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  • Even After 2 Years, The Distance Of 10 Steps Could Not Be Covered, 107 Tree Cutting File, Where Is The Investigation Report, No One Even Knows

लापरवाही:2 साल बाद भी 10 कदम की दूरी तय नहीं कर पाई 107 पेड़ कटाई की फाइल, जांच प्रतिवेदन कहां है, यह भी किसी काे नहीं जानकारी

नागदा16 दिन पहले
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  • मामला दो साल पहले जूना नागदा राेड पर लकड़ी माफियाओं द्वारा पेड़ काटने का

काेराेना संक्रमण ने पेड़-पाैधाें और प्राकृतिक ऑक्सीजन का महत्व बता दिया लेकिन इन पेड़-पाैधाें पर कई लकड़ी माफिया आरी चलाने का काम करते हैं। उसके बाद भी प्रशासन इन लकड़ी माफियों पर काेई कार्रवाई नहीं कर पाता है। ऐसा ही मामला जूना नागदा की सरकारी जमीन से 107 पेड़ काटने का है। जहां 2 साल पहले लकड़ी माफियाओं ने रात के अंधेरे में 107 पेड़ाें पर आरी चला दी थी।

प्रशासन ने माैका मुआयना और पंचनामा तक बनाया था लेकिन बीते 2 साल में पेड़ कटाई की फाइल तहसील कार्यालय से एसडीएम कार्यालय के बीच की 10 कदम की दूरी तय नहीं कर पाई है। यही वजह है कि अब तक लकड़ी माफिया बेनकाब नहीं हाे सके और हरे पेड़ाें पर आरी चलाने वाले बेधड़क अब भी अपना काम कर रहे हैं। यहां तक कि 107 पेड़ कटाई का जांच प्रतिवेदन कहां है, इस बात से भी अधिकारी अनजान हैं।

रात में मशीन से काटे गए थे हरे पेड़
जूना नागदा रोड पर ईंट भट्टों का संचालन होता है। दिनभर मजदूरों की आवाजाही बनी रहती है। इसलिए लकड़ी माफियाओं द्वारा रात के अंधेरे में बड़े-बड़े हरे पेड़ों पर मशीन चलाई थी। इससे पेड़ जल्दी ही धराशायी हो गए और रात में ही लकड़ियों को शिफ्ट भी कर दिया। इस वजह से जंगल के अंदर पेड़ों की कटाई के बारे में किसी को खबर तक नहीं लगी थी। जब माफियाओं ने सड़क किनारे पेड़ काटना शुरू किए तो अवैध कटाई की जानकारी सामने आई थी।
वट वृक्ष तक काे काटने से नहीं छाेड़ा
प्रशासन ने जब कटे पेड़ाें की गिनती शुरू की थी ताे 107 पेड़ कटे मिले थे। जिसमें यह बात सामने आई थी कि लकड़ी माफियाओं ने बबूल, यूकेलिप्टस के साथ वट वृक्ष को भी नहीं छोड़ा है। जबकि वटवृक्ष को धार्मिक मान्यता होने से काटा नहीं जाता। बता दें कि चंबल शुद्धिकरण योजना के तहत शहर से निकलने वाले गंदे पानी काे साफ कर जूना नागदा रोड किनारे सरकारी जमीन पर 24 साल पहले सैकड़ों पौधे लगाए थे, जाे जंगल का रूप ले चुके थे।

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