कोर्ट कार्यवाही:एसिड माफिया नायर को जेल में ही रहना होगा, जमानत याचिका खारिज

नागदा2 महीने पहले
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  • जल, जंगल व जमीन को बर्बाद करने के साथ आपराधिक केस को आधार बनाया

अजनार नदी को प्रदूषित करने वाले नागदा के एसिड माफिया अरुण नायर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। न्यायालय में दाखिल की गई उसकी जमानत की याचिका को खारिज कर दिया गया है। जल, जंगल और जमीन को बर्बाद करने के साथ ही पूर्व में दर्ज गंभीर आपराधिक प्रकरण के आधार पर कोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज किया है। महू के समीप मानपुर में अजनार नदी के आसपास एसिड टैंकर माफियाओं ने 50 से अधिक वेस्ट एसिड भरे टैंकर डंप किए थे।

जिसकी वजह से अजनार नदी प्रदूषित हो गई और नदी के पानी का रंग काला एवं लाल हो गया। इस मामले में मानपुर पुलिस ने मुख्य आरोपी नायर को गिरफ्तार किया था। इसके खिलाफ पूर्व में हत्या, प्राणघातक हमले सहित अन्य गंभीर अपराध भी दर्ज हैं। नायर की निशानदेही से पुलिस ने नागदा व आसपास के क्षेत्रों से पेसेफिक पेट्रोकेम एंड केमिकल्स के 6 टैंकर भी जब्त किए।

तीन बार रिमांड अवधि के दौरान उसने पेसेफिक पेट्रोकेम एंड केमिकल्स में उसके तीन अन्य साथियों के नाम भी पुलिस को बताए थे, जो फिलहाल फरार चल रहे हैं। तीन बार रिमांड लिए जाने के बाद उसे कोर्ट से जेल भेज दिया था। नायर की ओर से उसके वकील ने महू की अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। इस याचिका पर चंबल बचाओ आंदोलन के संयोजक दिनेश दुबे की ओर से हाईकोर्ट एडवोकेट नीरज सोनी द्वारा आपत्ति ली गई थी।

इसके अलावा कुछ ग्रामीणों की ओर से भी आपत्ति ली गई थी। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह माना कि एसिड माफियाओं ने जल, जंगल और जमीन के साथ जीवन को भी बर्बाद किया है। साथ ही नायर पर गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज है, जो पुलिस को आगामी जांच को प्रभावित कर सकते हैं। इस आधार पर न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

ग्रामीणों ने 307 में केस दर्ज करने की रखी मांग

इस मामले में कुछ ग्रामीणों की ओर से भी धारा 307 में प्रकरण दर्ज करने की मांग रखी गई है। एसिड माफियाओं ने जिन जमीनों पर वेस्ट एसिड बहाया था, वहां जमीन बंजर हो चुकी है। साथ ही जमीन से प्रदूषित पानी ट्यूबवेल व अन्य जल स्रोतों से आ रहा है। जिससे कुछ ग्रामीण त्वचा रोग व अन्य बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। इस कारण उन्होंने एसिड माफिया नायर व उसके साथियों के खिलाफ प्राणघातक हमले की धारा में भी प्रकरण दर्ज करने की मांग रखी है।

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