वैज्ञानिकों की सलाह-:खेतों से पानी‎ निकासी की व्यवस्था करें किसान‎

टीकमगढ़15 दिन पहले
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लगातार बारिश से दलहन-तिलहन, फलों एवं सब्जियों की सुरक्षा व नुकसान से बचाव के लिए लगातार किसानों को कृषि वैज्ञानिक जागरूक कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बीएस किरार, डॉ. आरके प्रजापति, डॉ. एसके सिंह, डॉ. यूएस धाकड़ एवं जयपाल छिगारहा ने बताया कि सबसे पहले किसान उड़द, मूंग, सोयाबीन, तिलहन सब्जी एवं फल बागान वाले खेतों से बारिश का पानी निकालने के लिए खेत के चारों तरफ बीच से नालियां बना दें, जिससे फसल में पानी नहीं रुकेगा।

जिन किसानों ने दलहन एवं तिलहन फसल की बुवाई चौड़ी कूड नाली प्रणाली या रिज फरौ मशीन से की है। वह किसान खेत की निचली तरफ मेड़ काट देवें उन्हें फसल के बीच में नाली की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। जिन किसानों ने फसलें छिड़काव विधि से बुवाई की हैं, उन्हें फसल के बीच एवं चारों तरफ नालियां बनाना जरूरी है।

जिन किसानों ने उड़द-मूंग की कटाई कर ली है वह कटी हुई फसल को खेत से उठाकर टीन शेड या छप्पर के नीचे फैला देवें और मौसम खुलते ही खलिहान या अन्य मैदान में त्रिपाल या पॉलिथीन सीट बिछाकर कटी फसल को फैलाकर तत्काल सुखाएं। उड़द, मूंग की परिपक्व अवस्था में फलियों में दानों को फफूंद से बचाने के लिए खड़ी फसल में कार्बेन्डाजिम दवा 200 ग्राम या टेबूकोनाझोल 25ईसी 250 मिली प्रति एकड़ कि दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

सब्जियों को पत्ती धब्बा तथा तना गलन से बचाने के लिए टेबूकोनाझोल 250 मिली या कार्बेन्डाजिम सल्फर 600 ग्राम या पायरोक्लोस्ट्रोबिन 20 डब्ल्यूजी दवा 150-200 ग्राम प्रति एकड़ से घोल बनाकर छिड़काव करें। जिससे फसल को खराब होने से बचाया जा सके।

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