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वन विभाग का मामला:कागजों में दर्शाया मिनौरा गांव में 12.7 हेक्टेयर में पौधरोपण, लेकिन कहां किया ये पता नहीं

टीकमगढ़16 दिन पहले
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टीकमगढ़| कुंडेश्वर वीट के मिनौरा गांव में पौधरोपण के लिए वाउचर पर काम दिखाया गया। इसमें सभी बिल समान राशि के दर्शाए गए। हकीकत में पता ही नहीं कहां हुआ फेंसिंग क्षेत्र तैयार। - Dainik Bhaskar
टीकमगढ़| कुंडेश्वर वीट के मिनौरा गांव में पौधरोपण के लिए वाउचर पर काम दिखाया गया। इसमें सभी बिल समान राशि के दर्शाए गए। हकीकत में पता ही नहीं कहां हुआ फेंसिंग क्षेत्र तैयार।

जिले में हरपुरा नहर सिंचाई एवं नदी तालाब जोड़ों परियोजना में वन विभाग की करीब 12.5 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आई। इसके बाद शासन ने विधिवत वन विभाग को कुंडेश्वर की बीट मिनौरा गांव में राजस्व की करीब 12.760 हेक्टयेर भूमि दी। साथ ही इस भूमि पर फेंसिंग क्षेत्र तैयार करके पौधरोपण के लिए 1 करोड़ 19 लाख रुपए का बजट तय किया गया।

सूत्रों की मानें तो संबंधित जमीन पर 2016-17 में वन विभाग ने फर्जी तरीके से बिल वाउचरों पर फेंसिंग क्षेत्र तैयार करके पौधरोपण कागजों में दिखाया। इतना ही नहीं वन विभाग के अधिकारियों ने अपनी अनियमितताओं को छिपाने के लिए बाकायदा उस समय पुलिस में गांव के अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया, लेकिन आज दिनांक तक इस मामले में न तो पुलिस ने कोई बड़ी कार्रवाई की और न ही कार्रवाई करवाने के लिए वन विभाग ने आगे आकर पहल की। ऐसे में जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगना लाजमी है।

डिप्टी रेंजर संजय शर्मा के अनुसार जब उन्होंने टीकमगढ़ ज्वाइन किया तो उन्हें मिनौरा गांव से संबंधित कोई भी वस्तु और दस्तावेज चार्ज में नहीं मिले। वहीं 2016-17 के तात्कालीन व वर्तमान में बल्देवगढ़ वन परिक्षेत्र में पदस्थ डिप्टी रेंजर राजेश विक्रम सिंह का कहना है कि उस समय गांव के लोगों ने विवाद कर चक्काजाम कर दिया था। इसलिए पौधरोपण नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि यह मामला न्यायालय में लंबित है।

बिल वाउचर में दर्ज लोगों ने एक समान कार्य किया

आरटीआई एक्टिविस्ट ओमप्रकाश प्रजापति के अनुसार जिन बिल वाउचरों पर लोगाें के काम के बदले राशि का भुगतान दिखाया है। उनमें भी जबरदस्त तरीके से फर्जीवाड़ा किया गया है। उन्होंने बताया कि जगह के सीमांकन से लेकर, भूमि पर गड्ढे खोदने, फेंसिंग पोल खड़े करने और परिवहन करने के साथ पौधरोपण भी कुछ चिन्हित लोगों ने ही यह सभी काम किए। प्रजापति ने आरोप लगाया कि मामले में जो एफआईआर की बात है। वह भी अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को दबाने को की गई।

रेंजर बोले- मुझे नहीं पता कि कहां है मिनौरा

इस मामले में टीकमगढ़ वन परिक्षेत्र अधिकारी श्रीराम सूत्रकार का कहना है कि मुझे आए ज्यादा समय नहीं हुआ है। इसलिए मिनौरा गांव के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। सूत्रकार ने कहा कि 2016-17 में जब पौधरोपण किया गया, उस समय डिप्टी रेंजर कौन था यह देखना पड़ेगा, तो उन्हें बताया कि उस समय सब रेंज टीकमगढ़ में वनपाल राजेश विक्रम सिंह थे और कुंडेश्वर बीट उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में था। तब उन्होंने कहा कि राजेश विक्रम सिंह अगर वहां पदस्थ थे, तो कुछ भी संभव हो सकता है।

एसडीओ बोले- रोज की समस्या नहीं देख पा रहा, चार साल पुराना मामला कहां से देखूं

मिनौरा गांव में फेंसिंग क्षेत्र तैयार करके पौधरोपण के नाम पर किए गए भ्रष्टाचार के मामले में जब वन विभाग के उप वनमंडल अधिकारी जीएस मुबेल से बात की तो उन्होंने कहा मैं वन विभाग में रोज की समस्याएं नहीं निपटा पा रहा हूं, चार साल पहले पौधरोपण के नाम पर क्या हुआ कैसे बताऊं।

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