छोटा गुड्डा एनकाउंटर नहीं था फर्जी:उच्च न्यायालय ने 11 साल बाद सुनाया फैसला, 14 पुलिसकर्मियों को मिली क्लीन चिट

शहडोल4 महीने पहले
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चर्चित छोटा गुड्डा उर्फ राजकुमार यादव एनकाउंटर से संबंधित मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने 11 साल बाद फैसला आया है। इस फैसले में पूरे एनकाउंटर को सही मानते हुए 14 पुलिस वालों के खिलाफ चल रहे धारा 302 भादवि के मामले को समाप्त करते हुए, सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई है।

क्या है पूरा मामला

छोटा गुड्डा की मां ने शहडोल न्यायालय के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया गया था। जिसमें कोतवाली शहडोल के 14 पुलिस वालों के खिलाफ अपने पुत्र के एनकाउंटर किए जाने को फर्जी बताते हुए, हत्या का आरोप लगाया था। इस मामले में न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट शहडोल ने उस समय के थाना सिटी कोतवाली में पदस्थ थाना प्रभारी जेबीएस चंदेल, एसआई ज्ञानेंद्र सिंह बघेल, एएसआई स्व. प्रदीप दुबे, आरक्षक अरविंद दुबे, महेश यादव, चंद्रप्रताप सिंह, शिवनारायण, रामनरेश पटेल, स्वतंत्र सिंह, रामप्रसाद चौबे, अरविंद प्यासी, गजेंद्र सिंह, रईस खान और लोलर मिश्रा के खिलाफ धारा 302 का मामला दर्ज किया गया था।

कौन था छोटा गुड्डा

छोटा गुड्डा शहडोल में गंज रोड का निवासी था। साल 1990 के दशक में आतंक का पर्याय बने छोटा गुड्डा के खिलाफ मारपीट, हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, बम बारी जैसे 36 गंभीर अपराध शहडोल कोतवाली थाने में दर्ज थे। साल 1998 में उसे हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जिसे वर्ष 2006 में रीवा जेल से 23 दिन की पैरोल मिली थी, लेकिन 23 दिन के अंदर वापस जेल नहीं गया और दोबारा अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। जिस पर प्रदेश स्तर के पुलिस अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार किए जाने के निर्देश थाना कोतवाली को दिए थे।

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