सुझाव / झांसी पहुंचा टिड्डी दल, कृषि विभाग ने बचाव के लिए किसानों को बताए तरीके

Locust team reached Jhansi, Agriculture Department told farmers ways for rescue
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Locust team reached Jhansi, Agriculture Department told farmers ways for rescue

  • 100-150 किमी प्रति घंटा की गति से उड़ता है टिड्‌डी दल, फसल को नुकसान पहुंचाता है

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

टीकमगढ़. प्रदेश के कई भागों में टिड्डी दल का प्रकोप बढ़ गया है। टिड्डी दल वर्तमान में ग्वालियर संभाग और झांसी तक पहुंच गया है, ये हवा की गति अनुसार लगभग 100-150 किमी प्रति घंटा की गति से उड़ रहा है। यह टीकमगढ़-निवाड़ी जिले में कभी भी पहुंच सकती हैं। इसके बचाव के लिए कृषि विभाग ने किसानों को फसलें बचाने की विधियों बताई है। 
उप संचालक कृषि एसके श्रीवास्तव ने बताया कि टिड्डा-टिड्डी दल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला कीट है जो समूह में एक साथ चलता है और बहुत लंबी-लंबी दूरियों तक उड़ान भरता है। यह फसल को चबाकर, काटकर खाने से नुकसान पहुंचाता है। यह उद्यानिकी फसलों, वृक्षों एवं कृषि की फसलों को बहुत बड़े रूप में एक साथ हानि पहुंचा सकता है। उन्होंने सभी किसान को निगरानी रखने और टिड्डी दल का प्रकोप होने पर विधियों को अपनाकर फसलों का बचाव करने की नीति बताई है।

किसान शोर गुल करके भगा सकते हैं
जिसमें किसान टोली बनाकर विभिन्न तरह के परम्परागत उपाय जैसे शोर मचाकर तथा ध्वनि वाले यंत्रों को बजाकर इन्हें डराकर भगाया जा सकता है। इसके लिए मांदल, ढोलक, ट्रैक्टर-मोटर साइकिल का सायलेंसर, खाली टीन के डिब्बे, थाली इत्यादि से भी सामूहिक प्रयास से ध्वनि की जा सकती है। ऐसा करने से टिड्डी नीचे नहीं आकर फसलों पर न बैठकर आगे प्रस्थान कर जाते हैं। कीटनाशी दवा का भी कर सकते है उपयोग: रासायनिक नियंत्रण में सुबह से कीटनाशी दवा ट्रैक्टर चलित स्प्रे पंप, पावर स्प्रेयर द्वारा जैसे क्लोरपॉयरीफॉस 20 ईसी 1200 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 ईसी 600 मिली अथवा लेम्डाईलोथिन 5 ईसी 400 मिली, डाईफ्लूबिनज्यूरॉन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हे. 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते है।

झांसी पहुंचा टिड्‌डी दल, कभी भी आ सकता है टीकमगढ
उप संचालक श्रीवास्तव ने बताया कि टिड्डी दल वर्तमान में ग्वालियर संभाग तक पहुंच गया है, जो हवा की गति अनुसार लगभग 100-150 किमी प्रति घंटा की गति से उड़ती है। कृषि विभाग ने किसान से  सतत निगरानी रखने के लिए बात कही। टिड्डी दल का प्रकोप होने पर बताई गई विधियों को अपनाकर फसलों का बचाव कर सकते है।

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