20 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा:तृतीय वर्ग कर्मचारी को अजाक का जिला संयोजक बनाया, प्रमुख सचिव से शिकायत

शिवपुरीएक महीने पहले
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आदिम जाति कल्याण विभाग शिवपुरी में प्रभारी जिला संयोजक के पद पर नियुक्त को लेकर शिवपुरी के वकील ने विभाग के प्रमुख सचिव को लिखित शिकायत भेजी है। महावीर जैन के तृतीय वर्ग कर्मचारी होने का हवाला देकर द्वितीय वर्ग के समान पदभार सौंपने पर ना सिर्फ आपत्ति उठाई है बल्कि छिंदवाड़ा में 20 हजार रु. की रिश्वत के साथ पकड़े जाने का भी उल्लेख किया है।

एडवोकेट विजय तिवारी ने आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सहित विभाग आयुक्त व ग्वालियर कमिश्नर को लिखित शिकायत भेजी है। एडवोकेट तिवारी का कहना है कि महावीर प्रसाद जैन मूलत: मप्र शासन के जनजातीय कल्याण विभाग में कार्यक्रम निरीक्षक के पद पर पदस्थ हैं। उक्त पद शासन के नियम अनुसार तृतीय श्रेणी संवर्ग का पद है।

तृतीय वर्ग के किसी भी कर्मचारी को द्वितीय अधिकारी एक मात्र शासन द्वारा प्रत्योजित किए जा सकते हैं। मप्र कोषालय संहिता के भाग 1 के सहायक नियम 125 के प्रावधान अनुसार आहरण, संवितरण का अधिकार केवल राजपत्रित अधिकारी को ही होता है जो महावीर जैन उक्त द्वितीय वर्ग अधिकारी की श्रेणी में नहीं आते हैं। महावीर जैन के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस छिंदवाड़ा द्वारा 20 हजार रु. की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने पर अपराध पंजीबद्ध हुआ था।

उक्त अपराध में महावीर जैन तत्समय निलंबित कर 28 फरवरी 2022 को पुन: बहाना किया था। उक्त प्रकरण वर्तमान में विशेष न्यायाधीश छिंदवाड़ा के न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं जनजातीय कल्याण विभाग शासन का अत्यधिक महत्वपूर्ण विभाग है। विभाग के गठन के उद्देश्य समाज के वंचित, शोषित व आखिरी छोर पर खड़े नागरिकों का कल्याण करना है।

इतने अधिक महत्वपूर्ण विभाग के जिला संयोजक जैसे महत्वपूर्ण पद पर तृतीय श्रेणी कर्मचारी को जिला संयोजक का पदभार सौंपना अपने आप में आश्चर्यजनक व नियम विरुद्ध है। वकील ने मामले में नियुक्ति निरस्त करने की मांग की है।

अतिरिक्त प्रभार मिला है
आदिम जाति कल्याण विभाग शिवपुरी का मुझे सिर्फ अतिरिक्त प्रभार मिला है। आहरण एवं संवितरण के अधिकारी डिप्टी कलेक्टर यादव के पास हैं। -महावीर जैन, प्रभारी जिला संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग शिवपुरी

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