सतना के शख्स ने घर को बना दिया म्यूजियम:डेढ़ एकड़ जमीन में उगाईं 150 से ज्यादा दुर्लभ जड़ी-बूटियां, प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में की तारीफ

सतनाएक वर्ष पहले

सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक के पिथौराबाद निवासी रामलोटन कुशवाहा ने अपने घर को म्यूजियम में तब्दील कर दिया है। उन्होंने अपने घर के सामने बने दूसरे घर में औषधीय और सब्जियों के पौधे लगा रखे हैं। इसके देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यही नहीं, उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन में 150 से ज्यादा दुर्लभ औषधीय पौधे उगाए हैं। इसके साथ-साथ वह देसी सब्जियों का भी उत्पादन करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह 9 बजे 'मन की बात' कार्यक्रम में भी उनके काम की तारीफ की है। 1 मिनट 10 सेकेंड के भाषण में मोदी ने रामलोटन की बगिया में 150 से अधिक दुर्लभ जड़ी-बूटियों के संरक्षण की प्रशंसा की।

पद्मश्री बाबूलाल दहिया के साथ रामलोटन।
पद्मश्री बाबूलाल दहिया के साथ रामलोटन।

देशवासियों को लेना चाहिए रामलोटनजी से सीख
प्रधानमंत्री ने कहा, सभी देशवासियों को रामलोटनजी से सीख लेकर ऐसे प्रयोग करना चाहिए। इससे आपकी आमदनी भी बढ़ेगी और स्वास्थ्य लाभ भी होगा। बता दें कि रामलोटन कुशवाहा, पद्मश्री बाबूलाल दहिया के मित्र हैं। उन्हीं के साथ जैव विविधता संरक्षण पर काम कर रहे हैं। रामलोटन के पास ऐसे बीजों का संरक्षण हैं, जो यदा-कदा ही देखने को मिलते हैं। इनके पास ऐसी कई अमूल्य जड़ी बूटियों और अनाजों का भंडार है।

मध्यप्रदेश के 40 जिलों का भ्रमण करने वाली टीम के साथ रामलोटन (बाएं)।
मध्यप्रदेश के 40 जिलों का भ्रमण करने वाली टीम के साथ रामलोटन (बाएं)।

मध्यप्रदेश के 40 जिलों का कर चुके हैं भ्रमण
बताया गया कि वर्ष 2016 में राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा पांच सदस्यीय दल को एमपी के 40 जिलों के भ्रमण पर भेजा गया था। उस टीम में पद्मश्री बाबूलाल दाहिया सतना, जगदीश सिंह यादव रीवा, शैलेष कुशवाहा ग्वालियर, अनिल करने जबलपुर और सतना से रामलोटन कुशवाहा भी साथ में गए थे। जहां भ्रमण के दौरान रामलोटन ने जड़ी बूटियों के संरक्षण की बारीकियां समझीं। इसके बाद में सभी प्रजा​तियों के बीज का संरक्षण करते हुए अपने कच्चे घर को म्यूजियम का रूप देकर रखने लगे।

जड़ी-बूटियों को दिखाते रामलोटन।
जड़ी-बूटियों को दिखाते रामलोटन।

ये है अमूल्य बूटियां
रामलोटन की ​बगिया में सैकड़ों दुर्लभ औषधीय पौधे हैं, जिनमें दहिमन, मेदा, कुम्ही, सादन, बीजा ओदार, भेड़ार, मैनहर, खूझा, बोथी, कसही, बरौता, राजमकोर की किस्में आदि हैं। इनकी आयुर्वेद में अधिक डिमांड रहती है। इनके अलावा बराही कंद, खनुआ, बैचंदी, तीखुर, काली और समेद मुसली, केवकंद जैसे बहुत सारे कंद एवं सफेद भटकैया, सफेद घुघची, काली घुघची आदि बहुत सारी जड़ी बूटियां और गुल्म लताएं मौजूद हैं।

जो कहीं न मिले, वह रामलोटन की बगिया में मिलेगा
रामलोटन के चाहने वाले पिथौराबाद के ग्रामीणों ने बताया कि जो कहीं न मिले, वह रामलोटन की बगिया में जरूर मिलेगा। उनके पास करीब 150 से ज्यादा दुर्लभ जड़ी बूटियां के पेड़-पौधे तैयार हैं। उनके कार्यों को देखते हुए राज्य जैव विविधा बोर्ड द्वारा लाखों रुपए की अनुदान राशि जारी की जा चुकी है। उनके ​बगिया की शोभा काली मूसली, सफेद पलाश और दहिमन बड़ा रही है।

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