अधिकारियों ने किया अनदेखा:4000 की आबादी कुएं व हैंडपंप पर निर्भर, आधा किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी

जतारा15 दिन पहले
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हैंडपंप पर पानी भरने लगी महिलाअाें की भीड़। रोजाना सुबह से शाम तक महिलाओं को इसी तरह से पानी ढोना पड़ता है। - Dainik Bhaskar
हैंडपंप पर पानी भरने लगी महिलाअाें की भीड़। रोजाना सुबह से शाम तक महिलाओं को इसी तरह से पानी ढोना पड़ता है।

बिलगांय गांव में नल जल योजना की मांग,अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है अनदेखा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बिलगांय में नल-जल योजना न होने से ग्रामीण कुआं और हैंडपंपों पर निर्भर हैं। इस भीषण गर्मी में ग्रामीण महिलाएं दूर दराज से पानी लाने को मजबूर है। ग्रामीणों ने ग्राम में नल जल योजना शुरू करने के लिए जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाई है। इसके बावजूद यहां योजना प्रस्तावित नहीं की गई।

दरअसल गांव बिलगांय में पेयजल के लिए संसाधन नहीं जुटाए जा रहे हैं। जनपद की बड़ी पंचायतों में बिलगांय आती है। फिर यहां के ग्रामीण पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टिंकू जैन ने बताया कि ग्राम बिलगांय में एक दर्जन हैंडपंप लगे हुए हैं। जिसमें से आधे चालू हैं और कुछ पानी छोड़ चुके हैं।

ऐसी स्थिति में ग्रामीण महिलाएं कुआं से पानी भरकर लाने को मजबूर है। जो हैंडपंप चालू हैं, उन पर पानी भरने वाली महिलाओं की भीड़ अधिक रहती है। जिससे भारी समस्या का सामना करना पड़ता है। बिलगांय निवासी दयालु ने बताया कि गांव में नल जल योजना के लिए हम लोगों ने काफी प्रयास किया है, लेकिन अधिकारी सुनते ही नहीं हैं और न ही जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे रहे हैं। जबकि पंचायत बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है।

पानी भरने के लिए हैंडपंप पर इस तरह लगती है भीड़

4 हजार आबादी के बिलगांय में 8 हैंडपंप
ग्राम पंचायत बिलगांय की आबादी करीब चार हजार है। यहां पर इतनी बड़ी आबादी मात्र 8 हैंडपंप के भरोसे है। क्षेत्र में लगे 8 हैंडपंपों से ही लाेगाें प्यास बुझ रही है। इसके बावजूद भी पानी की पूर्ति नहीं होती है तो महिलाएं कुएं पर जाकर पानी भरती हैं। जिससे लोगों का दिन पानी भरने में ही निकल जाता है। लोग पानी के लिए दिन भर हैंडपंप और कुंआ पर खड़े रहते हैं।

सरकार का हर घर में पानी का सपना अधूरा
राजेंद्र रजक ने बताया कि केंद्र सरकार हर घर में पानी पहुंचाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन अधिकारी उपेक्षा पूर्ण रवैया बनाए हुए हैं। जिससे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अगर पंचायत में नल जल योजना प्रस्तावित होती है तो पानी की समस्या से लोगों को निजात मिल सकती है,लेकिन इसके प्रति अधिकारी गंभीर नहीं हैं।

यह हैं इसके जिम्मेदार

क्याें: ग्राम पंचायतों में केंद्र सरकार के द्वारा पेयजल सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कई ग्राम पंचायतें ऐसी भी हैं जिनकी आबादी बड़ी हैं लेकिन वहां नल जल योजना प्रस्तावित नहीं है। अधिकारियों को इस आेर ध्यान देना चाहिए।

नल जल योजना के लिए जनसंख्या प्राथमिकता नहीं है,बल्कि जल स्रोत होना जरूरी है। हमारा प्रयास है कि नल जल योजना का लाभ गांव तक पहुंचे। हम पंचायत में जाकर पता करेंगे,अगर जल स्रोत मिल सकता है तो योजना प्रस्तावित करेंगे।
- पीएल प्रजापति, एसडीओ, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जतारा

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