12 दुकानें खंडहर में हो चुकी हैं तब्दील:14 साल पहले नीलाम हुई दुकानों के 27 खरीदारों ने 87 लाख रुपए जमा नहीं किए

नसरुल्लागंज9 दिन पहले
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नगर परिषद द्वारा बनवाई गई दुकानें। - Dainik Bhaskar
नगर परिषद द्वारा बनवाई गई दुकानें।

कोरोना संक्रमण काल से ही नगर परिषद की माली हालत ठीक नहीं हैं। टैक्स वसूली में नप लगातार पिछड़ती जा रही हैं। इसके अलावा व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए नप द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत बनाई गई दुकानों को नीलाम करने के बाद भी नप नीलामीकर्ताओं से पिछले 14 साल में मूल राशि भी वसूल नहीं कर सकी हैं। इसके अलावा दुकानों का किराया अलग से नप को वसूलना हैं। ऐसी स्थिति में अब नप कड़े कदम उठाने को विवश हो गई है।

नगर परिषद को दुकानों की नीलामी किए 14 साल बीत चुके हैं, लेकिन नप अभी भी राशि वसूलने में पिछड़ी हुई हैं। दुकानों की नीलामी में बोली लगाने वालों ने 50 फीसदी राशि जमाकर दुकानों का कब्जा लेकर या तो खुद दुकान चला रहे हैं या फिर उन दुकानों को किराए पर देकर किराया वसूल रहे हैं।

दोनों ही हालत में नप की 87 लाख रुपए की राजस्व वसूली अटकी पड़ी हैं, जिसका खामियाजा नपा को कोरोना संक्रमण काल के दौरान भी भुगतना पड़ा हैं। ऐसी स्थिति में नप ने पिछले दिनों 27 दुकानदारों के खिलाफ नोटिस जारी कर राशि जमा करने को कहा गया हैं।

तीन दिन में राशि जमा नहीं होने पर होगी कार्रवाई
27 दुकानदारों को नोटिस जारी कर हिदायत दी हैं कि यदि नीलामी की शेष 87 लाख रुपए की राशि जमा नहीं कराई जाती हैं तो इन दुकानदारों की जमा राशि राजसात करते हुए दुकानों की फिर से नीलामी की जाएगी। जिसकी संपूर्ण जबावदारी नीलामीकर्ताओं की रहेगी। -विनोद प्रजापति, सीएमओ, नगर परिषद नसरुल्लागंज

21 दुकानें खंडहर में बदली मवेशियों का जमावड़ा
नप द्वारा तैयार दुकान निर्माण व नीलामी के बाद राशि वसूलने में लेट लतीफी का नतीजा यह हुआ कि शनि मंदिर व पुराना बाल विहार के पास बनी हुई 21 दुकानें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। अब यहां पर मवेशियों का जमावड़ा बना रहता हैं। लेकिन नप सिर्फ नीलामीकर्ताओं को सालों से नोटिस ही जारी करती चली आ रही हैं। कार्रवाई न होने की दशा में नीलामीकर्ता भी नप के नोटिस का जबाव देना उचित नहीं समझ रहे हैं।

दुकानदार बोले- नप दुकानों की मरम्मत करवाए तो राशि जमा करेंगे
जिन दुकानदारों को नप द्वारा नोटिस जारी किया गया है उनका मत हैं कि वर्ष 2008 से 2015 तक शनि मंदिर व पुराना बाल बिहार के सामने अतिक्रमण व्याप्त होने के चलते हमारे द्वारा दुकानों की संपूर्ण राशि जमा नहीं कराई गई थी।

हमने नप को अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार कहा, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटा। जब नप ने अतिक्रमण हटाया तब तक दुकानें खंडहर में तब्दील हो चुकी थी। यदि नप द्वारा खंडहर दुकानों की मरम्मत करा दी जाती हैं तो हमें शेष नीलामी की राशि जमा करने में कोई परेशानी नहीं होगी।

14 वर्ष पहले हुई थी नीलामी
नप द्वारा 2007 में 38 दुकानों का एक कॉम्पलेक्स तैयार किया था, जिसमें उद्देश्य स्थानीय लोगों को कम दाम पर दुकानें उपलब्ध करवाना और नगर का व्यापार गति देना था। इसी मंशा के तहत 25 अगस्त 2008 में नप ने निर्माणाधीन दुकानों को नीलामी के माध्यम से विक्रय किया था। लेकिन 38 में से मात्र 13 नीलामीकर्ताओं ने ही दुकानों की संपूर्ण राशि जमा कराई थी, शेष दुकानदारों ने अभी तक दुकानों की राशि जमा करने की रूचि नही दिखाई हैं।

इसी तरह 18 जून 2015 को पुराने बाल विहार में बनाई गई 6 दुकानों को नीलाम किया था। वहीं सचिवालय स्थित यात्री बस स्टेंड पर निर्मित दुकानदार तो आधी राशि जमा करने के बाद अपनी दुकानों को किराए से चला रहे हैं, लेकिन राशि जमा नहीं कर रहे हैं।

नप को दुकानों की नीलामी से आना वाला कुल 1 करोड़ 38 लाख रुपए की बकाया वसूली में से 14 साल में महज 41 लाख रुपए ही वसूली में प्राप्त हुए हैं। अभी भी 87 लाख रुपए से भी अधिक की राशि 27 दुकानदारों से वसूल किया जाना है।

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