मातेश्वरी जगदंबा का 57वां स्मृति दिवस:त्याग, तपस्या और सेवा से मानव समुदाय को दिखाई जीवन मुक्ति की राह

शाजापुर (उज्जैन)2 महीने पहले
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प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा का 57वां स्मृति दिवस आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया। शुक्रवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शिव वरदानी धाम हरायपुरा में कार्यक्रम आयोजित कर प्रशासिका को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर सेवा केंद्र प्रभारीब्रह्माकुमारी पूनम बहन ने मातेश्वरी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महज 14 वर्ष की अल्पायु में मातेश्वरी ब्रह्माकुमारी संस्थान के संपर्क में आईं और 21 वर्ष की आयु में संस्थान में विश्व कल्याण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बनीं।

मातेश्वरी का जन्म 1919 में अमृतसर शहर में हुआ जिनका लौकिक नाम राधे था और 1965 में उन्होने अपना भौतिक देह का त्याग किया। पूनन बहन ने बताया कि मातेश्वरी संगीत कला, नृत्य कला एवं आध्यात्मिक गुणों से परिपूर्ण थीं। मातेश्वरी ने आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा मानवता की सेवा के पथ को उस समय चुना जब नारियों को घर से बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं होती थी। भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए मातेश्वरी का यह त्याग, समर्पण और सेवा समस्त भारत तथा विश्व के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

ब्रह्माकुमार दीपक भाई ने मातेश्वरी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज जिस प्रकार से मानव के अंदर दया, भाव, करुणा समाप्त हो गई है वह मानवता को भूल गया है और आपसी समुदाय सामाजिक मतभेदों में बंट गया है। ऐसे समय पर हर मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि आध्यात्म मानव मात्र को एक सूत्र में पिरोता है। इसलिए ब्रह्माकुमारी संस्थान के द्वारा वर्ष 2022 दया एवं करुणा के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण के रूप में भी मना रही है और आज विशेष आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में हम 24 जून को मना रहे हैं।

आध्यात्म का सही अर्थ यही है कि हम एक ईश्वर पिता की संतान हैं। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब आपस में हैं भाई-भाई। मतभेदों को समाप्त करें तभी यह संसार स्वर्णिम संसार बन जाएगा और हमारा जीवन सुखमय जीवन हो जाएगा। कार्यक्रम के पश्चात निराकार शिव भगवान को भोग लगाया और ब्रह्माभोजन का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।