चातुर्मास 4 से / पांच माह में से केवल 6 दिन हमें धर्म आराधना के लिए दें -साध्वीश्री

X

  • साध्वी मंडल का हुआ खाचरौद में नगर प्रवेश, साेशल डिस्टेंस के साथ समाजजन ने की अगवानी

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:08 AM IST

खाचराैद. प्रदेशा में हमारा पहला चातुर्मास खाचराैद में होने जा रहा है, इस 5 माह के वर्षावास में विभिन्न प्रकार के तप-जप, जीन वाणी के श्रवण, नित्य दर्शन से अपने जीवन को एक नई दिशा देने का सुअवसर आपको प्राप्त हुआ है, जिसे व्यर्थ न जाने दें। प्रतिदिन आप एक घंटे का समय हमें देंगे तो कुल पांच माह में 150 घंटे मतलब करीब 6 दिन हम आपसे धर्म आराधना के लिए मांग रहे हैं। यह बात मंगलवार को साध्वी मंडल ने प्रवेश के बाद कही।


वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर भवन में गुजरात लिंबड़ी अजरामर संप्रदाय के साध्वी पूज्या पीयूषाजी की सुशिष्या विश्वासिनीजी, विकासिनीजी, विशोधिनीजी, भव्यांशिनीजी आदि ठाणा 4 का चातुर्मास के लिए मंगलवार काे मोती काका बुड़ावन वाला के निवास स्टेशन रोड से मंगल प्रवेश हुआ। सामाजिक दूरी बनाकर श्रावक-श्राविका, युवा सहित सभी मंडलों ने जय महावीर के नारे लगाकर साध्वी मंडल की अगवानी की। महावीर भवन में प्रवेश के उपरांत साध्वी मंडल द्वारा नमोकर मंत्र, भक्तांबर स्तोत्र के पाठ के बाद धर्म चर्चा में कहा 4 जुलाई से चातुर्मास में तेले, आयंबिल की लड़ी, बच्चों के ज्ञान शिविर से चातुर्मास की शुरुआत हाेगी।

स्वागत गीत पूजा बरखेड़ावाला, भावना बुपक्या ने प्रस्तुत किया। संचालन श्रीसंघ अध्यक्ष संतोष बरखेड़ावाला ने किया। चातुर्मास अध्यक्ष महेंद्र चंडालिया ने संपूर्ण श्रीसंघ से चातुर्मास को जप, तप से सफल बनाने की विनती की। श्रीसंघ की ओर से प्रभावना वितरण व विजय बरड़िया द्वारा मास्क का वितरण किया गया। आभार चातुर्मास समिति सचिव सुज्ञान बरखेड़ावाला ने माना।

श्री हरि आज से पांच महीने तक करेंगे शयन
देवशयनी एकादशी आज बुधवार को है। भगवान श्री हरि यानी विष्णु पांच महीने के लिए शयन करेंगे। इसके बाद 25 नवंबर देवउठनी एकादशी को जागेंगे। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि इस बार अधिक मास आ रहा है। यह अश्विन यानी क्वांर माह का महीना रहेगा। इसलिए भगवान पांच माह शयन करेंगे। पांच माह बाद मांगलिक कार्य शुरू होंगे। आज देवशयन कर रहे हैं। हर साल चार माह के लिए भगवान सोते हैं, इस बार एक माह ज्यादा विश्राम करेंगे। मान्यता है कि जब देव सोते हैं, तब मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। वैसे हर तीन साल में अधिक मास आता है। पं रोहित दीक्षित के अनुसार देवशयन के कारण आज से कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस साल नवंबर व दिसंबर में शादियां कम होंगी। नवरात्र एक महीने अंतराल से आने के कारण दशहरा 26 अक्टूबर व दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। इसके साथ ही चातुर्मास का समापन होगा।

भजन-पूजन से मिलता है पुण्य
 आज बुधवार देवशयनी एकादशी से चतुर्मास शुरू हो रहा है। नगर के पं. पुरुषोत्तम भट्ट के अनुसार चातुर्मास के चलते आज से कई वस्तुएं खाना बंद करना होती है। अधिक मास में हिंदू समाजजन सुबह-शाम धार्मिक ग्रंथों का पठन-पाठन करते हैं। इन दिनों में देव दर्शन धार्मिक स्थानों की यात्रा का बड़ा महत्व है। हालांकि इस बार वैश्विक महामारी के कारण इस बार विभिन्न देव स्थानों, धार्मिक नगरियों में भागवत कथाओं का आयोजन नहीं होगा, किंतु अधिक मास में भागवत कथाओं के आयोजन का बड़ा महत्व है। भागवत कथा कराने वाले यजमान तथा सुनने वाले श्रोताओं को अनंत गुना फल प्राप्त होने का उल्लेख धर्म ग्रंथों में है।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना