कम मामले सुलझे:नेशनल लोक अदालत में दिखा गर्मी और शादियों का असर, कम रही भीड़

आष्टा7 दिन पहले
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शनिवार को नेशनल लोक अदालत में पक्षकारों की उपस्थिति कम दर्ज हुई। इससे कम मामले सुलझ पाए। - Dainik Bhaskar
शनिवार को नेशनल लोक अदालत में पक्षकारों की उपस्थिति कम दर्ज हुई। इससे कम मामले सुलझ पाए।

शनिवार को नगर के न्यायालय परिसर में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें सुबह के समय तो चहल-पहल देखी गई, लेकिन दोपहर के बाद सन्नाटा देखने को मिला। इसकी वजह यह थी कि भीषण गर्मी के साथ ही शादियों की अधिकता से पक्षकार नहीं आ सकें। इसके चलते लोक अदालत फीकी देखने को मिली।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिजली कंपनी के 205 प्रकरणों में से 31 का ही निराकरण हो सका। हालांकि इसमें विभागों के अलावा बैंकों ने जो नोटिस जारी किए गए थे उसमें बकायादारों ने वसूली जमा कराई।

शनिवार को न्यायालय परिसर में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष प्रथम जिला न्यायाधीश सुरेश कुमार चौबे तथा द्वितीय जिला न्यायाधीश कंचन सक्सेना, न्यायाधीश वंदना त्रिपाठी, एमएनएच रजवी, ऋचा राजावत, आयुषी गुप्ता, मध्यप्रदेश लाॅ एंड पब्लिक वेलफेयर काउंसिल के जिला अध्यक्ष धीरज धारवां, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष तेज सिंह भाटी, सचिव भूपेश जामलिया व भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधकों ने माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर नेशनल लोक अदालत का प्रारंभ किया।

नेशनल लोक अदालत में सुबह के समय पक्षकारों की काफी चहल पहल देखने को मिली। उसके बाद जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया तथा गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू किया तो भीड़ भी कम होती चली गई। नाराज दंपती फिर एक हुए

इस बीच लोक अदालत का सबसे चर्चित मामला यह रहा कि आष्टा किला निवासी संध्या पुत्री कैलाश धारवां की शादी मनीष पुत्र बद्री प्रसाद फ्रीगंज शुजालपुर से हुई थी। जिनकी एक पुत्री अंजली भी है उसे मारपीट कर और तकलीफ देकर मनीष ने छोड़ दिया था। तब संध्या ने पूर्व अध्यक्ष ताज मोहम्मद ताज अधिवक्ता के द्वारा न्यायालय में भरण-पोषण करने के लिए प्रकरण न्यायालय एमएनएच रजवी के न्यायालय में प्रकरण लंबित था। नेशनल लोक

अदालत के आयोजन में सुरेश कुमार चौबे प्रथम जिला न्यायाधीश के द्वारा समझाईश देकर राजीनामा करवाया गया व पुष्पगुच्छ देकर दोनों हंसी-खुशी साथ रहने हेतु ससुराल रवाना किया गया। शादियों की अधिकता का दिखा असर: लोक अदालत में भीषण गर्मी के अलावा शादियों की अधिकता का असर भी देखने को मिला। जिसके चलते विभागों तथा बैंकों के स्टाल सूने दिखाई दिए।

इन न्यायालय में भी हुए निराकरण
द्वितीय जिला न्यायाधीश कंचन सक्सेना के न्यायालय मे कुल 36 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे। जिसमें से 16 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिसमें 37 पक्षकार को 10 लाख 5 हजार रुपए का लाभ हुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी वंदना त्रिपाठी के न्यायालय में 175 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिनमें 17 प्रकरणों में आपसी सहमति से प्रकरणों का निराकरण हुआ। 36 पक्षकारों को 11 लाख 57 हजार 594 रुपए का लाभ प्राप्त हुआ।

इसी प्रकार एमएनएच रजवी के न्यायालय में कुल 96 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें ने 20 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिसमें 33 पक्षकार 45000 रुपए लाभान्वित हुए। आयुषी गुप्ता के न्यायालय में कुल 16 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए।

जिसमें से 16 प्रकरणों का निराकरण हुआ। 28 पक्षकारों को लाभ प्राप्त हुआ। इसी प्रकार ऋचा राजावत के न्यायालय में 3 प्रकरण निराकरण के लिए रखे गए थे। इसमें से 3 प्रकरण निराकृत हुए तथा 6 पक्षकार को 7 लाख 45 हजार 537 रुपए का लाभ प्राप्त हुआ।

205 विद्युत प्रकरण में 31 का हुआ मौके पर निराकरण
लंबित प्रकरणों में प्रथम जिला न्यायाधीश श्री चौबे के न्यायालय में कुल 205 विद्युत प्रकरण निराकरण के लिए रखे गए थे। जिसमें से राजीनामा अनुसार कुल 31 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिसमें 7 लाख 44 हजार 883‌ रुपए राशि जमा करायी गई। मोटरयान अधिनियम एवं एनआईएक्ट तथा अन्य प्रकरणों का निराकरण हुआ। इसमें कुल 6 प्रकरणों में पक्षकारों को 2 लाख 57 हजार समझौता राशि दिए जाने के आदेश न्यायालय द्वारा किए गए।

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