संघर्ष की शक्ति:लॉकडाउन में 400 किमी का पैदल सफर किया फिर गांव में सौंठ और बेरचून बनाकर किया रोजगार स्थापित

टीकमगढ़9 महीने पहलेलेखक: रवि ताम्रकार
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  • स्व-सहायता समूह बनाकर अन्य महिलाओं को भी अपने साथ रोजगार से जोड़ा

आठ लोगों के परिवार में बच्चे और हाथ में बंदोबस्त का सामान, लॉकडाउन में 400 किमी का सफर जब भी याद आता है, तो रूह कांप जाती है। यह स्थिति जब याद करते है, तो ऐसा लगता था कि बस अब हमारा आखिरी समय चल रहा है।

आखिरकार जब घर पहुंचे, तब जाकर राहत की सांस ली। यह शब्द अनीता अहिरवार के थे। आज वे अपने परिवार के साथ-साथ दो अन्य महिलाओं का भी परिवार चला रही हैं। लॉकडाउन में घर की परिस्थिति बिड़गने पर उन्होंने स्व-सहायता समूह के माध्यम से एक नया मुकाम हासिल किया। सागर रोड स्थित पठा भाटा गांव में रहने वाली अनीता अहिरवार इन दिनों बगाज माता तेजस्विनी स्व-सहायता समूह चला रही हैं।

उनके साथ गांव की लक्ष्मी अहिरवार और सोनिया अहिरवार भी जुड़ी हैं। तीनों मिलकर अपने घर में सौंठ और बेरचुन का प्रोडेक्ट तैयार करती हैं। घर बैठे तीनों महिलाएं प्रतिमाह की कमाई से परिवार का गुजर बसर कर रही हैं। यह रोजगार उन्होंने लॉकडाउन के दौरान जुलाई 2020 में शुरू किया था। यह दोनों प्रोडेक्ट लोगों को बहुत पसंद भी आ रहे हैं।

परिवार लॉकडाउन के पहले गया था दिल्ली
अनीता के ससुर रमेश बताते हैं कि यहां रोजगार नहीं मिलने पर पूरे परिवार को लेकर दिल्ली चले गए थे। वहां करीब पांच माह तक ठीक-ठाक रहा, लेकिन मार्च 2020 में जैसे ही लॉकडाउन लगा तो काम बंद हो गया। 8 से 10 दिन गुजारे। राशन भी खत्म होने लगा था। गृहस्थी का सामान और बच्चों को कंधे पर बैठाकर पैदल ही निकल पड़े।

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