सड़क पर बैठे दुकानदार:जतारा जनपद क्षेत्र के पठारी, सगरवारा व चंदेरा में अधूरे पड़े हाट बाजार

टीकमगढ़17 दिन पहले
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अधूरा पड़ा हाट-बाजार - Dainik Bhaskar
अधूरा पड़ा हाट-बाजार

जिले की ग्राम पंचायतों में सरकार ने विकास योजनाओं के तहत छोटे दुकानदारों को व्यवस्थित स्थान मिल सके। इसके लिए ग्रामीण इलाकों में हाट बाजार बनवाए। जिससे गांवों में लगने वाले हाट बाजार के दुकानदारों को बेहतर सुविधा मिल सकें। साथ ही वह अपने सामान को धूप व पानी से बचा सकें लेकिन गांवों में लगने वाले हाट बाजार आज भी सड़कों पर लग रहे हैं। शासन के तमाम प्रयासों के बाद भी आज तक यह छोटे दुकानदार हाट बाजारों में शिफ्ट नहीं हो पाए हैं। शासन से हाट बाजार के लिए मिलने वाले बजट को जिम्मेदारों ने बंदरबाट कर लिया।

जिससे अधिकांश गांवों में आज भी हाट बाजार अधूरे डले हैं। गांव में अधूरे डले हाट बाजारों को शुरू करवाने के लिए जिम्मेदारों के प्रयास भी नाकाफी हैं। ग्रामीण इलाकों में सड़कों के किनारे लगने वाले हाट बाजार के चलते कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। वहीं भारी वाहनों को निकलने में काफी दिक्कत होती है। जतारा जनपद क्षेत्र के पठारी, चंदेरा व सगरवारा गांव के हाट बाजार अधूरे डले हैं। जिससे इन गांवों में छोटे दुकानदार जो सब्जी और अन्य दुकानदार सड़कों के किनारे ही बैठकर अपनी आजीविका चल रहे हैं।

गांव के लोगों का कहना है कि यह मामले अभी का नहीं है। सालों से अधूरे डले इन हॉट बाजारों की तरफ जिम्मेदार अफसर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

दूसरे गांव से आने वाले सब्जी दुकानदार जमीन पर बैठ रहे
कई बार शिकायत करने के बाद भी आज तक इन अधूरे ढांचों को पूरा करने का प्रयास नहीं किया गया है, क्योंकि जिन लोगों ने बंदरबाट किया या तो वह पद पर नहीं हैं या स्थानांतरित हो गए हैं। ऐसे में इनकी जानकारी भी कोई देने के लिए तैयार नहीं है। ग्राम पठारी चंदेरा, ग्राम सगरवारा चंदेरा के हाट बाजारों की हालात देखकर यही लगता है कि वरिष्ठ जिम्मेदारों और तात्कालीन सरपंचों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार का खामियाजा इन छोटे दुकानदारों को भुगतना पड़ता है। ऐसे में दूसरे गांव से सब्जी लेकर पहुंचने वाले दुकानदारों को जमीन पर बैठकर ही सामान विक्रय करना पड़ता है।

व्यवस्थित काम हो तो ग्राम पंचायत की आय भी बढ़ेगी
हाट बाजार और फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों से ग्राम पंचायत में मनमानी वसूली की जाती है लेकिन यह वसूली तभी सार्थक होगी, जब दुकानदारों को एक निश्चित स्थान दे दिया जाए। दुकानदारों से मिलने वाली राशि से निश्चित ग्राम पंचायत की आय भी दोगुनी होगी। वहीं गांव में विकास कार्य भी गति पकड़ेंगे, बस जरूरत है ताे सरकारी योजनाओं को अमली जामा पहनाने की। ग्राम पंचायतों में बाजार या पशु पंजीयन वसूली की जाती है, लेकिन दुकानदारों की संख्या निर्धारित न होने के चलते वसूली होती भी या नहीं कोई लिखित में नहीं है।

ग्राम पंचायतों में अधूरे डले हाट बाजार के संबंध में लगातार जानकारी जुटाई जा रही है। पूर्व में किसने क्या किया है। इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। सड़कों पर लगने वाले हाट बाजार को शिफ्ट किया जा सके। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं कि अधूरे डले या जर्जर हो चुके हॉट बाजार की मरम्मत करवाई जाए। साथ ही जो भी दोषी सामने आते हैं उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। - सुदेश मालवीय, सीईओ, जिपं, टीकमगढ़

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