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  • US Couple Adopts One And A Half Year Old Girl From Matrchaya Orphanage, Tears Of Happiness Spilled In Mother's Eyes

सतना की बेटी काे मिली सात समंदर पार की गोद:अमेरिका के दंपती ने मातृछाया अनाथालय से डेढ़ साल की बच्ची को गोद लिया, मां की आंखों में छलके खुशी के आंसू

सतना2 महीने पहले
बच्ची को दुलारते दंपती।

सतना के अनाथालय मातृछाया में पल रही बच्ची को सात समंदर पार रहने वाली मां के आंचल की छांव मिली है। यहां डेढ़ साल की बच्ची को अमेरिका के दंपती ने गोद लिया है। दंपती ने कानूनी प्रक्रिया भी पूरी कर दी है। अमेरिका दंपती बच्ची को गोद लेने के बाद उत्साहित दिखे। मां ने जैसे ही बच्ची को गोद लिया, वैसे ही उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक आए।

दरअसल, अलबामा से बुधवार को दंपती सतना पहुंचे। जानकारी के मुताबिक, दंपती में पति का नाम जॉन डेरिक मिलर है, जबकि पत्नी सारा जॉय मिलर है। दंपती अमेरिका में एकता राइट ग्रांट अलबामा के रहने वाले हैं। वह पेशे से आर्किटेक्ट हैं। दंपती के एक बेटा एक बेटी पहले से हैं। बेटी के हार्ट में प्रॉब्लम है, उसका इलाज चल रहा है। वर्षा के होंठ कटे हैं, जिसका इलाज करवाने की बात दंपती ने कही है। बच्ची को गोद लेने में बाद दंपति बहुत खुश है।

मां-बाप चले गए थे छोड़कर

दंपती ने ठान लिया, बच्ची गोद लेनी है। उसकी देखभाल करनी है। मातृछाया के अध्यक्ष प्रदीप सक्सेना ने बताया, वर्षा नाम की बच्ची की उम्र 18 माह है। बच्ची को 18 महीने पहले जिला अस्पताल से मातृछाया लाया गया था। बच्ची के होंठ कटे थे। शायद इसी कारण उसके माता-पिता ने उसे छो़ड़ दिया था। शासन की प्रक्रिया के तहत बच्ची को मातृछाया में रखा गया।

अब तक 9 बच्चे जा चुके हैं विदेश

महिला बाल विकास अधिकारी सौरव सिंह ने बताय, कोर्ट प्रक्रिया के तहत बच्ची को दंपती को सौंपा जाएगा। उन्होंने बताया, मातृछाया से इससे पहले वर्ष 2021 में ही 5 बच्चे और बच्चियां विदेश जा चुके हैं। इसके अलावा, कुल 9 बच्चे- बच्चियां विदेश जा चुके हैं।

भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया

भारत में सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) के माध्यम से बच्चे गोद लिए जाते हैं। यह नोडल बॉडी की तरह काम करती है। CARA का काम अनाथ, छोड़ दिए गए (परित्यक्त) और आत्म-समर्पण करने वाले बच्चों का एडॉप्शन करवाना है। बच्चे गोद लेने वाला दंपती या सिंगल पेरेंट पहले CARA में अपने संबंधित कागजात के साथ आवेदन करता है, फिर CARA की टीम उसका परीक्षण करती है। तत्पश्चात एक लंबी प्रक्रिया के बाद बच्चा गोद दिया जाता है।

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