भगवान नृसिंह प्राकट्य उत्सव पर हुआ मंचन:खंभे से प्रगट हुए नृसिंह भगवान,भक्त प्रह्लाद को तारा, हिरण्यकश्यप को मारा

श्योपुर14 दिन पहले
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वैशाख शुक्ल चतुर्दशी पर नृसिंह जयंती के मौके पर मानपुर कस्बे में कोरोना संक्रमण के कारण लगातार दो साल बंद रही 152 साल पुरानी धार्मिक परम्परा शनिवार को फिर जीवंत हुई। भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए खंभा फाड़ कर प्रगट हुए भगवान नृसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप वध के पौराणिक प्रसंग का मुखौटा धारी स्थानीय कलाकारों ने मंचन किया।

इस दौरान मेन बाजार स्थित भगवान श्री नृसिंह मंदिर के सामने मल्लयुद्ध का प्रदर्शन देखने के लिए कस्बे सहित आसपास गांवों से श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा। जैसे ही भगवान ने आधा नर और आधा सिंह के रूप में अवतार लेकर राक्षस हिरण्यकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में उठाया तो चारों तरफ हर्षपूर्ण माहौल में जयकारे गूंज उठे। नृसिंह चौक पर महाआरती के बाद पहली बार भक्तों को देशी घी से बनी हुई जलेबी का प्रसाद बांटा।

यूं तो श्योपुर जिले में 550 से ज्यादा मंदिर देवालय है, लेकिन जिलेभर में वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर नृसिंह अवतार लीला का स्वांग प्रदर्शन सिर्फ मानपुर कस्बे में ही हाेता है। मल्लयुद्ध के स्वांग प्रदर्शन की यह धार्मिक परंपरा 152 साल से चली आ रही है। परम्परा के अनुसार नृसिंह जयंती पर मुकुट और लकड़ी से बने मुखौटा लगाकर लोगों ने कस्बे के मेन बाजार स्थित नृसिंह चौक पर नृसिंह अवतार लीला का प्रदर्शन किया।

नृसिंह मंदिर पर 1927 में शुरू हुई थी परंपरा
मानपुर कस्बे में भगवान नृसिंह मंदिर पर मल्लयुद्ध स्वांग प्रदर्शन की परंपरा विक्रम संवत 1927 में शुरू हुई थी। मंदिर के पुजारी हीरालाल भारद्वाज ने यह परंपरा शुरू कराई थी। उनके बाद पुजारी गुरुजी रामनिवास भारद्वाज ने इसका विस्तार किया। वर्तमान में इस परिवार की चौथी पीढी़ के पुजारी शिवप्रसाद भारद्वाज इसे आगे बढ़ा रहे है। वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना संक्रमण के चलते नृसिंह चतुर्दशी पर लाॅकडाउन रहने के कारण यह परंपरा टूटी थी।

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