा होगी
कहार छोटे लाल रैकवार बताते हैं कि 80 साल की उम्र का हूं। 20 साल की उम्र से माता की पालकी को कंधा देता आया हूं। पहले कभी ऐसे हालात नहीं बने। हर साल भक्तों के सैलाब के साथ सवारी निकलती रही है।

कहारों ने बनाया झील में 15 फीट का रास्ता

चकराघाट पर विसर्जन के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। यहां इन लोगों ने करीब 4 घंटे श्रमदान कर देवी मां के विसर्जन के लिए करीब 15 फीट का रास्ता तैयार किया। ताकि झील में नाव से देवी मां को ले जाकर विसर्जन किया जा सके।

2019 : यह था रूट

काली तिराहा पुरव्याऊ से रानीपुरा, गणेश मंदिर, गोपाल मंदिर, गोला कुआं, सरस्वती मंदिर, रामबाग, बड़ा बाजार, कोतवाली, गौर मूर्ति, कटरा बाजार, राधा तिराहा, कटरा बाजार, गौर मूर्ति, चकराघाट। 8 किमी का होता था फेरा

2020 : इस साल यह रूट तय था
काली तिराहा पुरव्याऊ, बरियाघाट, चकराघाट।

निकली इस रूट से : काली तिराहा पुरव्याऊ से रानीपुरा, पुरव्याऊ, बरियाघाट, चकराघाट। 2 किमी का फेरा लिया

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