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हेल्थ का परीक्षण:नए घर में चीतों के 24 घंटे, घूमे-फिरे, चार बार पानी पीया; 8 बार जांच के बाद भैंस का मांस खाया

श्याेपुर11 दिन पहलेलेखक: अनिल शर्मा
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यह तस्वीर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर साझा की। - Dainik Bhaskar
यह तस्वीर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर साझा की।

नामीबिया से भारत लाए गए सभी 8 चीतों का पहला दिन कूनो नेशनल पार्क में बेहतर निकला। भारत और नामीबिया के पशु चिकित्सक दूर से ही उनकी एक्टिविटी पर हर मिनट नजर रख रहे हैं। उनकी एक्टिविटी को देखकर हेल्थ का परीक्षण कर रहे हैं। रात तक उनका 8 बार परीक्षण किया जा चुका है।

कूनो के रेंजर यशबंधु ने बताया कि जब से चीतों को कंपार्टमेंट में क्वारेंटाइन किया गया है, तब से उनके पास कोई नहीं गया है। हालांकि बाहर से उनकी एक्टिविटी दिखाई दे रही है। उन्होंने तीन-चार बार पानी पीया, कुछ देर बाड़े में टहले। रविवार शाम को उन्हें भैंस का मांस खाने को दिया गया। सभी चीतों ने इसे खाया।

पार्क के निदेशक उत्तम शर्मा के मुताबिक-

नामीबिया से रवाना होने से पहले चीतों को भैंस का मांस दिया गया था, इसलिए उन्हें रविवार को भोजन दिया गया। चीते सक्रिय हैं और स्वस्थ हैं। एक महीने उन्हें इन्हीं बाड़ों में रहना होगा। आठों चीते ओबान, फ्रेडी, क्रेडी, सवाना, आशा, सिबिली, सैसा और साशा पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्हें अपने नए घर में घूमते और आराम करते देखा गया।

50 घड़ियाल भी कूनो में छोड़े जाएंगे

चीतों के बाद अब कूनो में चंबल सेंक्चुरी से 50 घड़ियाल लाकर छोड़े जाएंगे। डीएफओ स्वरूप दीक्षित ने बताया कि मुरैना के देवरी सेंटर में पल रहे घड़ियालों के बच्चों में से 50 का स्लॉट कूनो नदी में भेजा जाएगा। भोपाल वाइल्डलाइफ से स्वीकृति मिल गई है।

मादा को पीएम ने नाम दिया आशा

नामीबिया से कूनो लाए गए 8 में से 3 नर और 5 मादा चीतों काे नाम दिया जाएगा। एक मादा चीता काे खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘आशा’ नाम दिया है। क्योंकि इसी मादा चीता से भारत में प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को भविष्य को लेकर ज्यादा उम्मीदें हैं। आशा 3 साल 4 माह की है। अन्य चीतों के नाम पहले से ही तय हैं।