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राहतगढ़ में हादसा:बीना नदी में तीन दाेस्त एक-दूसरे काे बचाने में डूबे, दो घंटे देर से पहुंची रेस्क्यू टीम, गांव वालों ने निकाले शव

सागर2 महीने पहले
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बीना नदी से बच्चों के शव निकालती रेस्क्यू टीम। - Dainik Bhaskar
बीना नदी से बच्चों के शव निकालती रेस्क्यू टीम।
  • महालक्ष्मी व्रत पर स्नान करने गईं गांव की महिलाओं ने डूबते देख लोगों काे सूचना दी
  • नदी का तेज बहाव होने से तैर नहीं सके और डूब गए, झिला के थे सभी

राहतगढ़ के पास झिला गांव से निकली बीना नदी में नहाने गए 3 दाेस्त डूब गए। घटना मंगलवार सुबह की है। स्थानीय गाेताखाेराें की मदद से पुलिस ने रेस्क्यू कर एक-एक कर तीनाें के शव निकाले। प्रत्यक्षदर्शियाें के अनुसार तीनाें किशाेर एक-दूसरे काे बचाने के प्रयास में गहरे पानी में चले गए और फिर डूब गए। महालक्ष्मी व्रत पर नदी में स्नान करने गईं गांव की महिलाओं ने इन्हें डूबते देख गांव वालाें काे खबर दी। सागर से एसडीआरएफ की टीम काे माैके पर पहुंचने में खासी देर हाे गई। घटना से गांव में शाेक की लहर छा गई।

जानकारी के अनुसार सतीश पुत्र हेमराज कुशवाहा (15), रामकुमार पुत्र माखन कुशवाहा (16), सौरभ पुत्र बबलू कुशवाहा (17) तीनाें निवासी ग्राम झिला मंगलवार की सुबह गांव के पास से निकली बीना नदी पर नहाने के लिए गए थे। इसी दौरान तीनों नदी के तेज बहाव में गहरे पानी में चले गए।

एक-एक करके तीनाें नदी में डूब गए। किशोरों के नदी में डूबने की खबर मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों की नदी किनारे भीड़ जमा हाे गई। पुलिस पहुंची और रेस्क्यू शुरू कराया। सागर से पहुंची एसडीआरएफ की टीम ने नदी में रेस्क्यू करते हुए रामकुमार और सौरभ का शव पानी से बाहर निकाल लिया है। शाम काे सतीश का शव भी मिल गया।

मामा के यहां रहता था साैरभ, तैरना नहीं जानता था

गांव के चंदन कुशवाहा ने बताया कि साैरभ अपने मामा बिंदे के यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह 10 वीं कक्षा में था। वह तैरना नहीं जानता था। सौरभ दो भाइयाें में बड़ा था। पैर फिसला ताे गहरी खाई में समा गए तीनाें मृतक रामकुमार के चचेरे भाई महेश ने बताया कि महालक्ष्मी व्रत करने वाली महिलाएं नदी में स्नान करने गईं थी।

तीनाें काे एक-एक करके नदी में डूबते हुए इन महिलाओं ने भी देखा है। नदी की तलहटी में पत्थर पर जमा काई के कारण पैर फिसलने और एक दूसरे काे बचाने के प्रयास में तीनाें गहरी खाई में चले गए। मृतक आपस में रिश्तेदार हैं। मृतक सतीश का एक भाई व एक बहन है। वहीं रामकुमार 3 भाई व 4 बहनें हैं। वह भाइयाें में दूसरे नंबर का था।

परिजन बाेले- घर छाेड़कर आए थे, न जाने कब नदी पहुंच गए

मृतकाें के परिजन का राे राेकर बुरा हाल है। परिजन का कहना था कि वे बच्चों को घर छोड़कर आए थे। पता नहीं किसके साथ नदी पर आ गए। मृतक मजदूर परिवार से हैं। तीनाें दाेस्त 10 वीं कक्षा में थे। मौके पर पहुंचे राहतगढ़ तहसीलदार ने तीनों मृतकों के परिवार वालों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि दिलाने की बात कही।

स्थानीय गाेताखाेराें ने 800 मीटर के दायरे में 2 घंटे तलाशकर निकाले शव

सागर से एसडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया गया, लेकिन घटनास्थल दूर होने के कारण टीम को पहुंचने में काफी समय लग गया। ऐसे में पुलिस ने थाने में रखे रेस्क्यू उपकरण और स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में रेस्क्यू शुरू कराया।

नदी के तेज बहाव के बीच किशोरों की तलाश शुरू की गई। इस दौरान करीब 800 मीटर के दायरे में करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद तीनों शवों को निकले गए। राहतगढ़ थाना प्रभारी आनंद राज ने कहा कि स्थानीय गोताखोरों को 2100 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

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