कूनो में लड़ सकते हैं चीते और तेंदुए:139 तेंदुओं, 100 भालुओं के बीच रहेंगे 8 चीते; शिकार को लेकर उग्र हो सकते हैं

भोपाल/श्योपुर3 महीने पहलेलेखक: योगेश पाण्डे

कूनो नेशनल पार्क में 17 सितंबर को अफ्रीका से चीते आते ही यहां के जंगल का ईको सिस्टम बदल जाएगा। यहां रहने वाले तेंदुए अपनी कैट प्रजाति के एक नए वन्यप्राणी से पहली बार मुखातिब होंगे। बिल्कुल उनकी जैसी शक्ल वाले ये चीते 70 साल बाद उनकी टेरेटरी में आ रहे हैं। आखिर क्या कुछ बदलेगा जंगल में चीतों के आने से... इसी सवाल को हमने जानने की कोशिश की है...

हमने वन विहार भोपाल के पूर्व डायरेक्टर डॉ. सुदेश वाघमारे से पूछा कि तेंदुओं का क्या होगा? फिर कूनो पहुंचकर CCF उत्तम शर्मा से और अन्य अधिकारियों से भी यही सवाल दोहराया...

वाघमारे ने बताया कि जंगल में सबसे ताकतवर जानवर का ही राज चलता है। चीता तेंदुओं से ज्यादा शक्तिशाली और फुर्तीला है। 4 सेकंड में 80 किलोमीटर से ज्यादा की स्पीड पकड़ लेता है। 20 सेकंड में अपने शिकार को झपट्‌टा मारने का माद्दा रखता है।

ये भी तय है कि तेंदुओं और चीतों के बीच शिकार को लेकर फाइट होगी, लेकिन दोनों की अपनी स्ट्रैटजी है। तेंदुआ शिकार को अपने साथ पेड़ पर ले जाकर इत्मिनान से खाता है, लेकिन चीता ऐसा नहीं करता।

हफ्ते में एक बार ही शिकार करता है चीता

चीते के शिकार के बारे में वाघमारे कहते हैं कि आमतौर पर चीता हफ्ते में एक बार ही शिकार करता है, इससे उसका काम चल जाता है। अपने शिकार को वो आमतौर पर एक बार में ही पूरा खाता है। ऐसा माना जाता है कि चीता अपने शिकार को छोड़कर नहीं जाता। सामान्य रूप से चीता ज्यादा ताकतवर माना जाता है, इसलिए उसके शिकार में किसी और की हिस्सेदारी भी नहीं होती है।

इस तरह चेंज होगा जंगल का ईको सिस्टम

तेंदुओं के बाद दूसरा बड़ा जानवर भालू है। भालू वैसे तो चीतों से संघर्ष नहीं करेंगे, लेकिन चीतों ने यदि भालू के बच्चों पर हमला करने की कोशिश की तो भालू भी रिएक्ट करेंगे। ये एक तरह का ईको सिस्टम है। एक बात हमेशा अहम होती है कि वन्यप्राणियों के पास अपने बच्चों को ताकतवर जानवरों से बचाने की एक अलग तरह की चुनौती होती है। खासतौर पर मादा वन्यप्राणियों के लिए। मां जैसे अपने बच्चों की ढाल होती है, वैसे ही मादा वन्यप्राणी भी अपने बच्चों के बड़े होने तक उनके प्राणों के रक्षक के तौर पर काम करते हैं। उन्हें सबसे ज्यादा चुनौती उन बच्चों के नर पिता से भी होती है। नर अपने बच्चों को भी मार डालते हैं। ऐसा वे इसलिए करते हैं, क्योंकि बच्चों के बड़े होने तक (सामान्य तौर पर 1.5 से 2 साल तक) मादा ब्रीडिंग के लिए तैयार नहीं होती। बच्चों के खत्म होने के बाद ही मादा फिर ब्रीडिंग के लिए तैयार हो पाती है।

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भालू के बच्चों पर चीतों ने हमला किया तो क्या होगा...

