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भागवत कथा:गाय विश्व की माता है, दूध अमृत, हर घर में गाय व हर गांव में गोशाला हो

श्योपुर7 दिन पहले
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अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भागवत कथा कर कृष्णचन्द्र ठाकुर ने शहर के पाली रोड पर 102 साल से संचालित श्री गोपाल गोशाला देखी। वे गोशाला प्रबंध समिति के आमंत्रण पर शुक्रवार शाम गोशाला पधारे। जहां उन्होंने भगवान गोपाल, ब्रह्मलीन संत स्वामी कृष्णानन्द महाराज के चित्र पर मालार्पण के बाद गायों की पूजा की। इस अवसर पर कृष्णचंद ठाकुर ने गोसेवा की महिमा का बखान किया। श्री ठाकुर जी ने कहा कि हमारे वेद पुराणों में गावः विश्वस्य मातर अर्थात गाय को विश्व माता की उपमा देकर वंदना की है। उन्होंने कहा कि संसार में सिर्फ गाय ही ऐसा पशु है जिसे माता की संज्ञा दी गई है।

गाय की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। सनातन हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार गाय के शरीर में देवताओं का वास है। गाय का दूध धरती का अमृत है। देसी गाय का गोबर, गोमूत्र, दही, घी, मक्खन औषधि के समान है। इसलिए हर घर में गाय और हर गांव में गोशाला होना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह अपनी कथा की शुरुआत हमेशा गोमाता का जयकारा लगाकर करते है।

स्वयं गोव्रती है, वृंदावन में भक्तिपथ गोदाम में बरसों से हजारों गायों की सेवा हो रही है। इससे पूर्व गोशाला प्रबंध समिति के सदस्यों ने श्री ठाकुर जी का पुष्पहार, शाल एवं श्रीफल से स्वागत किया। प्रबंध समिति के अध्यक्ष कैलाशनारायण गुप्ता ने गोसेवा के क्षेत्र में संस्था द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी दी।

"अग्नि की साक्षी में विवाह से बढ़ता है वर-वधु का सम्मान'

श्योपुर| ट्रांसपोर्ट मैदान में आयोजित भागवत सप्ताह में शनिवार को कृष्णचन्द्र शास्त्री ठाकुर ने कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का सरस वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जो लड़का-लड़की अपने माता पिता की इच्छा के विरुद्ध मनमाना विवाह करते हैं, वह उनके पितरों को अधोगति प्रदान करता है और संतान में भी वर्ण संकर का गुण आता है। माता-पिता की इच्छा और गुरु, ब्राह्मण एवं अग्नि की साक्षी में ही विवाह करना चाहिए। इससे समाज में वर-वधू का सम्मान बढ़ता है और यही भारतीय परंपरा है।

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