आदेश को करैरा प्रशासन ने खूंटी पर टांगा:कलेक्टर के प्रतिबंध के बाद भी जिले के बाहर भूसे का बेखौफ हो रहा परिवहन, चारे का संकट बढ़ा

करैरा9 दिन पहले

करैरा अंचल के अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों के लिए चारे का संकट बढ़ गया है। कारण यह है कि अंचल का भूसा जिले से बाहर धड़ल्ले से जा रहा है। हालांकि शिवपुरी कलेक्टर ने आसपास के बाहरी राज्य जैसे राजस्थान और उप्र में भूसा जाने पर रोक लगा रखी है, लेकिन यह रोक करैरा प्रशासन की उदासीनता के चलते केवल कागजी साबित हो रही है।

करैरा प्रशासन के ओर से कलेक्टर के प्रतिबंध के आदेश को खूंटी पर टांग दिया गया है। जिसके चलते भूसा परिवहन पर कोई कार्रवाई नहीं करने की वजह से भूसा दूसरे राज्यों में और आसपास के जिलों में खुलेआम परिवहन हो रहा है। चारे की मांग दूसरे जिलों व बाहरी प्रदेशों में एकाएक बढ़ने से इसके दाम भी बढ़ गए हैं।

यही कारण है कि मवेशियों के सामने समस्या चारे की हो गई है। स्थिति यह है कि करैरा से खुलेआम ट्रक व ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर प्रतिदिन सैकड़ों वाहन भूसा जिले सहित प्रदेशों में कारोबारियों के ओर से लिया जा रहा है। इससे जिले के मवेशी पालकों के लिए भूसा का संकट पैदा हो गया है।

पशुपालकों का कहना है कि गर्मी के सीजन में जिले के लाखों दुधारू व पालतू पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता का संकट पैदा होने के आसार हैं। भूसे के भाव दिनों दिन बढ़ते जा रहे है और चारे की उपलब्धता घटने से हजारों पशुपालक परेशान हैं।

रोक का कड़ाई से पालन नहीं

पिछले कुछ सालों से प्रशासन जिले से बाहर जाने वाले चारे पर प्रतिबंध लगा देता था। लेकिन इस बार जिला प्रशासन ने केवल जिले से लगे दूसरे राज्य जैसे राजस्थान और उप्र जाने पर रोक लगाई है। इस आदेश का भी कड़ाई से पालन नहीं हो रहा।

स्थानीय पशुपालकों की मांग है कि इस आदेश का कड़ाई से पालन हो। पशुपालकों का कहना है कि करैरा के अधिकारियों को यह समस्या बता दी गई है लेकिन कोई अधिकारी ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं नायब तहसीलदार राजेंद्र जाटव का कहना है कि भूसा परिवहन पर पूर्णतः रोक लगी हुई है, यदि ऐसा है तो टीम का गठन कर कार्रवाई की जाएगी।

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