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MP के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में भक्तों का तांता:पांडवकालीन इस मंदिर में हवन-अनुष्ठान करवाने से मिलता है जीत का आशीर्वाद, नवरात्रि के 6 दिनों में 1800 से अधिक ने किया हवन

आगर-मालवा11 दिन पहले
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आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में नवरात्रि पर लगातार भक्तों का तांता लगा हुआ है। तांत्रिक शक्तिपीठ इस मंदिर में हवन अनुष्ठान का विशेष महत्व माना जाता है, जिसके चलते सालभर यहां भक्त हवन अनुष्ठान करवाते हैं। नवरात्र में माता की आराधना के साथ हवन अनुष्ठान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि नवरात्रि के 6 दिनाें में ही यहां पर 1800 से अधिक हवन अनुष्ठान हाे चुके हैं।

अब तक यहां 3 लाख से अधिक भक्त माता के दर्शन कर चुके हैं। अभी मंदिर परिसर में मौजूद 35 कुंडों में हवन अनुष्ठान किए जा रहे हैं। 24 घंटे मंदिर में चलने वाले हवन में शामिल होने के लिए भक्तों को एक घंटे की बुकिंग के लिए 350 रुपए रुपए समिति को चुकाने होते हैं। शक्ति और विजय प्राप्ति के लिए एक पैर पर बैठकर हनुमान मुद्रा में भी यहां पंडितों द्वारा हवन अनुष्ठान करवाए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि पांडवकालीन इस मंदिर में अनुष्ठान करने से जीत का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मंदिर परिसर में 35 कुंडों में 24 घंटे हवन-पूजन चल रहा है।
मंदिर परिसर में 35 कुंडों में 24 घंटे हवन-पूजन चल रहा है।

ऐसी मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव जब विपत्ति में थे, तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें मां बगलामुखी की इसी स्थान पर उपासना करने को कहा था। तब मां की मूर्ति एक चबूतरे पर विराजित की गई। पांडवों ने इस त्रिगुण शक्ति स्वरूपा की आराधना कर विपात्तियों से मुक्ति पाई और अपना खोया हुआ राज्य वापस पा लिया। इस मंदिर में कई बड़े नेताओं के साथ अभिनेता भी मां के दरबार में माथा टेक चुके हैं। मंदिर में हवन करने से शत्रुओं पर विजय श्री की प्राप्‍ति होती है। इतना ही नहीं सभी बाधाएं दूर होती हैं। इसी के चलते चुनावों के समय तो मां के आशीर्वाद के लिए नेता और उनके परिजन मंदिर में माथा टेकते और हवन करते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां आने पर चुनावों में उन्हें न केवल टिकट मिलता है, बल्कि जीत भी हासिल होती है।

पीली चुनरी, पीला प्रसाद, पीले फूल का चढ़ावा

नलखेड़ा में बगलामुखी माता की प्रतिमा पीताम्बर स्वरूप की है। पीत यानि पीला, इसलिए यहां पीले रंग की सामग्री चढ़ाई जाती है। पीला कपड़ा, पीली चुनरी, पीला प्रसाद, पीले फूल आदि। मंदिर परिसर में हवन कुंड हैं, जिसमें आम और खास सभी भक्त अपनी आहुति देते हैं। नवरात्रि के दौरान हवन की क्रियाओं को संपन्न कराने का विशेष महत्त्व है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किए जाने वाले इस हवन में पीली सरसों, हल्दी, कमल गट्टा, तिल, जो, घी, नारियल, आदि का हवन किया जाता है। कहते हैं माता के इस मंदिर में हवन करने से सफलता के अवसर दोगुने हो जाते हैं।

6 दिनों में हवन की स्थिति

तारीखहवन
7 अक्टूबर242
8 अक्टूबर221
9 अक्टूबर389
10 अक्टूबर392
11 अक्टूबर311
12 अक्टूबर250

(मंदिर समिति के अध्यक्ष और एसडीएम सोहन कनास के अनुसार)

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