पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अंतरिम राहत:हाईकोर्ट ने कहा- पपौरा जी ट्रस्ट में गड़बड़ी की जांच जारी रहेगी, पदाधिकारियों को नहीं मिल सकती राहत

टीकमगढ़17 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

अतिशय क्षेत्र पपौरा ट्रस्ट के पदाधिकारियों को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। हाल ही में जबलपुर हाईकोर्ट ने पदाधिकारियों को अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है। साथ ही पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई पर भी रोक लगाने से इंकार कर दिया गया है। इसके अलावा न्यायालय द्वारा पारित विस्तृत अंतरिम आदेश में याचिका कर्ताओं ने ट्रस्ट को भंग करने के एसडीएम टीकमगढ़ एवं कलेक्टर ने जो निर्देश पारित किए थे, उनके क्रियान्वयन पर भी रोक लगाने से इंकार कर दिया गया।

गौरतलब है कि डिप्टी कलेक्टर टीकमगढ़ द्वारा ट्रस्ट को चलाने वाली सार्वजनिक न्यास को भंग कर वहां प्रशासक को नियुक्त करने की अनुशंसा कलेक्टर को की थी। साथ ही सभी पदाधिकारियों के खिलाफ आर्थिक एवं अन्य अनियमित्ताओं के चलते धोखाधड़ी, जालसाजी, अमानत में खयानत, न्यास भंग करने एवं अन्य गंभीर आरोपों पर आपराधिक कार्रवाई करने की भी अनुशंसा की थी। जिसके खिलाफ न्यास पदाधिकारियों ने उच्च-न्यायालय में डिप्टी कलेक्टर द्वारा पारित आदेश पर रोक लगाने की अर्जी लगाई थी। इस मामले में गुरुवार 1 जुलाई को लगभग डेढ़ घंटा सुनवाई हुई। एकल पीठ द्वारा पूर्व में कई तिथियों पर प्रकरण की अंतरिम राहत पर सुनवाई जून के अंतिम सप्ताह में की गई। शिकायतकर्ता सकल दिगम्बर जैन महिला मंडल टीकमगढ़ की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने आपत्ति ली एवं अंतरिम राहत का विरोध किया।

एसपी, कलेक्टर और एसडीएम से मांगा जवाब
सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रकरण में जो भी आदेश अनुविभागीय अधिकारी एवं कलेक्टर टीकमगढ़ द्वारा पारित किए हैं, वे पहले उनके क्षेत्र अधिकार एवं कार्यप्रणाली के अंतर्गत आते हैं। उस पर जब तक शासन का जवाब नहीं आ जाता तब तक हस्तक्षेप करना अनुचित होगा। जिसके चलते हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजय द्विवेदी की एकल पीठ ने ट्रस्ट पदाधिकारियों ने अंतरिम राहत देने से इंकार किया। साथ ही टीकमगढ़ कलेक्टर, एसपी और एसडीएम टीकमगढ़ से चार सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है।

यह है मामला
पपौरा ट्रस्ट अंतर्गत लगभग 35 जैन मंदिर, स्कूल, गौशालाएं, धर्मशालाएं एवं इस तरह से लगभग 2 से 3 अरब रुपयों की चल एवं अचल सम्पत्तियां हैं। आचार्य विद्यासागर का इस तीर्थ में कई बार प्रवास हो चुका है। यह तीर्थ 30 हजार से ज्यादा जैन धर्म के परिवारों की आस्था का केंद्र है। सकल दिगम्बर जैन महिला मंडल द्वारा पिछले साल कलेक्टर को शिकायत करते हुए कहा गया कि ट्रस्ट में करोड़ों रुपए की हेरा फेरी, गड़बड़ियां एवं घोटाले हो रहे हैं। नकद राशियों के लेनदेन का कोई हिसाब-किताब नहीं है, स्कूलों एवं प्रतिभास्थली के संबंध में 25 करोड़ रुपए का दान जैन समाज के लोगों द्वारा दिया गया था। वह भी खुर्द-बुर्द कर दिया गया।

समाज में विरोध के सुर

इन दिनों पपौरा ट्रस्ट को लेकर समाज के लोगों में विरोधाभास देखने को मिल रहा है। स्थानीय निवासी हरीशचंद्र जैन ने बताया कि पपौरा मंदिर के इतिहास में आज तक ऐसा नहीं हुआ, कि मंदिर के ताले तोड़कर पुलिस अंदर घुसी हो, लेकिन ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष अनिल बड़कुल सहित अन्य लोग ट्रस्ट को हथियाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। जैन ने कहा कि इस समय जो विरोध महिलाएं कर रही हैं। उनमें अधिकांश हारे हुए प्रत्याशियों के घरों की महिलाएं हैं। वहीं पुष्पेंद्र जैन का कहना है कि ट्रस्ट का विरोधी पक्ष रोजाना पदाधिकारियों के परिजन को फोन लगाकर पद से इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के ही कुछ लोग इस्तीफा देने के बाद मामले को रफा-दफा करने की बात कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि विरोधी ट्रस्ट को हथियाने के लिए कई हथकंडे अपना रहे हैं। महिला मंडल की अध्यक्ष वंदना जैन का कहना है कि मंदिर में हुई पुलिस की कार्रवाई कानूनन सही है। अगर पुलिस को समय पर पदाधिकारी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाते, तो यह स्थिति नहीं बनती।

खबरें और भी हैं...