आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन:आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का 55 वां दीक्षा दिवस भक्ति भाव से मनाया, नित्य अभिषेक किया

आष्टाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

अध्यात्म सरोवर के राजहंस सन्त शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महामुनिराज का 55 वां मुनि दीक्षा दिवस सोमवार को दिगंबर जैन समाज द्वारा दिव्योदय जैन तीर्थ किला मन्दिर में भक्ति भाव के साथ मनाया गया। आचार्यश्री की प्रमुख शिष्या आर्यिका श्री कुशल मति माताजी का सोमवार को सुबह की बेला में भोपाल नाका से नगर प्रवेश हुआ। आर्यिकाजी सीधे किला मन्दिर पहुंची।

जहां शांतिधारा नित्य अभिषेक एवं पूजन के पश्चात आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन हुआ। जिसमें आचार्य परमेष्ठी के छत्तीस मूलगुणों के अर्घ्य समर्पित कर गुणानुवाद किया गया। इस अवसर पर आर्यिकाश्री ने कहा कि आचार्य भगवान विद्यासागरजी महामुनिराज आज इस धरती पर चलते फिरते सिद्धों के समान अपनी चर्या का पालन कर अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।

अनियत विहारी सन्त है जो कि बिना बताए ही अपना विहार करते हैं। आजीवन नमक, शकर, हरी सब्जियां आदि वस्तुओं का त्याग कर चुके हैैं। आज से 55 वर्ष पूर्व आचार्यश्री ज्ञान सागर महाराज ने सन 1968 में ब्रम्हचारी विद्याधर को राजस्थान के अजमेर नगर में आषाढ़ शुक्ल पंचमी को मुनि दीक्षा दी गई थी।

खबरें और भी हैं...