भाड़ा बचाने संस्था ने नहीं मंगाया खाद:किसान 33 किमी दूर शहर से खरीदकर लाने को हुए मजबूर

श्योपुर16 दिन पहले
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किसान रबी सीजन में गेहूं, सरसों समेत अन्य फसलों की तैयारी में जुटे हुए है। ऐसे में उन्हें खाद की जरूरत पड़ रही है। लेकिन मानपुर संस्था ने ट्रक भाड़ा बचाने के फेर में शहर के गोदाम से खाद मंगाया ही नहीं। जिसके चलते अब किसानों को निजी खर्च पर 33 किमी दूर श्योपुर शहर जाकर गोदाम से खाद लाना पड़ रहा है। इसे लेकर मानपुर संस्था प्रबंधक का तर्क है कि उन्हें शासन ट्रक भाड़े के सिर्फ 12 हजार रुपए ही मिलते है, जबकि ट्रक का भाड़ा वर्तमान में 30 हजार मांगा जा रहा है। दो-चार दिनों में वह संस्था पर खाद की उपलब्धता करा देंगे।

मानपुर में सहकारी संस्था ने इस बार संस्था पर खाद मंगाने की बजाए सभी तीन हजार सदस्य किसानों को खुद ही श्योपुर गोदाम से खाद उठाने की व्यवस्था कर दी है। 8 गांव के इन सदस्य किसानों को हर साल संस्था पर ही खाद उपलब्ध होता था। लेकिन इस बार किसानों को खुद अपनी जेब से भाड़ा लगाकर खाद श्योपुर से लाना पड़ रहा है। सहकारी संस्था पर केवल पर्ची दी जा रही है। इस पर्ची के आधार पर किसानों को खाद 33 किमी दूर श्योपुर स्थित विपणन संस्था के गोदाम से उठाना पड़ता है।

संस्था प्रबंधन द्वारा अपना भाड़ा खर्च बचाने के चक्कर में क्षेत्रीय किसानों की जेब पर आर्थिक बोझ डाल दिया है। वर्तमान में उक्त संस्था पर सरसों की बोवनी के लिए किसानों के लिए 250 टन खाद की जरूरत है।

मानपुर में किसान चतुर्भुज शर्मा, देवीशंकर गोस्वामी, सत्यनारायण कुशवाह ने बताया कि श्योपुर से खाद उठाने की व्यवस्था के चलते उन्हें अपना समय और गाड़ी मेहनत का पैसा जेब से खर्च करने को मजबूर किया जा रहा है। खरीफ सीजन में भी किसानों को खाद के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब रबी सीजन की शुरुआत में ही खाद का बंदोबस्त करना महंगा पड़ रहा है।

संस्था को 1.65 करोड़ रुपए जमा कर चुके 8 गांव के किसान
मानपुर सर्कल के ग्राम मानपुर, जैनी, मेवाड़ा, बहरावदा, सरोदा, काशीपुर, गुढ़ा, फतेहपुर आदि गांव के किसान सीजन में अपनी जरूरत का खाद सहकारी संस्था से उधार लेते है और फसल बेचकर चुकाते है। इस संस्था से कुल तीन हजार किसान जुड़े है। जो हर सीजन में 250 टन खाद लेते है। वर्ष 2022 में अभी तक एक करोड़ 65 लाख रुपए संस्था को जमा कर चुके है। अब केवल 17 लाख रुपए की वसूली शेष है। किसानों का कहना है कि समय पर पैसा जमा करने के बावजूद उन्हें खाद के लिए भटकने को मजबूर किया जा रहा है।

सामान्य तौर पर क्षेत्र के किसान श्राद्धपक्ष में ही सरसों की बोवनी शुरू कर देते है, लेकिन इस बार खाद की किल्लत और अधिक तापमान के कारण सरसों की बोवनी नहीं कर पाए है। अब किसान नवरात्र शुरू होते ही बोवनी करने का मानस बना चुके है, लेकिन संस्था पर लागू मनमाने सिस्टम ने आम किसान को मुसीबत में डाल दिया है।

इस अव्यवस्था से छोटे किसानों की हो रही फजीहत
इस अव्यवस्था से खासकर छोटे किसानों की फजीहत हो रही है। क्योंकि ट्रैक्टर का भाड़ा 3 हजार रुपए लगता है। ऐसे में 8-10 किसान इकट्ठे होकर खाद लाने को मजबूर हो रहे है। संस्था को खाद मंगाने में कथित तौर पर होने वाले घाटे से बचने के लिए यह कवायद की जा रही है।

दो-चार दिन में संस्था पर मिलने लगेगा खाद
"वर्तमान में श्योपुर से एक ट्रक खाद मंगाने का भाड़ा 30 हजार रुपए मांगा जा रहा है, जबकि संस्था को यह भाड़ा सिर्फ 12 हजार रुपए फिक्स है। जिन किसानों को जल्दी है उनको श्योपुर गोदाम से खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। किसानों की परेशानी को देखते हुए अगले दो-चार दिन में खाद मंगाकर संस्था पर ही उपलब्ध कराया जाएगा।"
-रघुवीर शर्मा, प्रबंधक, सहकारी संस्था मानपुर

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