भाई को राखी बांधने जेल आई बहनें:नियमों के चलते नहीं मिली अनुमति, मायूस होकर लौटी बहनें

शिवपुरीएक महीने पहले

देश आज रक्षाबंधन का पावन पर्व मना रहा है। बहनें अपने भाईयों को राखी बांध रहीं हैं, देश में पीएम से लेकर सीएम ने देशवासियों को बधाई दी और राखी भी बंधवाई लेकिन शिवपुरी जिले में आदेशों की ऐसी बंदिशे लगी कि आधा सैकड़ा से भी ज्यादा बहनें अपने भाईयों को राखी नहीं बांध सकीं।

दरसअल, शिवपुरी की सर्किल जेल में जेल प्रबंधन द्वारा इस बार रक्षाबंधन के त्यौहार पर जेल में भाई-बहनों की खुली मिलाई पर रोक लगा दी लेकिन, इसकी सूचना जारी नहीं की, जिसके चलते लोगों को इस बात का पता ही नहीं लगा कि जेल में आज रक्षाबंधन के दिन मिलाई तक बंद कर दी है। इस कारण आधा सैकड़ा से अधिक बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए शिवपुरी की सर्किल जेल शिवपुरी पहुंच गईं। जहां जेल प्रबंधन ने आदेशों का हवाला देते हुए उन्हें भाइयों को राखी बांधने से मना कर दिया। दूर-दराज से भाइयों को राखी बांधने पहुंची बहनों का कहना था कि कि उन्हें मुलाकात न कराने के संबंध में जारी किए गए आदेश की जानकारी नहीं थी।

आंसू टपकते लगाई गुहार, फिर भी नहीं बांध पाईं भाइयों को राखी

शिवपुरी की सर्किल जेल पहुंची बहनों ने जेल प्रबंधन से काफी मिन्नते की लेकिन आदेशों की बंदिशे बताकर जेल प्रबंधन ने उन्हें भाइयो से मिलने तक नहीं दिया गया। कई बहनों का दर्द यह था कि जेल में त्यौहारों पर मिलने से रोका जाता है, फिर चाहे वह होली की दौज हो या फिर रक्षाबंधन, इसके अलावा खूब मिलने दिया जाता है।

महिलाओं के अनुसार जेल पर तैनात प्रहरी कह रहे हैं, आप कल मिलने आ जाना। कल आपकी राखी भी बंधवा देंगे। महिलाओं के अनुसार कल राखी बांधने का क्या औचित्य रह जाएगा? त्यौहार तो आज है। आज मुलाकात पर रोक क्यों लगाई गई है? ग्वालियर की रहने वाली मनीषा ने अपना दर्द वयान करते हुए बताया कि वह आज सुबह जल्दी उठकर मोटरसाइकिल पर सवार होकर ग्वालियर से शिवपुरी जेल में बंद अपने सोवरन भाई को राखी बांधने पहुँची थीं परन्तु भाई को जेल प्रबंधन ने राखी नहीं बांधने दी।

सिर्फ राखी भेजने के अनुरोध को भी किया अस्वीकार

शिवपुरी की सर्किल जेल पर पहुँची महिलाएं जेल प्रबंधन से अनुरोध करने लगीं इसके बावजूद उन्हें नहीं मिलने दिया गया जिसके बाद कई बहिनों ने सिर्फ राखी भाइयों तक पहुचाने का अनुरोध भी किया परन्तु जेल के द्वार पर खड़े जेल प्रहरियों ने एक न सुनी। इस बीच कई बहिनों के आखों से आंसू की धारा बहती रही आखिरकार उन्हें अपने भाईयों के बिना राखी बांधे मायूस होकर लौटना पड़ा।

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