• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Sehore
  • Ashta
  • Poornamati Mataji Said That Family post money Is Going To Increase The World, For Salvation, Devotion And Penance Are Necessary.

धर्म-कर्म:पूर्णमति माताजी ने कहा परिवार-पद-पैसा यह संसार को बढ़ाने वाले हैं, मुक्ति के लिए भक्ति, तपस्या जरूरी

आष्टा2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

आज के समय में अधिकांश श्रावक-श्राविकाएं स्वाध्याय तो करते हैं लेकिन मन की मलिनता नहीं हट रही है। उसका कारण भी यह है कि आप लोगों का मन धर्म-ध्यान व स्वाध्याय के दौरान अधिक भटकता है। एकाग्र चित्त होकर अगर स्वाध्याय करेंगे तो मन की मलिनता दूर होगी साथ ही पुण्य का अर्जन होगा। यह बातें संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज की शिष्या आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी ने आशीष वचन देते हुए कहीं।

आर्यिकाश्री पूर्णमति माता शजी ने प्रवचन में बताया कि अगर तुम से कोई द्वेष करता है तो तुम भी उससे द्वेष करने लगते हो,जैसा माहौल मिलता है वैसा हम करने लगते है। हमारे द्वारा होने वाली धार्मिक क्रिया मात्र क्रिया ही बन कर रह गई है। दो घड़ी निज नाथ के नजदीक तो आओ अपनी प्रभुता देख लो बाहर न भरमाओ, आपकी आत्मा आनंद कंद है, गुण चेतन्य है, संसार में जो कुछ भी दिख रहा है सब कुछ मिटने वाला है नाशवान है।

जो सब को दिख रहा है वह एक दिन मिटने वाला है। आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी ने आगे कहा संसार में प्रेम-भाव आदर्श होता है, धन-संपत्ति नहीं। परिवार, पद, पैसा यह सब संसार को बढ़ाने वाले हैं, संसार से मुक्ति के लिए तो भगवान व गुरु भक्ति , तपस्या ही जीवन को सार्थक सिद्ध करती है। द्वार पर आए दीन दुखी को निराश नहीं लौटाए वहीं सच्चा संत होता है।

धर्मवाणी को श्रवण कर जीवन में आत्मसात करें और अपने चरित्र में लागू करें तभी वह जीवन को सार्थक सिद्ध कर सकती हैं। आपने कहां कि पवित्र भाव के बिना आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता है। मंदिर में प्रभु प्रतिमा दर्शन करते समय एकाग्रता होनी चाहिए, तभी दर्शन सार्थक सिद्ध होते हैं। मंदिर में पूजा मन से होना चाहिए, दिखावे के लिए नहीं। जिसने परमात्मा को केंद्र में रखा उसे अगले जन्म में परमात्मा महावीर जैसे गुण के संस्कार मिलते हैं। आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी ने अपने संघ के साथ इंदौर की ओर विहार किया।

खबरें और भी हैं...