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जन्माष्टमी के लिए स्टील के झूले पर सजे कान्हा:सागर में श्रीकृष्ण की पोशाक और पगड़ी की बढ़ी डिमांड, जन्माष्टमी पर 65 साल पुरानी है मटकी फोड़ प्रतियोगिता की परंपरा

सागर3 महीने पहले

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर सागर में बाजार सज चुका है। इस साल बाजार में लड्‌डू गोपाल के श्रृंगार के लिए खास किस्म की पोशाक, पगड़ी, मुरली और झूले आए हैं। दुकानदार कस्टमर्स के लिए कंपलीट पैकेज उपलब्ध करा रहे हैं। बाजार में कान्हा की आकर्षक पोशाक और झूले मिल रहे हैं। पोशाकों की कीमत 20 रुपए से शुरू होकर 1500 से अधिक तक है। वहीं झूले की कीमत 100 रुपए से शुरू है। इसके अलावा स्टील के झूले के साथ सजी कान्हा की प्रतिमा भी कस्टमर्स को उपलब्ध कराई जा रही है।

जन्माष्टमी को लेकर ग्राहकों ने खरीदी शुरू कर दी है। लड्‌डू गोपाल के जन्मोत्सव को मनाने के लिए मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं मटकी फोड़ प्रतियोगिता की रूपरेखा बनाई जा रही है। सागर में मटकी फोड़ की परंपरा वर्षों पुरानी है। ग्वारी मोहल्ला में 65 सालों से अधिक पुरानी मटकी फोड़ प्रतियोगिता होती है।
रंग-बिरंगी पगड़ी और मुकुट की बिक्री
कटरा बाजार में दुकानों में इस बार श्रीकृष्ण के लिए पगड़ी के कई रंग में मौजूद हैं। पहले जहां पीला और नारंगी आता था। वहीं इस बार हरा, नीला, आसमानी और बैंगनी रंग की भी पगड़ी मार्केट में आई हैं। बाजार में इस बार मुकुट की तुलना में पगड़ी की ज्यादा डिमांड है। भगवान के लिए फूल वाला सिंहासन खरीद रहे हैं।

दुकानों पर सजी भगवान की पोशाक, झूले और पगड़ी।
दुकानों पर सजी भगवान की पोशाक, झूले और पगड़ी।

मोरपंख और नग जड़ी पोशक बनीं पहली पसंद
इस बार जन्माष्टमी के लिए लड्‌डू गोपाल को विशेष पोशाक तैयार की गई है। दुकानदार दीपक ने बताया कि जन्माष्टमी पर्व के चलते भगवान की पोशाक की बिक्री शुरू हो गई है। इस बार मोरपंख लगी और नग जड़ी हुई विशेष पोशाक बनाई गई हैं, जो ग्राहकों को पसंद आ रही हैं। वहीं मुकुट और पगड़ी भी नग लगाकर बनाई गई हैं।
वृंदावन से आई पोशाक पहनेंगे भगवान कृष्ण
सागर में 19 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा। जिसको लेकर श्रीदेव बिहारी मंदिर, बांके राघव जी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, गोपाल मंदिर, वृंदावन बाग मंदिर समेत अन्य मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। लक्ष्मीनारायण मंदिर में भगवान के लिए जन्माष्टमी पर पहनाने के लिए वृंदावन से पोशाक और मोर पंख जड़ित मुकुट मंगाया गया है।

ग्वारी मोहल्ला में वर्ष 2004 में हुई मटकी फोड़ प्रतियोगिता की तस्वीर।
ग्वारी मोहल्ला में वर्ष 2004 में हुई मटकी फोड़ प्रतियोगिता की तस्वीर।

मटकी फोड़ने पर इनाम में मिलते थे खिलौने
सागर में जन्माष्टमी त्योहार पर मटकी फोड़ की परंपरा वर्षों पुरानी है। बताया जाता है कि ग्वारी मोहल्ला से मटकी फोड़ प्रतियोगिता शुरू हुई थी। यहां पिछले 65 वर्षों से अधिक समय से मटकी फोड़ी जा रही है। श्रीकृष्ण यादव विकास समिति के संस्थापक व अध्यक्ष गोपीलाल यादव बताते हैं कि ग्वारी मोहल्ले में बचपन से ही मटकी फोड़ प्रतियोगिता देखते आ रहे हैं। तिराहे पर बने मंदिर के पास पेड़ों से मटकी बांधी जाती है। यहां पहले मटकी प्रतियोगिता में मटकी के साथ इनाम के रूप में खिलौने बांधे जाते थे, जो भी मटकी फोड़ता था वह यह खिलौने ले जाता था। सन 1992 में पहली बार मटकी फोड़ प्रतियोगिता में 51 रुपए का नकद इनाम रखा गया था। मटकी फोड़ के साथ ही झांकी भी सजाई जाती है। वर्तमान में यादव समाज के युवा मटकी फोड़ प्रतियोगिता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।