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बीमार बीएमसी:दो लापरवाही : नया टैंक एक माह में भी इंस्टॉल नहीं किया, प्रमुख सचिव से झूठ बोला- ऑक्सीजन पर्याप्त है; नतीजा चार जानें गईं

सागर16 दिन पहले
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सांसें अटकीं... 3 घंटे तक तड़पती रही बुजुर्ग महिला, तकलीफ बढ़ी तो पलंग से गिर गई। - Dainik Bhaskar
सांसें अटकीं... 3 घंटे तक तड़पती रही बुजुर्ग महिला, तकलीफ बढ़ी तो पलंग से गिर गई।
  • ऑक्सीजन की कमी की खबर सुन घबराए कोरोना वार्ड में भर्ती मरीज
  • बीएमसी के पास 8 क्यूबिक मीटर के 150 सिलेंडर ही बचे, जो एक दिन में ही खत्म हो जाएंगे

बुधवार को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में हुई ऑक्सीजन की कमी और चार मरीजों की मौत के बाद कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों में हड़कंप मच गया। शहर के लोग भी सकते में आ गए। लोग बीएमसी प्रबंधन को ही इस घटना के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं। घटना की जानकारी लगते ही भर्ती मरीजों के परिजन की अस्पताल में भीड़ लग गई। देर रात तक परिजनों का आना-जाना लगा रहा।

जानकारी के मुताबिक एक दिन पहले नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. नितेश व्यास ने बीएमसी का निरीक्षण किया था। इस दौरान बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के अफसरों ने ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा और प्रबंधन होने की झूठी जानकारी दी थी। जबकि सच तो यह है कि प्रबंधन तीन दिन से ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली आईनॉक्स कंपनी से लिक्विड ऑक्सीजन की डिमांड कर रहा था। इतना ही नहीं पिछले साल सितंबर और अक्टूबर में ऑक्सीजन गैस के संकट को देखते हुए नए कैप्सूल प्लांट की नींव रखी थी।

13 हजार किलोलीटर का नया टैंक एक माह से परिसर में रखा है लेकिन अफसरों ने इसे इंस्टॉल करवाने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। नतीजा अब लिक्विड गैस खत्म होने के बाद छोटे सिलेंडरों से काम चला रहे हैं। बीएमसी के पास आज की स्थिति में 8 क्यूबिक मीटर के 150 सिलेंडर मौजूद हैं, जो सिर्फ एक दिन में ही खत्म हो जाएंगे। यानी गुरुवार को यदि लिक्विड गैस की सप्लाई नहीं हुई तो यह संकट और भी गहरा सकता है। नया टैंक समय पर इंस्टॉल कर दिया जाता तो शायद कोरोना मरीजों को यह परेशानी नहीं होती।

सांसें अटकीं... 3 घंटे तक तड़पती रही बुजुर्ग महिला, तकलीफ बढ़ी तो पलंग से गिर गई

सागर| कोरोना वार्ड भी भर्ती यह वृद्धा दो से तीन घंटे तक डॉक्टरों को बुलाती रही लेकिन कोई नहीं आया। वृद्धा का कहना था कि उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। महिला को ऑक्सीजन सिलेंडर लगा था। जब महिला की तकलीफ ज्यादा बढ़ गई तो वह पलंग से गिर पड़ी। बाद में डॉक्टर पहुंचे और महिला का पल्स रेट लिया।

एक मरीज को 24 घंटे में चाहिए 24 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन
बीएमसी में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट और कैप्सूल आकार का ऑक्सीजन टैंकर मौजूद है। यह टैंकर 13 हजार किलोलीटर का है। इसमें एक बार में 1430 जम्बो सिलेंडरों के बराबर ऑक्सीजन भरी जाती है। यानी 11,440 क्यूबिक मीटर गैस। आईसीयू में भर्ती कोरोना पॉजिटिव मरीज को एक मिनट के भीतर 17 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। एक घंटे में लगभग एक हजार लीटर यानी एक क्यूबिक मीटर। 24 घंटे में 24 क्यूबिक मीटर गैस दी जाती है। वर्तमान स्थिति में आईसीयू और आईसोलेशन को मिलाकर ऐसे यहां 50 मरीज भर्ती हैं।

यानी एक दिन में करीब 1200 क्यूबिक मीटर गैस की जरूरत तो सिर्फ इन्हीं में है। इसके अलावा एचडीयू में भर्ती मरीजों को भी एक मिनट में 7 लीटर ऑक्सीजन की जरुरत होती है। यानी एक दिन में 10 क्यूबिक मीटर। ऐसे यहां 15 से अधिक मरीज हैं। इसके अलावा बीएमसी के एसएनसीयू, पीआईसीयू, नॉन कोविड आईसीयू, ओटी और अन्य वार्डों को मिलाकर करीब 2000 क्यूबिक मीटर गैस प्रतिदिन खर्च हो रही है। जबकि पहले यह आंकड़ा 500 क्यूबिक मीटर गैस प्रतिदिन का था। इस तरह आज की स्थिति में 11440 क्यूबिक मीटर गैस का यह टैंक छह दिन के लिए भी पर्याप्त नहीं है।
200 सिलेंडर हैं, जिनकी मौत हुई उनकी हालत नाजुक थी
दो दिन पहले लिक्विड ऑक्सीजन खत्म हुई थी। इसके लिए हमने सप्लाई करने वाली कंपनी आईनॉक्स से बात की है। बुधवार देर रात तक सप्लाई हो जाएगी। अॉक्सीजन की कोई कमी नहीं है, हमारे पास 200 जम्बो सिलेंडर मौजूद हैं। जिनकी मौत हुई है उनकी स्थिति नाजुक थी, ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई।
- डॉ. आरएस वर्मा, डीन बीएमसी

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वहीं दूसरी तरफ ऑक्सीजन की कमी और 4 मौत होने की खबर लगते ही बीएमसी में परिजनों का जमावड़ा लग गया। इस दौरान कोविड वार्ड में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों से परिजनों की बहस हुई। इस दौरान वार्ड बॉय से मारपीट की गई, वहीं महिला चिकित्सक से अभद्रता करते हुए उनके कपड़े फाड़ दिए। जिसके बाद महिला चिकित्सक जान बचाकर भागीं और बीएमसी अधीक्षक डॉ. एसके पिप्पल व गोपालगंज थाना प्रभारी उपमा सिंह ने मौके पर पहुंच कर परिजनों का समझाइश दी और ऑक्सीजन की कमी पूरी होने की बात बताई। हालांकि मारपीट और अभद्रता के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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