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जलसंकट की आहट:बनबना तालाब सूखा, चंबल से आस, राेजाना 2 एमसीएफटी की खपत, 30 जून तक जरूरत है 64 एमसीएफटी पानी की

नागदा14 दिन पहले
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बनबना तालाब, जाे इस तरह लगभग पूरी तरह सूख चुका है। - Dainik Bhaskar
बनबना तालाब, जाे इस तरह लगभग पूरी तरह सूख चुका है।
  • दावा- 147 एमसीएफटी पानी संरक्षित, हकीकत- नायन डेम में 30.78 एमसीएफटी पानी ही वर्तमान में पेयजल के लिए उपलब्ध

चिलमिलाती गर्मी के साथ अब जलाशयाें में पानी का स्तर घटने लगा है, जाे जलसंकट की आहट दे सकता है। हालांकि सरकारी आंकड़ाें पर नजर डाले ताे 73 दिन का पानी हमारे पास सुरक्षित बताया जा रहा है, यानी 147 एमसीएफटी पानी संरक्षित हैं, जबकि हकीकत कुछ और ही है।

चंबल में लगातार पानी घटता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बनबना तालाब पूरी तरह सूख चुका है, इसमें पानी शेष नहीं है। ऐसे में अगर चंबल की माॅनिटरिंग सही तरीके से नहीं की गई ताे मानसून आने के पहले जलसंकट की स्थिति बन सकती है। शहर की आस मात्र चंबल नदी के पानी पर ही टिकी हुई है। चंबल नदी से नागदा नगर, रेलवे, खाचराैद के अलावा 22 गांव की पेयजल व्यवस्था की जाती है, ताे उद्याेग में भी यहीं से पानी जाता है।

141 एमसीएफटी क्षमता वाल तालाब सूखा

बनबना तालाब बारिश में ओवरफ्लाे हाे गया था। इसमें 141 एमसीएफटी पानी का संग्रहण हाेता है। तालाब का पानी सिंचाई के अलावा शहर के पेयजल के लिए सुरक्षित रखा जाता है, लेकिन बीते कुछ सालाें से इसका उपयाेग नहीं हाे रहा है।

क्याेंकि चंबल से ही शहर की पूर्ति हाे रही है। चिलचिलाती गर्मी और पानी चाेरी हाेने से तालाब का पूरा पानी खत्म हाे चुका है। मात्र एक छाेटे से गड्ढे में पानी भरा हुआ है। इससे किसान तालाब में खेती कर रहे हैं। यानी यहां शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए पानी उपलब्ध ही नहीं है।

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