• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Sagar
  • Two Months Of Rain Water Is Flowing Every Year, Only If The Height Of The Dam Increases, The City Will Get Water For 24 Hours 7 Days

इधर भी ध्यान दे सरकार:दो महीने की बारिश का पानी हर साल बह रहा, बांध की ऊंचाई बढ़े तो ही शहर को 24 घंटे 7 दिन मिलेगा पानी

सागर4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
राजघाट बांध से बहता पानी। - Dainik Bhaskar
राजघाट बांध से बहता पानी।
  • एडीबी प्रोजेक्ट पर खर्च किए जा रहे 400 करोड़ लेकिन राजघाट का दायरा बढ़ाने के लिए बजट की कमी
  • राजघाट बांध का पूरा उपयोग नहीं कर रहे हम

शहर में 24 घंटे 7 दिन पानी देने की प्लानिंग के तहत 400 करोड़ का एडीबी प्रोजेक्ट चल रहा है। शहर समेत मकरोनिया और छावनी को पानी देने की योजना है। इसके लिए राजघाट बांध पर क्लेयीफायर, पंप हाउस, पानी की टंकियां, रिजर्व वाटर समेत लाइन बिछाई जैसे कई काम किए जा रहे हैं, लेकिन बांध की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर कोई भी प्रावधान नहीं किया गया। ऐसे में मई-जून की गर्मी राजघाट में जब पानी कम बचता है तो शहर के अधिकांश हिस्सों में सप्लाई प्रभावित हो जाती है।

प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद अगर बांध में पानी ही नहीं बचेगा तो 24 घंट 7 दिन सप्लाई हो पाना संभव ही नहीं है। बेबस नदी पर बने राजघाट परियोजना के (सेकंड फेज) में बांध की हाइट को 2 मीटर बढ़ने का काम वर्ष 2011 में ही हो जाना था। बजट के अभाव में यह काम नहीं हो पाया। साल 2019 में इस काम को कमलनाथ सरकार ने आगे बढ़ाया। 100 करोड़ के स्वीकृति की घोषणा हुई और 137 करोड़ की डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए शासन को भेजी गई, लेकिन बांध सत्ता की उथल-पुथल में उलझ गया। इस मामले को अभी भी कार्रवाई थमी हुई है। जबकि शहर में जो प्रोजेक्ट अभी चल रहा है। ऊंचाई को बढ़ाने को लेकर कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है।

प्रति व्यक्ति पानी की औसत खपत भी बढ़ी
बांध से पिछले कई सालों से जो पानी दिया जा रहा है। वह प्रति व्यक्ति 140 लीटर औसत खपत के आधार पर तय किया गया है। 30% जनसंख्या के आधार पर देखा जाए, तो प्रति व्यक्ति की औसत खपत इन सालों में 200 लीटर (प्रतिदिन) से ज्यादा पहुंच गई है। जबकि बांध का अधिकांश पानी लीकेज से ही बह जाता है।

हर दो साल में 7 प्रतिशत बढ़ रही शहर की आबादी
राजघाट का निर्माण वर्ष 2003 में शुरू हुआ था। लेकिन सप्लाई 2005 से शुरू हो पाई। उस समय से लेकर अब तक शहर की औसतन जनसंख्या करीब 30% तक बढ़ गई है। यानी 7% की दर से हर दो साल में जनसंख्या में इजाफा हुआ है। लेकिन राजघाट जैसा था वैसा ही है। अलग-अलग महापौर ने राजघाट के लिए प्रस्ताव तो बनाए लेकिन उन पर अमल नहीं हो पाया है। हालात यह है कि पुराने समय में गर्मियों के दिनों में लबालब रहने वाला राजघाट अप्रैल महीने से ही दम तोड़ देता है।

अभी 1700 हेक्टेयर को कवर करता है राजघाट
बांध का कैचमेंट एरिया करीब 1700 हेक्टेयर को कवर करता है। यानी बारिश के सीजन में जून से अगस्त के बीच ही बांध का जल स्तर 515.0 मीटर के ओवर फ्लो पर पहुंच जाता है। हाल में भी राजघाट बांध 1 अगस्त को ओवर फ्लो हुए था। जबकि मानसून के सीजन 30 सितंबर तक रहता है। यानी 2 महीने में जैसीनगर ब्लॉक में जितनी भी बारिश होती है, उसका पानी ओवर फ्लो कैचमेंट एरिया से बह जाता है। अगर बांध की ऊंचाई 2 मीटर तक ही बढ़ाई जाती है तो आने वाले 20 सालों तक शहर में पानी की कोई भी कमी नहीं होगी।

खबरें और भी हैं...