पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Sagar
  • What If It Is Not Dadagiri? 20 Thousand A Day Was Recovered From The Patient, Oxygen Cylinder Was Also Snatched Away

अवैध वसूली पर उतरे निजी अस्पताल:ये दादागिरी नहीं तो क्या है? मरीज से एक दिन का 20 हजार वसूला, ऑक्सीजन सिलेंडर भी छीना

सागरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
मरीज के परिजनों से 90 हजार जमा कराने के बाद सादे कागज पर दी गई रसीद, पक्का बिल नहीं दिया जा रहा। - Dainik Bhaskar
मरीज के परिजनों से 90 हजार जमा कराने के बाद सादे कागज पर दी गई रसीद, पक्का बिल नहीं दिया जा रहा।
  • चिरंजीवी अस्पताल में अमानवीयता, प्रशासन मौन

निजी अस्पताल अब अवैध वसूली व दादागिरी पर उतर आए हैं। राहतगढ़ बस स्टैंड स्थित चिरंजीवी हॉस्पिटल में कोविड मरीजों से एक दिन का चार्ज 20 हजार रुपए वसूला जा रहा है। मरीज के आते ही परिजनों से रुपए एडवांस जमा करा लिए जाते हैं। इसके बाद ही इलाज शुरू होता है। मरीज जितने दिन तक अस्पताल में भर्ती रहता है।

उतने दिन तक हर रोज 20 हजार रुपए परिजनों से अस्पताल में जमा कराए जाते हैं और इन रुपयों के बिल भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा परिजनों को नहीं दिए जाते। इससे उन्हें मालूम ही नहीं रहता कि अस्पताल प्रबंधन ने किस इलाज व किस जांच के कितने रुपए चार्ज किए हैं। अस्पताल संचालक मनोज चतुर्वेदी से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फोन ही अटेंड नहीं किया।

केस-1; वेंटिलेटर लगाया नहीं, डॉक्टर ने विजिट की नहीं और चार्ज 20 हजार प्रतिदिन

अर्जुन सिंह गौड़ ने बताया कि 24 अप्रैल को मेरी मां की तबियत अचानक बिगड़ गई। शहर के अस्पतालों मेें बेड नहीं मिला। इसी दौरान बड़े भाई भी बीमार हो गए। दोनों को 24 अप्रैल की शाम चिंरजीवी हॉस्पिटल में एडमिट कराया और अस्पताल में तुरंत 20 हजार रुपए एडवांस जमा कर दिए। बड़ा भाई एक दिन और मां दो दिन इस तरह कुल तीन दिन पेशेंट अस्पताल में भर्ती रहे। मां ऑक्सीजन सपोर्ट पर थी, लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं मिली। तो परिजन ही कही से एक सिलेंडर का इंतजाम करके लाए। 26 की दोपहर में छुट्टी कराकर जिला अस्पताल ले गए, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर चिंरजीवी में ही छूट गया।

अर्जुन ने बताया कि जब वापस बिल व सिलेंडर लेने पहुंचे तो अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि 40 हजार रुपए और जमा करो, तभी सिलेंडर वापस मिलेगा। जबकि 20 रुपए एडवांस दे चुके थे। इस तरह तीन दिन के 60 हजार रुपए मांगे जा रहे हैं और बिल दिया नहीं जा रहा। अर्जुन का कहना है कि अस्पताल ने वेटिंलेटर लगाया नहीं, डॉक्टर ने एक दिन भी विजिट नहीं किया। पेशेंट को वार्ड बॉय व नर्स के हवाले कर दिया। कोई चार्ज शो नहीं कर रहे और अब दूसरे का सिलेंडर भी वापस नहीं दे रहे हैं। अर्जुन ने बताया कि उनके माता-पिता व बड़े भाई जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं और घर पर सिर्फ बच्चे हैं। इधर चिरंजीवी अस्पताल प्रबंधन बिल जमा करने दवाब बना रहा है।

केस-2; 5 दिन में 90 हजार रुपए कराए जमा, डिस्चार्ज होने के 10 दिन बाद भी नहीं दिया बिल

लकी पटेल ने बताया कि मेरी मां की तबियत बिगड़ने पर उन्हें भी 22 अप्रैल की रात 10 बजे चिरंजीवी हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। अस्पताल वालों ने 20 हजार रुपए एडवांस जमा करा लिये। दूसरे दिन दोपहर तीन बजे 3650 रुपए जांच के जमा कराए। इसके बाद 25 अप्रैल तक लगातार चार दिन 20-20 हजार रुपए जमा कराते रहे। इस तरह कुल 80 हजार रुपए जमा करा लिए गए।

मां के ठीक होने पर 27 अप्रैल की सुबह 10 बजे अस्पताल से छुट्टी हो गई। तब फिर अस्पताल प्रबंधन ने 10 हजार रुपए जमा करा लिये। इस तरह 5 दिन में 90 हजार रुपए ले लिए। डिस्चार्ज के समय जब बिल मांगे। तो अस्पताल प्रबंधन ने बिल नहीं दिए। उनका कहना था कि स्टेशनरी छपी नहीं है। बिल बाद में ले लेना। लकी की मां को डिस्चार्ज हुए 10 दिन हो गए हैं, लेकिन 90 हजार रुपए के बिल अभी तक अस्पताल प्रबंधन ने नहीं दिए।

कमिश्नर के निर्देश के बाद भी 2 दिन में नहीं कर पाए जांच, निजी अस्पतालों में नहीं पहुंची टीम

निजी अस्पतालों में चल रही लूट व पेशेंट से एडवांस वसूली को लेकर भास्कर की खबर के बाद कमिश्नर मुकेश शुक्ला ने सीएमएचओ को निजी अस्पतालों का निरीक्षण कर जांच करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सीएमएचओ डॉ. सुरेश बौद्ध पिछले दो दिन में निजी अस्पतालों की जांच करने ही नहीं पहुंचे। गुरुवार को सीएमएचओ ने स्वयं कहा था कि वे पांच सदस्यीय टीम के साथ शुक्रवार को शहर के निजी अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे, लेकिन अब उनका कहना है कि दूसरे कार्य आ जाने के कारण वे शुक्रवार को नहीं जा पाए और शनिवार दोपहर 12 बजे का शेड्यूल निरीक्षण के लिए तय किया है।

अस्पतालों में प्रदूषण की जांच करने पहुंचे पीसीबी के अधिकारी

शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी बीएस राय व चीफ केमिस्ट आरके जैन ने शहर के कोविड अस्पतालों बीएमसी, भाग्योदय, राय, सागरश्री का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पतालों में उत्पन्न होने वाले मेडिकल वेस्ट का जायजा लिया। पीपीई किट, मास्क व अन्य अपशिष्ट को सही तरीके से डिस्पोजल करने के निर्देश दिए। पीपीई किट का डिस्पोजल अधिकृत संस्था से ही कराने के निर्देश दिए।

यह गैर-कानूनी है, जांच करेंगे
यदि पेशेंट को बिल नहीं दिए जा रहे हैं और प्रतिदिन 20 हजार रुपए जमा कराए जा रहे हैं। तो यह पूरी तरह गैर-कानूनी है। यह मामले मेेरे संज्ञान में अभी आया है। मैं प्राथमिकता के साथ यह मामला दिखवाता हूं और सभी अस्पतालों का निरीक्षण करता हूं।
- डॉ. सुरेश बौद्ध, सीएमएचओ
मैं मामले को अभी दिखवाता हूं। संबंधित अधिकारी से बात करता हूं।
- मुकेश शुक्ला, कमिश्नर

खबरें और भी हैं...