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किसानों में चिंता:प्रदेश की पहली नदी-तालाब जोड़ो परियोजना 9 साल में भी अधूरी, 11 में से 10 तालाब खाली

टीकमगढ़2 महीने पहले
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  • चंदेल कालीन तक पहुंचना था जामुनी नदी का पानी, सिर्फ मोहनगढ़ में पहुंचा

जिले के किसानों को रबी सीजन की सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध कराने का सपना दिखाने वाली सरकार की सबसे पूर्ण योजना 9 साल बाद भी धरातल पर साकार होती दिखाई नहीं दे रही है। स्थिति ऐसी है कि जिस योजना से 11 तालाबों को नया जीवन दिया जाना था, 9 साल में 10 तालाबों तक नहर का पानी नहीं पहुंच पाया। इस बार सिर्फ मोहनगढ़ के तालाब तक ही हरपुरा नहर से पानी पहुंचा है। क्षेत्र की पहली नदी-तालाब जाेड़ाे परियोजना पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी तालाबों तक इस बार भी पानी नहीं पहुंचने से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं।

सूत्रों का कहना है कि बुंदेलखंड पैकेज में हरपुरा सिंचाई और नदी-तालाब जोड़ो परियोजना का काम आज भी अधूरा दिखाई देता है। वहीं कई जगह तकनीकी खामियों की वजह से नहर के द्वारा तालाबों में पानी पहुंचना मुश्किल है। हरपुरा गांव में जामनी नदी पर बांध बनाया गया है। इसी के बाद से करीब 48 किमी लंबी नहर के माध्यम से 11 तालाबों तक पानी पहुंचाना था। वहीं नहर के दूसरे चरण में बम्होरी बराना और लिधौरा के तालाबों को इससे जोड़ने के लिए सर्वे भी कराया गया था। जिसके दूसरे चरण का सर्वे भी लगभग पूरा हो चुका है। वहीं जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री आरपी त्रिपाठी के अनुसार फिलहाल फेस-2 के काम काे ड्राप कर दिया गया है।

1980 हेक्टेयर में किसानों को मिलता अतिरिक्त पानी

विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि नहरों के निर्माण में शुरूआत में ही तकनीकी खामियों को नजरअंदाज किया गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि 9 साल बाद भी 11 तालाबों में से 10 तक पानी नहीं पहुंच पाया। अगर यह परियोजना सफल हो जाती तो क्षेत्र की 1980 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि की सिंचाई के लिए किसानों को पानी मिलता। वहीं करीब एक हजार साल पुराने ऐतिहासिक चंदेलकॉलीन तालाबों को लबालब कर नया जीवन मिलता। टीकमगढ़ जिले में औसत से कम बारिश का असर इस बार इन तालाबों पर साफ दिख रहा है। जिसे देखकर किसान भी चिंतित हैं। जिला धसान और जामनी नदी के बीच बसा है। सरकार की योजना के अनुसार जामनी नदी पर बने हरपुरा बांध से निकली नहर से तालाबों को भरकर 22.90 एमसीएम पानी का उपयोग करने 1980 हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई के लिए 41 करोड़ 33 लाख रुपए की कार्य-योजना तैयार हुई थी, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते आज भी यह योजना अधूरी है।

परियोजना से जिन तालाबों को नया जीवन मिलना था, उनमें हनुमान सागर, जगत नगर गांव के दो, पूर्वी गोर गांव के दो, दरगाय कला, दरगाय खुर्द, मोहनगढ़, कुम्हेड़ी, अर्चरा और वृषभानपुरा तालाब शामिल हैं। जामनी नदी में उपलब्ध बारहमासी जल-प्रवाह से इन सभी तालाबों में पूरे वर्ष पूर्ण जलाशय स्तर तक पानी उपलब्ध रहने का प्लान तैयार किया गया था, लेकिन इस योजना पर पानी फिर गया है। विभाग का कहना है कि कम बारिश की वजह से पानी नहीं पहुंचा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार दरगांय कला और दरगांय खर्दु के तालाब नहर से ऊंचे हैं। इसलिए इन तालाबों में पानी पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

कांग्रेस के कार्यकाल में निरस्त हुआ फेस-2 का काम

जतारा विधायक हरिशंकर खटीक ने बताया कि लगातार इस मामले को विधानसभा में उठा रहा हूं। उन्होंने बताया कि फेस-2 के काम को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जामुनी नदी में पानी की कमी को बताते हुए निरस्त कर दिया है। ऐसे में एक बार फिर से विधानसभा में जामुनी नदी के पानी की गणना रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट प्रस्तुत होते ही एक बार फिर से फेस-2 के काम को गति मिल सकेगी। साथ ही बम्होरी बराना के कैलाश सागर को भरा जा सकेगा। विधायक खटीक का कहना है कि इसके अलावा हरपुरा नहर योजना में जो भी कमियां हैं। उनमें सुधार कराने के लिए भी योजना बनाएंगे।

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