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  • The Team That Rescued The People Trapped In The Strong Current Of Water Has No Vehicle Funds, The Boat Damaged In The Rescue Of The Goldsmith River Has Not Improved Yet

अधूरी तैयारी, बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त साधन नहीं:पानी के तेज बहाव में फंसे लोगों को निकालने वाली टीम के पास वाहन न फंड, सुनार नदी के रेस्क्यू में खराब हुई बोट अब तक नहीं सुधरी

सागरएक महीने पहले
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रेस्क्यू के लिए एसडीईआरएफ के कार्यालय में रखे राहत एवं बचाव उपकरण। दूसरे चित्र में खराब हुई रबर बोट। - Dainik Bhaskar
रेस्क्यू के लिए एसडीईआरएफ के कार्यालय में रखे राहत एवं बचाव उपकरण। दूसरे चित्र में खराब हुई रबर बोट।
  • बाढ़ की सूचना के बाद भी कंट्रोल रूम से गाड़ी आने का करना पड़ता है इंतजार, इसके बाद लोड करते हैं राहत सामग्री

जिले में बारिश ने दस्तक दे दी है। कई निचले क्षेत्र या नदी से सटे इलाके ऐसे हैं जहां बाढ़ के हालात बनते हैं, लेकिन बाढ़ से निपटने के लिए संसाधनों के हिसाब से प्रशासन की तैयारी अभी पर्याप्त नहीं है। स्टेट डिजास्टर इमरजेंसी रिस्पांस फोर्स (एसडीईआरएफ) के पास स्वयं का कोई वाहन नहीं है। बाढ़ की सूचना मिलने के बाद भी टीम को पुलिस कंट्रोल रूम से गाड़ी आने का इंतजार करना पड़ता है। फिर उसमें राहत सामग्री लोड करते हैं। इसके बाद टीम रेस्क्यू के लिए मौके पर रवाना हो पाती है। इस प्रक्रिया में करीब डेढ़ से दो घंटे का समय बर्बाद हो जाता है।

इसके साथ ही एसडीईआरएफ टीम के पास राहत एवं बचाव उपकरणों के मेंटनेंस के लिए अलग से कोई बजट नहीं है। एक सप्ताह पहले रहली के पास सुनार नदी में आई बाढ़ में एसडीईआरएफ टीम ने रेस्क्यू करते हुए चार मासूम बच्चों की जान बचाई थी। इस रेस्क्यू में टीम की एक रबर बोट खराब हो गई। जिसका मेंटनेंस बजट की कमी के चलते अब तक नहीं हो पाया है। अब यदि ऐसे में किसी और क्षेत्र से बाढ़ की सूचना आ जाए और टीम को मौके पर जाना पड़े तो टीम की एक रबर बोट खराब पड़ी है।

क्यूआरटी व डीआरसी टीम का किया गठन

क्यूआरटी- इस टीम का गठन जिला स्तर पर किया गया है। यह दो शिफ्ट में काम करती है। इसमें 6-6 जवान होते हैं। जो 12-12 घंटे ड्यूटी करते हैं। ये अच्छे तैराक होते हैं। इस टीम में 40 से अधिक उम्र के जवान शामिल नहीं किए जाते। बाढ़ में रेस्क्यू कर लोगों को बचाने का काम इन्हीं जवानों का रहता है। जिले में किसी भी स्थान पर बाढ़ की सूचना मिलती है तो मुख्यालय से यही टीम भेजी जाती है। डीआरसी - तहसील और ब्लॉक स्तर पर यह टीम काम करती है। एसडीएम या थाना स्तर पर यह टीम गठित की जाती है। यह टीम भी दो शिफ्ट में ड्यूटी करती है। इसमें 4-4 जवान होते हैं। इनका काम बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में निगरानी करना व मुख्यालय तक समय पर सूचना देने का रहता है। जिला स्तर से क्यूआरटी टीम के पहुंचने पर डीआरसी टीम के जवान रेस्क्यू में उनकी मदद करते हैं।

20 लाख का बजट आवंटित हो गया है
करीब 20 लाख का बजट आवंटित हुआ है। इससे राहत एवं बचाव सामग्री खरीदी जाना है। रबर बोट का मेंटनेंस भी जल्द करा लिया जाएगा। ये सही है कि टीम के पास कोई वाहन नहीं है। इससे सूचना मिलने के बाद पुलिस कंट्रोल रूम से वाहन बुलवाना पड़ता है। यदि वाहन रहता है तो उसमें पहले से ही राहत सामग्री लोड करके रख सकते हैं और सूचना मिलने पर तुरंत मौके पर टीम भेजकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर सकते हैं।- विनीत तिवारी, प्लाटून कमांडर, एसडीईआरएफ

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