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मां मुझे मेरी ससुराल वालों ने बहुत मारा:आदिवासी मां की शपथ- बेटे की मौत को हत्या साबित करके रहूंगी, चाहे घर-जमीन सब बेचकर केस ही क्यों न लड़ना पड़े

टीकमगढ़10 दिन पहले
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फांसी पर लटका जगन्नाथ। - Dainik Bhaskar
फांसी पर लटका जगन्नाथ।

मदर्स-डे स्पेशल 17अप्रेल को बेटे ने फोन पर बताया था कि ससुराल में उससे मारपीट की,अब वह नहीं बचेगा, दूसरे दिन मिली फंदा लगाकर आत्महत्या करने की सूचना

17अप्रैल 2022 की शाम 7.30 बजे बेटे द्वारा फोन पर बताई आप बीती आज भी एक मां के कानों में गूंजती है, यह फोन पर सुनी छोटे बेटे की आखिरी आवाज थी, जो एक असहाय मां को अपने बेटे के लिए न्याय दिलाने के लिए आगे बढ़ा रही है। हम बात कर रहे हैं बड़ागांव धसान के अटरिया गांव की 60 साल की गौराबाई आदिवासी की, जो अपने 25 साल के बेटे की मौत को भुला नहीं पा रही हैं, उसे न्याय दिलाने के लिए लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रही हैं। बेटे को न्याय दिलाने के लिए सीएम से लेकर आईजी-डीआईजी तक पत्राचार कर चुकी हैं।

बेटे को मार कर फंदे पर टांगा, जमीन पर थे पैर, शरीर पर चोट के निशान भी मिले

17 अप्रैल 2022 की शाम जगन्नाथ ने फोन लगाया और कहा कि मां मुझे मेरी ससुराल वालों ने बहुत मारा है,मेरा बच पाना मुश्किल है। बस यह आखिरी बोल बेटे के मुंह से सुनने मिले। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। बस फिर क्या था बेटे का फोन बंद होते ही परेशान हो गई।

बड़े बेटे को इस बारे में बताया और 18 अप्रैल की सुबह 5.30 बजे किसी को बिना कुछ बताए भानपुरा खरगापुर के लिए निकली पड़ी, लेकिन कुछ दूर ही चल पाई और बड़े बेटे के पास सुबह 8 बजे फोन आया कि जगन्नाथ ने भानपुरा में फांसी लगा ली है, लेकिन साहब मेरे बेटे ने आत्महत्या नहीं की है।

उसे मारकर पेड़ पर टांगा गया है। मेरे बेटे के शरीर में चोट के निशान भी मिले थे। बेटे की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के लिए 17 दिन इंतजार करना पड़ा। जिसमें डॉक्टरों ने आत्महत्या की पुष्टि क्यों की, मुझे नहीं पता, मेरे बेटे का शव जमीन को छू रहा था।

उसे चोट लगी थी। मामले में गुमराह किया जा रहा है। साक्ष्यों के आधार पर एक बार फिर से जांच पड़ताल की जाए। पीएम रिपोर्ट का भी बारीकी से अध्ययन किया जाए, निश्चित मेरे बेटे के कातिल सामने आएंगे। मेरे बेटे ने अपनी जमीन गिरवी रखकर बहु के पिता को एक साल पहले 1लाख 30 हजार रुपए दिए थे, रकम वापस करने को लेकर कई बार बेटे और बहु के मायके वालों में कहासुनी हुई थी।

17 अप्रैल 2022 को बेटे के ससुर ने रकम वापस करने के लिए बुलाया था, पैसा तो ठीक, मेरा तो सब कुछ लुट गया। बेटे को न्याय दिलाकर रहूंगी, भले ही मेरा घर-जमीन सब बेचना पड़े।

(जैसा गौराबाई आदिवासी 60 साल, अटरिया बड़ागांव धसान ने दैनिक भास्कर को बताया)

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