फिलहाल कूनो में 139 से ज्यादा तेंदुए हैं। पिछले साल की गिनती में उनकी संख्या यही बताई गई है। इसके अलावा 100 से ज्यादा भालू भी हैं। वे भी जंगल के ताकतवर जानवरों में शामिल हैं, लेकिन वे शाकाहारी हैं। आमतौर पर फल और शहद के अलावा दीमक ही खाते हैं, ऐसे में भालू के साथ उनका सीधा संघर्ष नहीं है। हां, यदि चीतों ने भालू या तेंदुओं के बच्चों पर हमला किया तो चीतों के लिए ये सभी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। बच्चों पर हमला हुआ तो तेंदुए और भालू दोनों बहुत ही ताकतवर तरीके से चीतों को जवाब दे सकते हैं। चूंकि चीते लंबे अरसे बाद जंगल में आ रहे हैं, ऐसे में तेंदुओं और भालुओं को उनकी असली ताकत का अंदाजा भी तभी होगा कि जब वे उससे फाइट करेंगे। चीतों को जंगल में अपनी धाक जमाने के लिए ताकत तो दिखानी होगी, तभी तेंदुए और दूसरे जानवर ये मानेंगे कि वो उनसे भी ज्यादा शक्तिशाली है।

चीतों के बाड़े में है तेंदुआ का एक बच्चा

चीतों के बाड़े में घुसे 4 तेंदुओं को निकालने के लिए 2 हाथी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए थे, उन्होंने अपना ज्यादातर काम कर दिया है। तेंदुए का एक बच्चा अभी भी चीतों के बाड़े से बाहर नहीं आ पाया है। वन अफसरों को लगता है कि जोखिम की कोई बात नहीं है। तेंदुआ वहां से निकल गया होगा, या नहीं भी निकला होगा तो वो चीतों को देखकर वहां से विदा हो जाएगा।

कॉलर ID से ट्रैस करेंगे चीतों को

कूनो नेशनल पार्क में जहां ये आने वाले चीतों को कॉलर ID से ट्रेस किया जाएगा। इसके अलावा 5 किलोमीटर के दायरे में CCTV का भी सर्विलांस होगा, ताकि इन पर पूरी निगरानी रखी जा सके। यदि चीते यहां किसी प्राणी का शिकार कर रहे हैं तो ये भी सर्विलांस की मदद से देखा जा सकेगा कि अफ्रीकन चीतों का यहां वन्यप्राणियों के शिकार के वक्त किस तरह का व्यवहार है। इसके अलावा यहां आसपास कुछ वॉच टॉवर भी बनाए गए हैं, जिसकी मदद से जंगल महकमे के मैदानी कर्मचारी भी चीतों की निगरानी करेंगे।

10 साल तक स्टडी की : CCF

चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट उत्तम शर्मा से जब हमने यही सवाल किया तो उन्होंने कहा कि बीते 10 साल से यहां चीतों को लाने के लिए अध्ययन चल रहा है। चीजें अब सेट हो चुकी हैं। प्रॉपर एक्शन प्लान बनने के बाद यहां चीतों को लाया जा रहा है। तैयारियां पूरी हैं। पूरी स्टडी के बाद ही ये निर्णय लिया गया है।

हेलीकॉप्टर से लैंड करेंगे चीते

घास के जंगलों में 80 से 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ने वाले चीते यहां सीधे हेलीकॉप्टर से लैंड करेंगे। पहले 1 महीने वे क्वारैंटाइन सेंटर में रहेंगे, ताकि हमारे जंगली जानवरों के विशेषज्ञ तब तक ये पता कर सकें कि वे कूनो के वातावरण के अभ्यस्त हो गए हैं। CCF शर्मा से हमने सवाल किया कि चीते यहां कैसे दौड़ेंगे तो उन्होंने बहुत साफगोई से कहा कि अब ये सवाल पीछे छूट चुके हैं। सब कुछ देख समझकर और वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद ही चीतों को यहां लाने की मंजूरी मिली है।

