गोबर से 'गैसगुरु' बन गया 8वीं पास किसान:शुजालपुर में बायोगैस प्लांट से बनाई बिजली और CNG; इसी से चलाते हैं कार-ट्रैक्टर

पुरुषोत्तम पारवानी। शुजालपुर3 महीने पहले

मध्यप्रदेश के शुजालपुर के पटलावदा के किसान देवेंद्र परमार। आठवीं पास हैं। 100 दुधारू पशुओं का पालन करते हैं। देवेंद्र ने खेत में बायोगैस संयंत्र लगाया है। इससे वह न केवल अपने वाहन दौड़ा रहे हैं, बल्कि केंचुआ खाद के साथ बिजली भी पैदा कर रहे हैं। इस प्लांट से रोज 70 किलो गैस का उत्पादन हो रहा है। इसे वह सीएनजी के रूप में वाहनों में उपयोग कर रहे हैं। साथ ही, 100 यूनिट बिजली पैदा हो रही है। केंचुआ खाद बेचकर वह रोजाना 3 हजार और दूध बेचकर 4000 रुपए कमाई कर रहे हैं। इस तरह महीने भर में करीब 2.10 लाख की कमाई कर रहे हैं। सालाना करीब 25 लाख रुपए की इनकम हो रही है। जानते हैं उन्हें ये कैसे आइडिया आया। कैसे बनाई कमाई की राह...।

4 साल से रासायनिक खाद का उपयोग नहीं
मेरे पास 7 बीघा जमीन है। बीते 4 साल से रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया। 100 दुधारू पशु हैं। रोजाना 25 क्विंटल गोबर जमा होता है। ऑटोमैटिक मशीन से गोबर 100 घन मीटर के बायोगैस संयंत्र में डाला जाता है। इससे 100 यूनिट यानी 12 किलोवाट बिजली पैदा हो रही है। गोबर के वेस्ट से केंचुआ खाद बनता है। 300 किलो जैविक खाद 10 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं। खाद को आसपास के गांवों के किसान ही ले जाते हैं।

बायो गैस संयंत्र से निकले वेस्ट से केंचुआ खाद बनता है।
बायो गैस संयंत्र से निकले वेस्ट से केंचुआ खाद बनता है।

हर महीने दो लाख रुपए की कमाई
किसान ने बताया, रोजाना 3000 हजार रुपए की जैविक खाद बेचता हूं। यानी महीने में 90 हजार की खाद बेच देता हूं। 500 लीटर दूध स्वयं के मवेशियों से और 1500 लीटर अन्य गांवों से कलेक्शन कर सांची दुग्ध संघ भोपाल को बेचकर रोज 4000 रुपए की कमाई हो रही है। अतिरिक्त बिजली के लिए 5 किलोवाट का सोलर पैनल भी लगा रखा है।

25 लाख की लागत से स्थापित किया प्लांट।
25 लाख की लागत से स्थापित किया प्लांट।

ऐसे आया आइडिया
मेरा डेयरी का व्यवसाय है। आसपास के गांव से दूध खरीदकर लोडिंग वाहन, कार और ट्रैक्टर के जरिए लाते हैं। रोज 3 हजार का डीजल और पेट्रोल डलवाना पड़ता था। इस खर्च से परेशान होकर खुद के गोबर गैस के संयंत्र को बायोगैस प्लांट के रूप में कनेक्ट कराया। बिहार से आए इंजीनियर ने प्लांट लगाने में मदद की। इसमें 25 लाख की लागत आई। अब प्लांट से खेत में ही बैलून में रोज 70 किलो गैस का उत्पादन हो रहा है। इससे सीएनजी के रूप में उपयोग कर बोलेरो पिकअप वाहन, ऑल्टो कार और ट्रैक्टर और बाइक बिना खर्च के चला रहा हूं।

सीएनजी गैस से देवेंद्र अपने वाहन भी चला रहे हैं।
सीएनजी गैस से देवेंद्र अपने वाहन भी चला रहे हैं।

ऐसे बन रही खेत पर सीएनजी गैस
देवेंद्र ने बताया कि 2500 किलो गोबर से चलने वाले बायोगैस संयंत्र में बनने वाली गैस में 60 फीसदी मीथेन और 40 फीसदी कार्बन डाइ ऑक्साइड गैस होती है। कार्बन डाई ऑक्साइड को पानी व ऑयल से प्यूरीफायर करते हुए अलग किया जाता है, जिसमें पानी के साथ कार्बन डाई ऑक्साइड एक पाइप से बाहर निकल जाती है। दूसरे पाइप से मीथेन गैस बैलून में आ जाती है। इसी गैस को कंप्रेसर से वाहनों में सीएनजी के रूप में उपयोग कर डालते हैं। डीजल से ज्यादा 15 किमी प्रति किलो का ऐवरेज देती है।

खेती बंद, मवेशियों के लिए बोता हैं चारा
देवेंद्र ने बताया, मेरे पास 7 बीघा भूमि है। मैं परंपरागत उपज नहीं बोता। हर दिन 500 लीटर दूध का उत्पादन देने वाले 100 दुधारू मवेशियों को खिलाने के लिए चारे की बुवाई करता हूं। 4 साल से खेतों में रसायन का उपयोग का बंद कर दिया है। चारा भी जैविक खाद से ही पैदा कर रहा हूं।

किसान के पीछे दिख रहे बैलून में एकत्र होती है गैस।
किसान के पीछे दिख रहे बैलून में एकत्र होती है गैस।

पूरा काम ऑटोमैटिक मशीन करती है
मवेशियों के लिए व्यवस्थित बनाए गए शेड में इस तरह नालियां और कंप्रेसर फिट किया गया है, जिससे गोमूत्र और गोबर ऑटोमैटिक संयंत्र चंद मिनटों में चला जाता है। मवेशियों को दिया जाने वाला चारा काटने से लेकर उन्हें दूध बढ़ाने के लिए दिए जाने वाला दाना बनाने की मशीन भी खेत पर लगा रखी हैं। यहां सिर्फ 5 मजदूर काम करते हैं।