प्रवृद्धि श्रीजी ने कहा:शुद्ध भाव से की गई भक्ति आत्म कल्याण में सहायक होती है

शाजापुर2 महीने पहले
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संस्कृति की अंगूठी में ही धर्म रत्न सुशोभित होता है। नायक की यह खूबी होती है वह सर्वश्रेष्ठ हो फिर भी सहायक का ध्यान रखता है। शुद्ध भाव से की गई प्रभु की भक्ति आत्म कल्याण में सहायक होती है। यह बात शुद्धि प्रसन्ना श्रीजी की शिष्या प्रवृद्धि श्रीजी ने शनिवार को जैन उपाश्रय में आयोजित श्री अष्टपद महातीर्थ की संगीतमय भाव यात्रा में कही। उन्होंने बताया कि रविवार को नियमित प्रवचनमाला के दौरान सुबह 9.30 बजे ममतामयी मां विषय पर मार्मिक प्रवचन तथा बच्चों की लघु नाटिका का मंचन किया जाएगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। ज्ञात रहे चातुर्मास के चलते उपाश्रय में प्रतिदिन प्रवचन व धार्मिक आयोजन हो रहे हैं।

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