चीता लाने के लिए भारत का विशेष विमान नामीबिया पहुंचा

चीतों को भारत लाने वाले विशेष विमान बी 747 नामीबिया पहुंच गया है। नामीबिया में भारतीय दूतावास ने इस विमान की तस्वीर ट्वीट की है। इस विमान पर टाइगर की पेंटिंग की गई है। विमान कंपनी ने इसे विशेष फ्लैग नंबर 118 दिया है। कंपनी दुनिया में पहली बार चीतों को शिफ्ट करने के लिए फ्लाइट का संचालन कर रही है। इस विमान में 8 चीतों को भारत लाया जाएगा।

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मध्यप्रदेश में श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीते लाए जाने की आहट के बीच ही आसपास के इलाकों की जमीनों के भाव आसमान छूने लगे हैं। साथ ही पर्यटन बढ़ने की संभावना में यहां रिजॉ़र्ट और होटल कारोबार के फलने-फूलने की उम्मीदें भी बहुत बढ़ गई हैं। यहां 1 लाख रुपए बीघा बिकने वाली जमीन 11.5 लाख रुपए बीघा बिक रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

आमतौर पर यहां वीरानी होती है, इक्का-दुक्का लोग ही दिखते हैं, लेकिन कुछ दिनों से श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क के गेट पर अफसरों की गाड़ियां हर 10 मिनट में भीतर-बाहर हो रही हैं। चीतों के आने से ज्यादा इस बात को लेकर हलचल है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को अपने जन्मदिन पर इन चीतों के पिंजरे खोलेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन यानी 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। इसी दिन कूनो नेशनल पार्क में 8 अफ्रीकन चीतों की शिफ्टिंग होगी। PM इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। साथ ही महिला स्व-सहायता समूह के सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। इसकी जानकारी CM शिवराज सिंह चौहान ने कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रिपरिषद के सदस्यों को दी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

भारत में 70 साल बाद फिर चीतों को बसाने की कवायद में नया पेंच फंस गया था। दक्षिण अफ्रीका ने चीते देने से पहले भारत के सामने नई शर्त रखी थी। उनका कहना था कि पहले कूनो नेशनल पार्क से तेंदुओं को हटाया जाए, इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल जांच के लिए यहां आएगा। इसके बाद ही चीतों की शिफ्टिंग के लिए MoU (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग) किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

कूनो नेशनल पार्क में 17 सितंबर को नामीबिया से आठ चीते लाए जाएंगे। इन्हें अफ्रीका से 16 सितंबर काे हवाई मार्ग से ग्वालियर लाया जाएगा। फिर ग्वालियर से इन्हें चॉपर से श्योपुर पहुंचाया जाएगा। कूनो नेशनल पार्क में ये चीते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने से चार घंटे पहले पहुंचे जाएंगे। इस दिन प्रधानमंत्री का जन्मदिन भी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

भारत में 70 साल बाद फिर से चीते दिखाई देंगे। मध्यप्रदेश में चीतों के स्वागत की तैयारी पूरी हो चुकी है। श्योपुर के कूनो-पालपुर नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 8 चीते लाने की खास तैयारी की गई है। 15 अगस्त तक कूनो में चीते पहुंचने की तैयारी थी। हालांकि, तब आधिकारिक रूप से तारीख की घोषणा नहीं हुई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

मध्यप्रदेश में 70 साल बाद चीते फिर दिखेंगे। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 8 चीते लाने की तैयारी है। पहले चर्चा थी कि 15 अगस्त तक कूनो में चीते पहुंच जाएंगे।​​​​​ हालांकि, तब आधिकारिक रूप से तारीख की घोषणा नहीं हुई थी। अब चीतों को लाने की तारीख 17 सितंबर तय की गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...