सिंगरौली में प्रदूषण का खतरा:बिजली घरों से निकलने वाली फ्लाई ऐश से रहवासी परेशान, एनजीटी के निर्देशों की नहीं हो रही पालना

सिंगरौली16 दिन पहले
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सिंगरौली जिले में अब कोयला प्रदूषण के साथ-साथ फ्लाई ऐश का प्रदूषण लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। वजह यह है कि सड़क मार्ग से कोल परिवहन से रहवासी के साथ राहगीर परेशान तो थे ही अब बिजली घरों से निकलने वाले फ्लाई ऐश को भी सड़क से परिवहन की इजाजत दे दी गई।

छह महीने से अधिक समय से शुरू फ्लाई ऐश (कोयला की राख) का सड़क मार्ग से परिवहन रह वासियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। एक दिन पहले ही कलेक्टर ने कंपनियों को प्रदूषण कम करने की नसीहत दी। वहीं दूसरे ही दिन बैढऩ मुख्य मार्ग पर फ्लाई ऐश का मलबा उड़ेल दिया गया था।

वर्तमान में कोयला के साथ फ्लाई ऐश का परिवहन रह वासियों की समस्या का सबब बना हुआ है। प्रदूषण की वजह एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) के निर्देशों को नजर अंदाज करना है। जल व वायु प्रदूषण के हर रोज टूटते रिकॉर्ड को लेकर आखिरकार जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की नींद टूटी है।

कंपनियों को एक दिन पहले ही निर्देश दिया गया कि वह जैसे भी हो वायु व जल प्रदूषण को कम करने का उपाय करें। कंपनियों को 15 दिन का वक्त दिया गया है। कलेक्टर के निर्देश के दूसरे दिन ही बैढऩ मुख्यालय में मुख्य मार्ग पर फ्लाई ऐश से ओवरलोड वाहन में राख का मलबा उड़ेल दिया।

हालांकि इसे संज्ञान में लेते हुए अधिकारियों ने नगर निगम के सफाई कर्मियों से तत्काल साफ कराया, लेकिन बची राख का धूल से मुख्य मार्ग पर स्थित दुकानों के संचालक पूरे दिन परेशान रहे।

एनजीटी के निर्देश

  • रेलवे रूट से हो अधिकतम कोल परिवहन।
  • सड़क मार्ग से बंद किया जाए कोल परिवहन।
  • कोल परिवहन निर्धारित रूट से किया जाए।
  • वाहनों की ट्राली को ढककर परिवहन करें।
  • किसी भी स्थिति में वाहन ओवरलोड नहीं हों।
  • फ्लाई ऐश का परिवहन बंद वाहन में हो।
  • संबंधित सड़कों की नियमित सफाई हो।
  • फ्लाई ऐश डैम सुरक्षित किया जाए।

लेकिन जिले के जिम्मेदार इन नियमों को पालन कराने में कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहे है।

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