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सबसे पुरानी होली:हर घर से पांच कंडे लेकर सजाते थे 50 फीट ऊंची होलिका, इस साल प्रतीकात्मक दहन

नागदाएक महीने पहले
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  • पूरी रात होलिका के आसपास होते थे गरबे

नगर में पाड़ल्या रोड चौराहे पर नगर की सबसे पुरानी होलिका सजाई जाती है। तकरीबन 80 साल पहले यहां प्रत्येक घर से पांच कंडे एकत्रित कर होलिका सजाई जाती थी। होलिका दहन से पहले पूरी रात ढोल पर गरबे खेले जाते थे। हालांकि इस साल कोरोना के बढ़ते संक्रमण और प्रशासन की सख्ती के कारण केवल प्रतीकात्मक दहन यहां सोमवार तड़के होगा।

काल भैरव होली उत्सव समिति द्वारा पिछले कुछ वर्षों से इस होलिका दहन की जिम्मेदारी संभाली जा रही है। समिति के प्रमुख एवं आयोजक दिलीप रघुवंशी ने बताया मेरी उम्र 54 वर्ष है। बचपन से ही पाड़ल्या रोड चौराहे पर होलिका दहन देखते आ रहा हूं। इसके पहले पिताजी व दादाजी भी इस होलिका के बारे में बताते थे। इसलिए नगर की यह सबसे पुरानी होली है।

35-40 वर्ष पहले तक भी यहां होली पर बड़ा जलसा होता था। पूरी रात होलिका के आसपास गरबे खेले जाते थे। एक बड़ा कढ़ाव भी होलिका के पास रखा जाता था, जिसमें होलिका दहन के अगले दिन क्षेत्र के प्रत्येक घर से एक-एक सदस्य को लाकर कढ़ाव में डाला जाता था। करीब 20-25 वर्ष पहले तक भी होलिका के लिए प्रत्येक घर से पांच कंडे लिए जाते थे।

अब लकड़ी और कंडों को मिलाकर होलिका बनाई जाती है। इस वर्ष 100 कंडों और 5 क्विंटल से अधिक लकड़ियों से 10 फीट ऊंची होलिका बनाई गई है। सोमवार तड़के 4 बजे होलिका का दहन होगा।

एक महीने पहले से ही लकड़ियां एकत्रित करना शुरू हो जाता था

पाड़ल्या रोड चौराहा निवासी टीटी पोरवाल ने बताया 20-25 साल पहले तक युवाओं और क्षेत्रवासियों द्वारा एक महीने पहले ही लकड़ियों एवं कंडों का एकत्रीकरण शुरू हो जाता था। युवाओं की टोलियां कई स्थानों से जुगाड़ कर लकड़ियां एकत्रित कर लाती थी। जिसे मोहल्ले में ही आसपास के किसी घर में एकत्रित कर रखा जाता था। होलिका में कंडों व लकड़ियों के साथ ही कपूर भी बड़ी मात्रा में रखा जाता है। ताकि वातावरण भी शुद्ध रह सके।

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